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डिजिटल से डिफेंस तक बज रहा है 'मेड इन Bharat' का डंका, इस 5 इनोवेशन की बदौलत भारत है मार्केट लीडर
भारत ने तेजस, आकाश-ब्रह्मोस मिसाइल, विक्रम प्रोसेसर, कोवैक्सिन और UPI जैसे स्वदेशी इनोवेशन से रक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल तकनीक में नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया है.
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Bharat Biotech के को-फाउंडर डॉ. कृष्ण इल्ला को जॉन्स हॉपकिन्स ने डीन मेडल से किया सम्मानित
डॉ. कृष्ण इल्ला ने कहा, "मैं इस मेडल को भारत की वैज्ञानिक उत्कृष्टता की वैश्विक मान्यता के रूप में स्वीकार करता हूं. इस मेडल को मैं अपने देश को समर्पित करता हूं, जिसने विज्ञान और अनुसंधान व विकास को आगे बढ़ाकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है.
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Covaxin टीके पर BHU की स्टडी पर ICMR ने उठाए सवाल, प्रोफेसर को दी चेतावनी, मांगा जवाब
भारत बायोटेक की तरफ से डेवलप्ड कोरोना की वैक्सीन "COVAXIN" को लेकर बीएचयू ने स्टडी की थी. बीएचयू की स्टडी को स्प्रिंगर नेचर ने छापा था.
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Fact Check : क्या कोवैक्सिन का टीका लगवाने के 2 साल बाद हो रही है लोगों की मौत? सभी Updates
Can Covaxin Lead To Death : चलते-फिरते, नाचते-गाते और यहां तक की बैठे-बैठे ही स्वस्थ दिखने वाले लोगों की अचानक मौतें चर्चा का विषय बनी हुईं हैं. इसी के आधार पर सोशल मीडिया में तरह-तरह की अफवाह चल रही है. यहां पढ़ें In-Depth रिपोर्ट...
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"लगाए गए CORONA के टीकों के असर की हो जांच": डॉक्टरों के समूह ने सरकार से किया आग्रह
रेडियोलॉजिस्ट एवं कार्यकर्ता डॉ. तरुण कोठारी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘सरकार ने कोविड रोधी टीकाकरण के बाद दुखद मौतों के बढ़ते मामलों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है और वैज्ञानिक जांच के बिना कोविड टीकों को 'सुरक्षित एवं प्रभावी' के रूप में प्रचारित करना जारी रखा है.’’
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एस्ट्राजेनेका विवाद के बाद कोविशील्ड वैक्सीन लगवाने वालों को डरने की कितनी जरूरत?
एस्ट्राजेनेका ने फरवरी में ब्रिटिश हाईकोर्ट को बताया था कि उनकी कोविड-19 वैक्सीन के खतरनाक साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं. कुछ मामलों में थ्रॉम्बोसिस थ्रॉम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम यानी TTS हो सकता है. इसके फॉर्मूले से भारत में सीरम इंस्टीट्यूट (Serum Institute of India) ने कोवीशील्ड (Covishield) नाम से वैक्सीन बनाई थी.
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हमारी वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट नहीं : AstraZeneca पर सवाल उठने के बाद Covaxin बनाने वाली कंपनी
ब्रिटेन की दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) ने स्वीकार किया है कि उसकी कोविड-19 वैक्सीन (Covid-19 vaccine) के दुर्लभ दुष्प्रभाव हो सकते हैं. इसके कुछ दिनों बाद भारतीय वैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक (Bharat Biotech) ने गुरुवार को कहा कि कोवैक्सीन (Covaxin) को सबसे पहले सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करके विकसित किया गया था.
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क्या Covaxin को राजनीतिक दबाव में दी गई थी मंजूरी? सरकार ने बताई सच्चाई
वहीं, कोवैक्सीन बनाने वाली भारत बायोटेक ने कहा कि कोवैक्सीन को लाइसेंस देने में किसी तरह का दबाव या बाहरी मदद नहीं ली गई है. जिन लोगों ने ये खबरें फैलाई हैं, वें ग्लोबल प्रोडक्ट डेवलपमेंट और लाइसेंस के प्रोसेस को समझने में असमर्थ हैं.
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Corbevax को Covaxin और Covisheeld के टीके वाले वयस्कों के लिए बूस्टर खुराक के रूप में मिली मंजूरी
केंद्र सरकार ने उन वयस्कों को 'कॉर्बेवैक्स' टीके की बूस्टर खुराक देने को मंजूरी दे दी है, जो कोविशील्ड या कोवैक्सीन टीके की दो खुराक ले चुके हैं.
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भारत बायोटेक ने 2 से 18 साल तक के बच्चों पर कोवैक्सीन बूस्टर के परीक्षण की मंजूरी मांगी
फिलहाल कोवैक्सीन और कोविशील्ड की एहतियाती खुराक 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के वैसे लोगों को दी जाती है, जिन्हें दूसरी खुराक लिये हुए नौ महीने पूरे हो चुके हैं.
