Induction cooktop : अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के चलते दुनियाभर में फ्यूल संकट गहराने की संभावना बढ़ गई है. इससे भारत भी अछूता नहीं रहने वाला है. देश में भी इन दिनों एलपीजी की कुछ हद तक किल्लत देखने को मिल रही है. ऐसे में केंद्र सरकार अब खाना पकाने के दूसरे ऑप्शंस का रुख कर रही है. ऐसे में इंडक्शन चूल्हों पर खास फोकस है और इसका प्रोडक्शन बढ़ाने की तैयारी की जा रही है. इंडक्शन चूल्हा और उससे जुड़े बर्तनों की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), बिजली मंत्रालय और विदेश व्यापार महानिदेशालय सहित कई विभागों के सीनियर अधिकारियों की बैठक हुई. इसमें घरेलू प्रोडक्शन को बढ़ाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर खास जोर दिया गया है.
बड़े लेवल पर खरीदारी की तैयारी
बिजली मंत्रालय के तहत आने वाली पब्लिक सेक्टर कंपनी एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) ने तीन साल पहले गो-इलेक्ट्रिक योजना शुरू की थी, जिसका मकसद सस्ते दाम पर इंडक्शन चूल्हा और उससे जुड़े बर्तन उपलब्ध कराना था. अब एक बार फिर EESL ने कमान संभाल ली है और यह करीब 5 लाख इंडक्शन चूल्हें खरीदने की तैयारी कर रही है. इसके जरिए EESL का मकसद कीमतों को कंट्रोल करना है.
2000 रुपए से शुरू होती हैं कीमत
बाजार में इंडक्शन चूल्हों की कीमत आमतौर पर लगभग 2000 रुपए से शुरू होती है, लेकिन एलपीजी की संभावित कमी के कारण इनकी कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल इंडक्शन सस्ते करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसकी खरीदारी बढ़ाने के लिए बिजली की दरों को किफायती बनाना और बिजली की सप्लाई को बेहतर करना भी जरूरी होगा.
प्रतिदिन 28 लाख एलपीजी सिलिंडर की डिलीवरी
भारत में लगभग 33 करोड़ एलपीजी कनेक्शन हैं. खाना पकाने के लिए भारी संख्या में लोग LPG का ही इस्तेमाल करते हैं. इसलिए इसकी सप्लाई में दिक्कत का असर सीधे आम लोगों पर पड़ सकता है. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने जानकारी दी है कि वह हर दिन करीब 28 लाख एलपीजी सिलिंडर की सप्लाई कर रही है. कंपनी ने यह भी साफ किया है कि मौजूदा परिस्थितियों के बावजूद सप्लाई सामान्य बनी हुई है. IOC ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे घबराकर एक्स्ट्रा बुकिंग या स्टॉक न करें. इसके साथ ही लगभग 87% एलपीजी बुकिंग अब डिजिटल माध्यमों (SMS और IVRS) से हो रही है और डिलीवरी OTP के जरिए वेरिफाई की जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है.
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