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Noida Airport: पीपीपी मॉडल से तैयार हुआ नोएडा एयरपोर्ट, ILS System से बनेगा 'हाई-टेक', जानिए क्या-क्या होगी सुविधा

Jewar Airport: नोएडा एयरपोर्ट को पीपीपी मॉडल से तैयार किया गया है. इसके साथ ही इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS System) से यह एयरपोर्ट और हाई-टेक बनेगा. जानिए क्या-क्या होगी सुविधा...

Noida Airport: पीपीपी मॉडल से तैयार हुआ नोएडा एयरपोर्ट, ILS System से बनेगा 'हाई-टेक', जानिए क्या-क्या होगी सुविधा
नोएडा एयरपोर्ट इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम क्या है?
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Jewar Airport: जेवर में बना इंटरनेशनल एयरपोर्ट उद्घाटन के लिए तैयार है. यह एयरपोर्ट दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) के बाद क्षेत्र का दूसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मार्च को जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण (फेज‑1) का उद्घाटन करेंगे. नोएडा एयरपोर्ट को पीपीपी मॉडल से तैयार किया गया है. इसके साथ ही इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS System) से यह एयरपोर्ट और हाई-टेक बनेगा. चलिए आपको बताते हैं क्या है पीपीपी मॉडल और इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम क्या है?

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इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम क्या है? (ILS System)

इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (Instrument Landing System - ILS) एक सटीक ग्राउंड-बेस्ड रेडियो नेविगेशन सिस्टम है, जो पायलटों को खराब मौसम, घने कोहरे, या कम दृश्यता जैसी चुनौतीपूर्ण स्थितियों में भी सुरक्षित रूप से रनवे पर उतरने में मदद करता है. यह विमान को रनवे के साथ सटीक एलाइमेंट और उतरने के लिए सही मार्गदर्शन प्रदान करता है.

ILS System कैसे करता काम है?

लोकलाइजर- यह रनवे के अंत में स्थित होता है और पायलट को यह बताता है कि विमान रनवे की सेंटरलाइन के बाएं है, दाएं है या बिल्कुल सही सीध में है.

ग्लाइड स्लोप- यह रनवे के किनारे स्थित होता है और यह सुनिश्चित करता है कि विमान सही ऊर्ध्वाधर कोण पर उतर रहा है, न बहुत ऊपर और न बहुत नीचे.

मार्कर बीकन- ये रनवे से कुछ दूरी पर लगे होते हैं, जो पायलट को यह बताते हैं कि वे रनवे से कितनी दूर हैं.

पीपीपी मॉडल से तैयार हुआ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को पब्लिक‑प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत तैयार किया गया है. इस परियोजना पर कुल 11,200 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है. एयरपोर्ट के पहले चरण (फेज‑1) में यह हर साल 1.2 करोड़ (12 मिलियन) यात्रियों को संभाल सकेगा. जब इसका पूरा विकास हो जाएगा, तब इसकी क्षमता 7 करोड़ (70 मिलियन) यात्री प्रति वर्ष तक पहुंचने की उम्मीद है. इससे यह भारत के सबसे बड़े एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में शामिल हो जाएगा. इस एयरपोर्ट में 3,900 मीटर लंबी रनवे बनाई गई है, जिस पर बड़े अंतरराष्ट्रीय विमान भी उतर और उड़ान भर सकेंगे. इसके अलावा यहां इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और आधुनिक एयरफील्ड लाइटिंग सिस्टम लगाए गए हैं. इन सुविधाओं की मदद से एयरपोर्ट दिन‑रात और हर मौसम में सुचारू रूप से काम कर सकेगा.

पर्यावरण‑अनुकूल

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को नेट‑जीरो उत्सर्जन वाला एयरपोर्ट बनाने के लक्ष्य के साथ डिजाइन किया गया है. यहां एनर्जी बचाने वाली तकनीक और पर्यावरण के अनुकूल तरीके अपनाए गए हैं. एयरपोर्ट की बनावट में आधुनिक सुविधाओं के साथ‑साथ भारतीय संस्कृति की झलक भी नजर आएगी, जिसमें घाटों और हवेलियों से प्रेरित डिजाइन शामिल है.

बेहतर कनेक्टिविटी के लिए मल्टी‑मॉडल हब

यह एयरपोर्ट यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित है और इसे एक मल्टी‑मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में तैयार किया जा रहा है. यहां से सड़क, रेल, मेट्रो और क्षेत्रीय परिवहन सेवाओं के जरिए आसान कनेक्टिविटी मिलेगी. इससे यात्रियों के साथ‑साथ कार्गो ट्रांसपोर्ट भी तेज और सुविधाजनक हो जाएगा.

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