Online Car Sale Fraud: आमतौर पर लोग पुरानी कारें खरीदने के लिए कुछ भरोसेमंद और सर्टिफाइड वेबसाइट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ऐसे भी कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कुछ लोग खुद को किसी ऑनलाइन कार बिक्री प्लेटफॉर्म का कर्मचारी बताकर खरीदारों से संपर्क करते हैं. नई दिल्ली में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां दिल्ली पुलिस ने 32 साल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. उस पर आरोप है कि उसने त्रिलोकपुरी के एक निवासी को ऑनलाइन पुरानी कार बेचने का झांसा देकर 2 लाख रुपये की ठगी की. आरोपी की पहचान अमन सेठी के रूप में हुई है. पूर्वी जिले की साइबर पुलिस स्टेशन टीम ने आरोपी को गिरफ्तार किया है.
मामला क्या था?
पीड़ित ने 16 अप्रैल को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. पीड़ित से एक अनजान व्यक्ति ने संपर्क किया और खुद को एक ऑनलाइन कार सेल प्लेटफॉर्म से जुड़ा बताया. आरोपी ने कार की तस्वीरें और जानकारी भेजकर भरोसा जीत लिया. इसके बाद उसने बुकिंग और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पीड़ित से 2 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए. पैसे मिलने के बाद न तो कार दी गई और न ही रकम वापस की गई, कुछ समय बाद आरोपी ने पीड़ित से संपर्क भी पूरी तरह बंद कर दिया. पुलिस ने जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की कार्रवाई जारी है.
पुलिस के अनुसार, शिकायत को गंभीरता से लेते हुए, इंस्पेक्टर पवन यादव और ACP पवन कुमार की देखरेख में पुलिस की एक विशेष टीम गठित की गई. जांच के दौरान, अधिकारियों ने पैसों के लेन-देन का पता लगाया, जो भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के एक खाते से जुड़ा था. KYC दस्तावेजों, खाते की गतिविधियों और डिजिटल सबूतों की गहन जांच के बाद आरोपी की पहचान हो सकी. पुलिस ने बताया कि आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए अपना घर छोड़कर फरार हो गया था.
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हालांकि, लगातार निगरानी और मिली विशेष जानकारियों के आधार पर, टीम ने उसकी हरकतों पर नजर रखी और आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ के दौरान उसने जांच अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन उसके खिलाफ मिले सबूतों से उसका अपराध साबित हो गया. आगे की जांच में यह भी पता चला कि वह पहले भी कृष्णा नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज इसी तरह के एक धोखाधड़ी के मामले में शामिल रहा है, जिससे पता चलता है कि वह इस तरह की धोखाधड़ी को एक पैटर्न के तौर पर अंजाम देता रहा है.
कैसे बनाता था शिकार
वह उन लोगों को निशाना बनाता था जो ऑनलाइन पुरानी कारें खोज रहे होते थे. वह खुद को किसी जानी-मानी कंपनी का कर्मचारी बताता था, फर्जी जानकारियां देकर लोगों का भरोसा जीतता था और फिर अपने निजी बैंक खाते में एडवांस पेमेंट की मांग करता था. पैसे मिलने के बाद वह पीड़ित के सवालों का जवाब देने में टालमटोल करता था और आखिरकार गायब हो जाता था.
पुलिस ने जारी की एडवाइजरीपुलिस ने एडवाइजरी जारी करते हुए नागरिकों से ऑनलाइन विक्रेताओं के साथ लेनदेन करते समय सावधान रहने का आग्रह किया. पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे विक्रेताओं की प्रमाणिकता की जांच करें और बिना उचित जांच-पड़ताल के निजी खातों में पैसे ट्रांसफर करने से बचें. किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में, नागरिक हेल्पलाइन नंबर 1930 पर इसकी रिपोर्ट कर सकते हैं या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क कर सकते हैं.
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