धर्मकांटा चलाने वालों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. बताया जा रहा है कि सरकार ने पुराने नियमों में बदलाव किया है. इसके तहत धर्मकांटा चलाने वालों के साथ-साथ उद्योगों, गोदामों और ट्रक ऑपरेटरों के लिए कारोबारी सुगमता बढ़ने के लिए नया नियम लागू की जा रही है. सरकार ने एक टन या उससे अधिक क्षमता वाले वजन तौल उपकरणों के सत्यापन के लिए अनुपालन मानकों में ढील दी है. इसके लिए उपभोक्ता मामलों के विभाग ने विधिक माप विज्ञान (सामान्य) नियम, 2011 में संशोधनों को अधिसूचित किए हैं.
उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा सोमवार (6 जुलाई) को जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, नए प्रावधानों में उच्च क्षमता वाले वजन उपकरणों के सत्यापन के लिए मानक वजन की जरूरत को वैज्ञानिक और ‘रिपीटेबलिटी टेस्ट' (दोहराव आधारित परीक्षण) के आधार पर कम किया गया है.
पुराने नियमों में थी कई व्यावहारिक कठिनाई
पुराने नियमों के तहत एक टन या उससे अधिक क्षमता वाले उपकरणों के सत्यापन के दौरान अधिकतम क्षमता के कम-से-कम 50 प्रतिशत या एक टन (जो भी अधिक हो) के बराबर मानक वजन का उपयोग करना अनिवार्य था, जिसके बाद स्थिर भार का इस्तेमाल किया जाता था. मंत्रालय ने कहा कि इन प्रावधानों के कारण उद्योगों और धर्मकांटा संचालकों को परिवहन, लागत और संचालन से जुड़ी कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था.
क्या किया गया संशोधन
अब संशोधित नियमों के तहत इस आवश्यकता को कम करते हुए अधिकतम क्षमता के 50 प्रतिशत से घटाकर केवल 20 प्रतिशत कर दिया गया है, बशर्ते कि रिपीटेबलिटी टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा हो. मंत्रालय ने कहा कि इससे सत्यापन की सटीकता और विश्वसनीयता के मानकों से कोई समझौता नहीं होगा. मंत्रालय ने कहा कि ये संशोधन कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देने और उपभोक्ता संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से साक्ष्य-आधारित नियामकीय सुधारों का हिस्सा हैं.
इन बदलावों से बड़े पैमाने पर मानक वजन के परिवहन और प्रबंधन से जुड़ी लागत कम होगी, उच्च क्षमता वाले उपकरणों का सत्यापन तेजी से हो सकेगा और परिचालन में लगने वाला समय भी घटेगा.
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