मोबाइल फोन आज हर किसी की जरूरत बन चुका है. अब, लोग फोन खरीदते वक्त तो हर छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देते हैं लेकिन उसके लिए चार्जर बिना सोचे-समझें ले लेते हैं. अगर आप भी अब तक ऐसा ही करते आए हैं, तो ये आर्टिकल आप ही के लिए है. आज के समय में बाजार में ऐसे कई चार्जर मिल जाते हैं जो बिल्कुल असली जैसे दिखते हैं, लेकिन अंदर से नकली होते हैं. ये चार्जर खराब क्वालिटी के पार्ट्स से बने होते हैं और फोन के साथ-साथ आपकी जान और घर की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं अपने मोबाइल के लिए सही चार्जर कैसे चुनें और किस तरह के चार्जर खरीदने से बचें-
क्यों जरूरी है सही चार्जर खरीदना?
बता दें कि नकली चार्जर जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते हैं. ऐसे चार्जर इस्तेमाल करने से कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं. जैसे-
- चार्जर और मोबाइल जरूरत से ज्यादा गर्म हो सकते हैं, इससे बैटरी फूलने या फटने का खतरा बढ़ जाता है.
- फोन की बैटरी जल्दी खराब हो सकती है.
- फोन में शॉर्ट सर्किट हो सकता है.
- आग लगने जैसी गंभीर दुर्घटना हो सकती है.
- बिजली का झटका लगने का खतरा रहता है.
- चार्जिंग पोर्ट खराब हो सकता है.
- फोन बहुत धीरे चार्ज होता है.
- बैटरी जल्दी खत्म होने लगती है.
- इसके अलावा लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर पूरा फोन भी खराब हो सकता है.
वजन देखकर पहचानें
- असली चार्जर थोड़ा भारी होता है क्योंकि उसमें अच्छी क्वालिटी के पार्ट्स लगे होते हैं.
- नकली चार्जर अक्सर हल्के होते हैं क्योंकि उनमें सस्ते और कम गुणवत्ता वाले पार्ट्स इस्तेमाल किए जाते हैं.
- असली चार्जर की बॉडी साफ, मजबूत और अच्छी फिनिश वाली होती है.
- नकली चार्जर ज्यादा चमकदार, खुरदरे किनारों वाले या कमजोर बनावट के हो सकते हैं.
- असली चार्जर के पिन सीधे और मजबूती से फिट होते हैं.
- नकली चार्जर के पिन ढीले, टेढ़े या हिलते हुए नजर आ सकते हैं.
- चार्जर जरूरत से ज्यादा हल्का लगे.
- यूएसबी पोर्ट ढीला हो.
- केबल की क्वॉलिटी खराब लगे.
- पिन हिलते हों या सही से फिट न हों.
- प्रिंटिंग फीकी हो या स्पेलिंग की गलती हो.
- मॉडल नंबर या बैच नंबर न लिखा हो.
- BIS मार्क धुंधला या अधूरा हो.
- इस्तेमाल करते ही चार्जर बहुत गर्म होने लगे.
- चार्जिंग के दौरान फोन असामान्य रूप से गर्म हो.
- बैटरी तेजी से खत्म होने लगे.
- बाजार की कीमत से बहुत कम दाम में मिल रहा हो या
- BIS ऐप में उसका रजिस्ट्रेशन नंबर सत्यापित न हो.
अब कई कंपनियां फोन के साथ चार्जर नहीं देतीं. ऐसे में अलग से चार्जर खरीदना पड़ता है. ऐसे में नया चार्जर खरीदते समय उसका BIS मार्क जरूर देखें. इसके लिए अपने चार्जर पर लिखा CRS (Product Registration Number) देखें. इसके बाद BIS Care ऐप में ये नंबर दर्ज करें. अगर नंबर रजिस्टर नहीं मिलता, तो चार्जर नकली हो सकता है.
इन सब से अलग पैकेजिंग और प्रिंटिंग को भी ध्यान से पढ़ें. ध्यान रखें चार्जर खरीदते समय बचाए गए कुछ सौ रुपये, बाद में हजारों रुपये का नुकसान करा सकते हैं. इसलिए अगली बार चार्जर खरीदते समय सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता पर भी ध्यान दें.
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