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2026 में लागू हुए EPFO के 5 नए नियम, क्लेम सेटलमेंट और ऑटो-ट्रांसफर हुआ बेहद आसान

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने वर्ष 2026 में अपने करोड़ों खाता धारकों को राहत देते हुए कई बड़े नीतिगत और तकनीकी बदलाव किए हैं. जानिए ईपीएफओ के इन नए 5 बड़े अपग्रेड्स के बारे में सब कुछ.

2026 में लागू हुए EPFO के 5 नए नियम, क्लेम सेटलमेंट और ऑटो-ट्रांसफर हुआ बेहद आसान
3 दिन में क्लेम से लेकर ऑटो-ट्रांसफर तक, EPFO के ये 5 बड़े बदलाव हर नौकरीपेशा के काम के हैं
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नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) केवल एक बचत खाता नहीं, बल्कि बुढ़ापे की सबसे बड़ी आर्थिक सुरक्षा की नींव है. लेकिन अक्सर पीएफ क्लेम पास होने में देरी, केवाईसी की पेचीदा प्रक्रिया और नौकरी बदलने पर पीएफ ट्रांसफर जैसी समस्याओं से कर्मचारियों को जूझना पड़ता था.

नौकरीपेशा वर्ग की इन्हीं परेशानियों को खत्म करने के लिए EPFO Update 2026 के तहत सिस्टम में कई बड़े बदलाव किए गए हैं. इन नए अपग्रेड्स के जरिए डिजिटल सेवाओं को सुपर फास्ट और कागजी कार्रवाई को कं से कं कर दिया गया है. दरअसल, ईपीएफओ ने अपने आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह से अपग्रेड किया है, ताकि उमंग ऐप और यूनिफाइड मेंबर पोर्टल का सर्वर पीक आवर्स के दौरान डाउन न हो. इसकी वजह से नए और मजबूत डिजिटल प्लेटफॉर्म से पासवर्ड रीसेट करने, पासबुक डाउनलोड करने या क्लेम स्टेटस चेक करने में सर्वर एरर की समस्या से राहत मिली है. अब पीएफ बैलेंस चेक करना और क्लेम स्टेटस को ट्रैक करना पहले से कहीं अधिक तेज और पारदर्शी हो गया है. 2026 में लागू हुए EPFO के 5 नए नियम नीचे दिए गए हैं.

ऑल सेटलमेंट से चुटकियों में होंगे पीएफ क्लेम

पहले पीएफ क्लेम फाइल करने के बाद पैसों के बैंक खाते में आने के लिए 7 से 20 दिनों तक का लंबा इंतजार करना पड़ता था. अब नए ऑटो सेटलमेंट सिस्टम के तहत योग्य क्लेम्स को बहुत तेजी से प्रोसेस किया जा रहा है. अगर आपका डाटा पूरी तरह सही है, तो बीमारी, शिक्षा, शादी या घर खरीदने जैसी जरूरतों के लिए एडवांस क्लेम बिना किसी इंसानी दखल के कंप्यूटर सिस्टम के जरिए ऑटोमेटिक तरीके से स्वीकृत हो जाता है. यानी इस सुविधा के शुरू होने से अब क्लेम का पैसा महज 3 से 4 दिनों में सीधे खाता धारकों के बैंक खाते में जमा हो जाता है.

नौकरी बदलने पर आसान हुआ पीएफ ट्रांसफर

एक कंपनी छोड़कर दूसरी कंपनी ज्वाइन करने पर अक्सर पीएफ बैलेंस ट्रांसफर करने में कर्मचारियों के पसीने छूट जाते थे. पुरानी कंपनी के अप्रूवल के चक्कर में कई बार क्लेम अटक जाता था. लिहाजा, इस झंझट से खाता धारकों को मुक्ति दिलाने के लिए ईपीएफओ के नए अपग्रेड के बाद अब जब भी धाता धारक नौकरी बदलते हैं, तो आपका पुराना पीएफ बैलेंस यूएएन (UAN) के तहत अपने आप नई कंपनी के साथ लिंक और ट्रांसफर हो जाएगा. अब आपको बार-बार ऑनलाइन फॉर्म 13 भरने या एम्प्लॉयर के दफ्तर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

देश के किसी भी ईपीएफओ ऑफिस से लें सेवाएं

ईपीएफओ ने अपने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के पुराने नियमों को खत्म करते हुए एनीवेयर सर्विस की शुरुआत की है. इसके तहत अब आप चाहे दिल्ली में रहते हों, मुंबई में या किसी छोटे शहर में अगर आपको ईपीएफओ से जुड़ी कोई शिकायत है या ऑफलाइन सेवा चाहिए, तो आप देश के किसी भी नजदीकी ईपीएफओ (EPFO) दफ्तर में जाकर अपनी समस्या का समाधान करवा सकते हैं. अब किसी खास क्षेत्रीय दफ्तर पर ही निर्भर रहने की मजबूरी खत्म हो गई है.

झंझट मुक्त केवाईसी अपग्रेड

पीएफ खाते से पैसे निकालने या प्रोफाइल में सुधार के लिए केवाईसी (KYC) का पूरा होना जरूरी है. पहले नाम की स्पेलिंग, डेट ऑफ बर्थ या माता-पिता के नाम में मामूली अंतर होने पर भी केवाईसी रिजेक्ट हो जाती थी. इस नए बदलाव के बाद अब बैंक विवरण, पैन (PAN) और जनसांख्यिकीय डेटा को अपडेट करने की प्रक्रिया को बेहद सरल और यूजर फ्रेंडली बना दिया गया है. अब जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करते ही सिस्टम उनका तुरंत वेरीफाई कर लेता है, जिससे पेंडिंग रिक्वेस्ट की संख्या में भारी कमी आई है.

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