EPS-95 Minimum Pension Hike 2026: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की पेंशन योजना EPS-95 से जुड़े करीब 81 लाख पेंशनधारकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है. दरअसल, पिछले एक दशक से भी ज्यादा वक्त से न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी की बाट जोह रहे पेंशनधारक अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर बड़ा आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं.
मौजूदा वक्त में EPS-95 के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन केवल 1,000 रुपये प्रतिमाह है, जो कि सितंबर 2014 से लागू है. बढ़ती महंगाई के दौर में इतनी कम राशि को नाकाफी बताते हुए ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति ने 5 अगस्त को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है.
ये हैं पेंशनधारकों की मुख्य मांगे
दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत ने स्पष्ट किया कि पेंशनधारक लंबे समय से शांतिपूर्ण ज्ञापन और अपीलों के जरिए अपनी बात सरकार तक पहुंचा रहे हैं. लेकिन, इस पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है. लिहाजा, अब समिति ने सरकार के के सामने एक बार फिर से अपनी मांगे रखी. इन लोगों ने सरकार ने नीचे दी गई मांगें रखीं हैं.
- न्यूनतम मासिक पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर सीधा 7,500 रुपये प्रतिमाह किया जाए.
- बढ़ी हुई पेंशन के साथ महंगाई सूचकांक के आधार पर डीए भी जोड़ा जाए.
- पेंशनधारकों और उनके जीवनसाथी को मुफ्त और बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाए.
- सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के मुताबिक सभी पात्र सेवानिवृत्त कर्मचारियों को हायर पेंशन का वास्तविक लाभ जल्द से जल्द दिया जाए.
अगर मांगें मंजूर हुई, तो किसे और कितना मिलेगा फायदा?
यदि केंद्र सरकार और श्रम मंत्रालय ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति की इन मांगों पर सहमति जता देते हैं, तो इसका सीधा असर देश के 81 लाख से अधिक ईपीएस पेंशन धारकों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा. फिलहाल, ज्यादातर ईपीएस-95 पेंशन धारकों को औसतन सिर्फ 1,171 रुपये मासिक पेंशन मिलती है. अगर इन लोगों की मांग मंजूर होने पर हर पात्र पेंशनधारक को कम से कम 7,500 रुपये तय राशि मिलेगी. दशकों तक देश के औद्योगिक और आर्थिक विकास में योगदान देने वाले रिटायर्ड कर्मचारियों को वृद्धावस्था में किसी अन्य पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलेगी. पेंशन के साथ मुफ्त स्वास्थ्य बीमा के माध्यम से इलाज मिलने से बुजुर्ग दंपत्तियों को अपनी जमा पूंजी या बच्चों के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा.
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'आश्वासन नहीं, ठोस कदम चाहिए'
इस पूरे मामले पर कमांडर अशोक राउत का कहना है कि 7,500 रुपये न्यूनतम पेंशन की मांग कोई अतिरिक्त या अनुचित लाभ नहीं है, बल्कि यह गरिमापूर्ण जीवन, बुनियादी जरूरतों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी मूलभूत आवश्यकता है. वहीं, समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार की ओर से बार बार सिर्फ आश्वासन दिए गए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस नीतिगत फैसला नहीं लिया गया. समिति ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार उनकी मांगों की लगातार अनदेखी करती रही, तो मजबूरन उन्हें आत्मदाह जैसा कदम उठाना पड़ेगा.
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