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डिजिटल से डिफेंस तक बज रहा है 'मेड इन Bharat' का डंका, इस 5 इनोवेशन की बदौलत भारत है मार्केट लीडर
भारत ने तेजस, आकाश-ब्रह्मोस मिसाइल, विक्रम प्रोसेसर, कोवैक्सिन और UPI जैसे स्वदेशी इनोवेशन से रक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल तकनीक में नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया है.
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Bharat Biotech के को-फाउंडर डॉ. कृष्ण इल्ला को जॉन्स हॉपकिन्स ने डीन मेडल से किया सम्मानित
डॉ. कृष्ण इल्ला ने कहा, "मैं इस मेडल को भारत की वैज्ञानिक उत्कृष्टता की वैश्विक मान्यता के रूप में स्वीकार करता हूं. इस मेडल को मैं अपने देश को समर्पित करता हूं, जिसने विज्ञान और अनुसंधान व विकास को आगे बढ़ाकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है.
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Covaxin टीके पर BHU की स्टडी पर ICMR ने उठाए सवाल, प्रोफेसर को दी चेतावनी, मांगा जवाब
भारत बायोटेक की तरफ से डेवलप्ड कोरोना की वैक्सीन "COVAXIN" को लेकर बीएचयू ने स्टडी की थी. बीएचयू की स्टडी को स्प्रिंगर नेचर ने छापा था.
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Fact Check : क्या कोवैक्सिन का टीका लगवाने के 2 साल बाद हो रही है लोगों की मौत? सभी Updates
Can Covaxin Lead To Death : चलते-फिरते, नाचते-गाते और यहां तक की बैठे-बैठे ही स्वस्थ दिखने वाले लोगों की अचानक मौतें चर्चा का विषय बनी हुईं हैं. इसी के आधार पर सोशल मीडिया में तरह-तरह की अफवाह चल रही है. यहां पढ़ें In-Depth रिपोर्ट...
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"लगाए गए CORONA के टीकों के असर की हो जांच": डॉक्टरों के समूह ने सरकार से किया आग्रह
रेडियोलॉजिस्ट एवं कार्यकर्ता डॉ. तरुण कोठारी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘सरकार ने कोविड रोधी टीकाकरण के बाद दुखद मौतों के बढ़ते मामलों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है और वैज्ञानिक जांच के बिना कोविड टीकों को 'सुरक्षित एवं प्रभावी' के रूप में प्रचारित करना जारी रखा है.’’
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एस्ट्राजेनेका विवाद के बाद कोविशील्ड वैक्सीन लगवाने वालों को डरने की कितनी जरूरत?
एस्ट्राजेनेका ने फरवरी में ब्रिटिश हाईकोर्ट को बताया था कि उनकी कोविड-19 वैक्सीन के खतरनाक साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं. कुछ मामलों में थ्रॉम्बोसिस थ्रॉम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम यानी TTS हो सकता है. इसके फॉर्मूले से भारत में सीरम इंस्टीट्यूट (Serum Institute of India) ने कोवीशील्ड (Covishield) नाम से वैक्सीन बनाई थी.
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हमारी वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट नहीं : AstraZeneca पर सवाल उठने के बाद Covaxin बनाने वाली कंपनी
ब्रिटेन की दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) ने स्वीकार किया है कि उसकी कोविड-19 वैक्सीन (Covid-19 vaccine) के दुर्लभ दुष्प्रभाव हो सकते हैं. इसके कुछ दिनों बाद भारतीय वैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक (Bharat Biotech) ने गुरुवार को कहा कि कोवैक्सीन (Covaxin) को सबसे पहले सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करके विकसित किया गया था.
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क्या Covaxin को राजनीतिक दबाव में दी गई थी मंजूरी? सरकार ने बताई सच्चाई
वहीं, कोवैक्सीन बनाने वाली भारत बायोटेक ने कहा कि कोवैक्सीन को लाइसेंस देने में किसी तरह का दबाव या बाहरी मदद नहीं ली गई है. जिन लोगों ने ये खबरें फैलाई हैं, वें ग्लोबल प्रोडक्ट डेवलपमेंट और लाइसेंस के प्रोसेस को समझने में असमर्थ हैं.
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Corbevax को Covaxin और Covisheeld के टीके वाले वयस्कों के लिए बूस्टर खुराक के रूप में मिली मंजूरी
केंद्र सरकार ने उन वयस्कों को 'कॉर्बेवैक्स' टीके की बूस्टर खुराक देने को मंजूरी दे दी है, जो कोविशील्ड या कोवैक्सीन टीके की दो खुराक ले चुके हैं.
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भारत बायोटेक ने 2 से 18 साल तक के बच्चों पर कोवैक्सीन बूस्टर के परीक्षण की मंजूरी मांगी
फिलहाल कोवैक्सीन और कोविशील्ड की एहतियाती खुराक 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के वैसे लोगों को दी जाती है, जिन्हें दूसरी खुराक लिये हुए नौ महीने पूरे हो चुके हैं.