Jhandewalan mandir aarti booking : चैत्र नवरात्रि पर झंडेवाला मंदिर में माता के दर्शन करने जा रहे हैं और लंबी लाइन में नहीं लगना चाहते हैं तो दर्शन ऑनलाइन बुक कर सकते हैं. भक्त झंडेवाला मंदिर के लिए मंदिर की वेबसाइट पर जाकर अपनी बुकिंग कर सकते हैं. श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट www.jhandewalamandir.org पर जाकर पहले से बुकिंग कर सकते हैं. वहीं, भक्त क्यूआर कोड (QR Code) से बुकिंग कर सकते हैं. ऑनलाइन व्यवस्था के तहत श्रद्धालु मोबाइल नंबर से पंजीकरण कर क्यूआर कोड के माध्यम से भी बुकिंग करवा सकते हैं. इससे आपको तय समय पर विशेष प्रवेश द्वार से मंदिर में प्रवेश मिल सकेगा.
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भक्तों नोट कर लें प्रवेश मार्ग
मंदिर में प्रवेश रानी झांसी मार्ग, देश बंधु गुप्ता मार्ग और वरुणालय की तरफ से किया जा सकता है. भक्त दर्शन करके जैसे ही निकासी द्वार से बाहर जाएंगे आपको भंडारे का प्रसाद देने की व्यवस्था की गई है. माता रानी के दर्शन में भक्तों को कोई परेशानी नहीं होगी.
मंदिर के नियम और प्रबंध की खास व्यवस्था
- भीड़ नियंत्रण: इस बार भीड़ को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी महिला सेवादारों को दी गई है. ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके.
- प्रतिबंध: मंदिर में फूल माला या किसी भी प्रकार का प्रसाद चढ़ाने की अनुमति नहीं है. भक्त यह लेकर मंदिर में ना पहुंचे.
- भंडारा: दर्शन के बाद निकास द्वार पर श्रद्धालुओं को 'भंडारे का प्रसाद' दिया जाएगा, इससे जाते समय वह आराम से प्रसाद ले सकेंगे और किसी भी तरह की भीड़ में नहीं फंसेंगे.
- सीधा प्रसारण: उन लोगों के लिए भी विशेष बंदोबस्त किया गया है, जो लोग मंदिर नहीं आ सकते हैं, वे यूट्यूब और फेसबुक पेज पर कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण देख सकते हैं.
सुविधाएं और इतिहास
मेट्रो की सुविधा: सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन झंडेवालान (ब्लू लाइन) है. वहां से मंदिर तक के लिए निशुल्क ई-रिक्शा सेवा उपलब्ध हैं. इससे लोगों को मंदिर पहुंचने में कोई दिक्कत नहीं होगी.
पार्किंग की व्यवस्था : श्रद्धालुओं की गाड़ियों के लिए अलग-अलग जगहों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है, इसलिए लोगों को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है. आसानी से अपनी कार को पार्क कर सकते हैं.
इतिहास है पुराना : मंदिर के ट्रस्टी के अनुसार, यहां पहले घना जंगल था. माता के भक्त बद्री दास को सपने में दर्शन देने के बाद खुदाई में मूर्ति मिली और मंदिर की स्थापना हुई. मंदिर के शिखर पर बड़े ध्वज (झंडे) के कारण इसका नाम 'झंडेवाला' पड़ा.
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