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यूपी में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना होगा आसान, इतने दिन की ट्रेनिंग के बाद सीधे मिलेगा DL

उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया आसान होगी. ADT सेंटर में 28 दिन की ट्रेनिंग और फॉर्म-5 के बाद लोगों को सीधे DL मिलेगा. इस दौरान ऑटोमैटिक टेस्ट नहीं देना होगा. इसका मकसद स्किल्ड ड्राइवर तैयार करना है.

यूपी में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना होगा आसान, इतने दिन की ट्रेनिंग के बाद सीधे मिलेगा DL
इन ट्रेनिंग सेंटरों पर एप्लिकेंट्स को कुल 28 दिनों के टेस्टिंग प्रोसेस से गुजरना होगा.
फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया जल्द ही और आसान होने जा रही है. यूपी ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने एक नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसके जरिए अब एप्लिकेंट्स को कई मामलों में ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्ट देने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसके लिए राज्य के सभी जिलों में मान्यता प्राप्त एक्रेडिटेड ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (ADT सेंटर) खोले जाएंगे. इन सेंटरों में 28 दिनों की स्पेशल ट्रेनिंग पूरी करने और फॉर्म-5 प्राप्त करने के बाद एप्लिकेंट्स को सीधे ड्राइविंग लाइसेंस मिल सकेगा.

फर्रुखाबाद से होगी शुरुआत

इस योजना की शुरुआत सबसे पहले फर्रुखाबाद जिले से की जाएगी, जबकि दूसरा सेंटर कानपुर में खोला जाएगा. इसके बाद इसे धीरे-धीरे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा. इन सेंटरों को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से मान्यता प्राप्त होगी. इसके लिए एप्लिकेंट्स को हेडक्वार्टर्स लेवल पर आवेदन करना होगा और तय प्रक्रिया से गुजरना होगा.

28 दिन की ट्रेनिंग में क्या-क्या सिखाया जाएगा?

इन ट्रेनिंग सेंटरों पर एप्लिकेंट्स को कुल 28 दिनों के टेस्टिंग प्रोसेस से गुजरना होगा. इसमें लगभग 28 घंटे की सिमुलेटर ट्रेनिंग और असली सड़क पर ड्राइविंग की प्रैक्टिस शामिल होगी. इसके साथ ही सड़क सुरक्षा नियम, ट्रैफिक साइन, व्हीकल कंट्रोल और सुरक्षित ड्राइविंग स्किल्स भी सिखाई जाएंगी. ट्रेनिंग के दौरान एप्लिकेंट्स के ड्राइविंग प्रदर्शन का आकलन ऑटोमैटिक ट्रैक और सेंसर टेक्नोलॉजी के जरिए किया जाएगा.

फॉर्म-5 के बाद मिलेगा लाइसेंस

ट्रेनिंग पूरी करने के बाद एप्लिकेंट्स को फॉर्म-5 जारी किया जाएगा. इस सर्टिफिकेट का मतलब होगा कि एप्लिकेंट अब स्किल्ड ड्राइवर बन चुका है. इसके बाद अलग से ड्राइविंग टेस्ट देने की जरूरत नहीं होगी. फॉर्म-5 अपलोड और बायोमेट्रिक प्रोसेस पूरा होने के बाद आरआई या एमवीआई वेरिफिकेशन करेगा और अंत में एआरटीओ प्रशासन की ओर से ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा.

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कितनी होगी फीस 

इस ट्रेनिंग की फीस लगभग 6000 रुपए हो सकती है. प्रशासन का मानना है कि इस नए सिस्टम से न केवल ड्राइविंग प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी, बल्कि सड़क हादसों में भी कमी आएगी, क्योंकि केवल ट्रेन्ड और सर्टिफाइड ड्राइवर ही लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे.

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