How do companies adjust salaries: जब भी आप किसी नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाते हैं या फिर कोई नई जगह जॉइन करते हैं तो सबसे पहले सैलरी पर बात होती है. HR हमेशा सैलरी को लेकर एक सवाल ऐसा जरूर पूछता है कि सैलरी कितनी है इनहैंड कितनी है और बेसिक सैलरी कितनी है. कई बार आप सैलरी की ज्यादा डिमांड करते है और HR उसे मानते हुए आपके CTC में एडजस्ट कर देता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कंपनी सैलरी को कैसे एडजस्ट करती है और ये बेसिक सैलरी और इनहैंड सैलरी का खेल क्या है.
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कंपनियां सैलरी एडजस्ट कैसे करती हैं?
दरअसल, कर्मचारी की बेसिक सैलरी पूरी तरह टैक्स के अंदर आती है, लेकिन सैलरी के कुछ हिस्से जैसे, पर टैक्स में छूट मिलती है. इसी वजह से अगर सैलरी में बेसिक सैलरी घटा दी जाए और बाकी अलाउंस बढ़ा दिए जाएं, तो कर्मचारी को टैक्स कटने के बाद ज्यादा इन-हैंड सैलरी मिलती है. कंपनी भी सैलरी स्ट्रक्चर को इस तरह सेट कर सकती है कि टैक्स कम कटे.
मान लीजिए किसी की सैलरी में बेसिक: 50,000, HRA: 20,000 और स्पेशल अलाउंस: 10,000 है. अगर, बेसिक को घटाकर 40,000 कर दिया जाए और HRA या स्पेशल अलाउंस बढ़ा दिए जाएं, तो कुछ हिस्सा टैक्स से बच जाता है और कुल टैक्स कम लगता है.
बिना CTC बढ़ाए इन-हैंड सैलरी कैसे बढ़ाएंCTC में आपकी पूरी सैलरी के साथ-साथ कंपनी के योगदान जैसे PF, इंश्योरेंस आदि भी शामिल होते हैं. कई बार कंपनी बेसिक सैलरी कम, जिससे कर्मचारी और कंपनी दोनों का PF योगदान कम हो जाता है. अलाउंस बढ़ा देती है, जो सीधे कर्मचारी को मिलते हैं और इससे कर्मचारी को ज्यादा इन-हैंड सैलरी मिलती है, जबकि कंपनी का कुल CTC लगभग वही रहता है.
PF फंड कैसे कम करती है कंपनीPF बेसिक सैलरी का 12% होता है, जो कर्मचारी और कंपनी दोनों के लिए है. अगर, बेसिक कम कर दी जाए तो दोनों तरफ से PF में कम पैसे जमा होते हैं. कंपनी का PF खर्च कम हो जाता है और कर्मचारी को भी हाथ में थोड़ी ज्यादा सैलरी मिलती है.
कम बेसिक सैलरी से कंपनी क्या फायदा?कम बेसिक सैलरी रखने से कंपनियों को कई फायदे मिलते हैं. जैसे परफॉर्मेंस के आधार पर मिलने वाले अलाउंस बढ़ाने में सुविधा, टैक्स प्लानिंग के हिसाब से सैलरी को एडजस्ट करना आसान और अलग-अलग पर्क्स और रीइंबर्समेंट जोड़ने की गुंजाइश आदि.
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