ट्रेन में जब 250 या 500 का जुर्माना लगता है, तो ये आपको बहुत ही छोटी सी रकम लगती होगी. लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर मध्य रेलवे ने एक डेटा शेयर किया. इस पोस्ट में बताया गया है कि रेलवे की ओर से अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच बिना टिकट या अनियमित टिकट के साथ यात्रा करने वाले 15.46 लाख यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई की गई और उनसे 121 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया. आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले साल की तुलना में बिना रेलवे टिकट यात्रा करने के मामलों में करीब 7 प्रतिशत से अधिक और जुर्माना वसूली में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.
मुंबई से सबसे ज्यादा बिना टिकट के पकड़े गए यात्री
रेलवे की ओर से शेयर किए गए आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई से सबसे ज्यादा यात्रियों को पकड़ा गया है. यहां 7.40 लाख यात्रियों से करीब 49.50 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया. रेलवे का कहना है कि टिकट जांच अभियान लगातार तेज किया जा रहा है और स्टेशनों से लेकर ट्रेनों तक विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं.
बिना टिकट सफर पड़ेगा भारी! मध्य रेल ने न्यूनतम जुर्माना ₹500 किया, जुलाई में ₹20.10 करोड़ वसूले#indianrailways #RailwayUpdate #RailwayPenalty #PassengerNews pic.twitter.com/nqWtvaROu9
— Indian Railway भारतीय रेल (News Update) (@Indianrailgadi) August 16, 2026
बिना टिकट वाले रेल यात्रियों का कितना लगता है जुर्माना?
रेलवे नियमों के अनुसार अगर कोई व्यक्ति बिना टिकट यात्रा करते हुए पकड़ा गया, तो उसे न सिर्फ टिकट का किराया देना पड़ता है, बल्कि अतिरिक्त दंड भी भरना होता है. ये जुर्माना न्यूनतम 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया है. यानि अगर आप बिना टिकट के AC कोच में जाते हैं, तो आपको 500 रुपये जुर्माने के साथ-साथ AC कोच में बैठने का फुल किराया भी देना होगा.
वहीं, अगर कोई यात्री जनरल टिकट लेकर स्लीपर, एसी-3, एसी-2 या एसी-1 कोच में ट्रैवल करते हुए पकड़ा जाता है, तो उससे मूल किराए और जिस श्रेणी में यात्रा कर रहा है उसके किराए का अंतर वसूला जाता है. इसके अलावा पेनाल्टी भी देनी पड़ती है.
AC और स्लीपर कोच में गलती पड़ सकती है महंगी
कई बार यात्री भीड़ या सुविधा के कारण बिना रिजर्वेशन स्लीपर या AC कोच में चढ़ जाते हैं. हालांकि, टिकट चेकर (TTE) की ओर से पकड़े जाने पर उन्हें संबंधित श्रेणी का किराया, अतिरिक्त शुल्क और जुर्माना देना पड़ सकता है. लंबी दूरी की ट्रेनों में यह राशि हजार रुपये से अधिक भी पहुंच सकती है, जो यात्रा की दूरी और कोच श्रेणी पर निर्भर करती है.
रेलवे ने यात्रियों से की अपील
रेलवे का कहना है कि बिना टिकट यात्रा न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे रेलवे के राजस्व पर भी असर पड़ता है. यही राजस्व यात्री सुविधाओं, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च किया जाता है. इसलिए यात्रियों को हमेशा वैध टिकट लेकर ही यात्रा करनी चाहिए, ताकि जुर्माने और अनावश्यक परेशानियों से बचा जा सके.
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