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AI समिट में शर्टलेस प्रोटेस्ट... नई नहीं है भारत के इंटरनेशनल इवेंट्स में कांग्रेस की 'हंगामा पॉलिटिक्स'
- Friday February 20, 2026
- Written by: मनोज शर्मा
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने शर्ट उतारकर जो प्रदर्शन किया, उसने इस इंटरनेशनल इवेंट को राजनीतिक रंग दे दिया. हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस ने भारत के किसी इंटरनेशनल इवेंट में विरोध जताया हो.
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पीएम मोदी को 111वीं गाली, फिर पड़ेगी विपक्ष पर भारी?
- Wednesday September 3, 2025
- Written by: अखिलेश शर्मा
2014 में लोक सभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने ‘चाय वाला’ कह कर मोदी का मजाक उड़ाया था. मोदी ने इसका इस्तेमाल प्रचार में किया और बीजेपी ने कई जगह चायवालों का सम्मान कर पलटवार किया. जब मोदी के लिए ‘नीच’ शब्द का प्रयोग किया गया तब उन्होंने बताया कि ओबीसी वर्ग से आने वाले एक ग़रीब माँ के बेटे को किस तरह अपमानित किया जा रहा है.
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‘रेवड़ी राजनीति’ की गिरफ्त में क्यों हैं वोटर, किस पार्टी का होगा बेड़ा पार?
- Tuesday November 21, 2023
- धर्मेंद्र सिंह
इस बार के विधानसभा चुनाव मध्यप्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में वोटरों को लुभाने के लिए घोषणाओं की बरसात हो गई है. सारी पार्टी की घोषणाओं का लब्बोलुआब है, किसान की कर्ज माफी, धान और गेहूं की खरीदारी की कीमत बढ़ाना, सस्ता सिलेंडर, मुफ्त बिजली, किसान सम्मान निधि बढ़ाने, मुफ्त राशन बढ़ाने का है.
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कर्नाटक के नतीजे AAP के लिए बुरी खबर क्यों?
- Tuesday May 23, 2023
- अमिताभ तिवारी
आम आदमी पार्टी के दो वरिष्ठ मंत्री मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के भ्रष्टाचार के मामलों में जेल जाने के बाद पार्टी कमजोर पड़ी है. पार्टी की छवि को गहरा धक्का पहुंचा है.
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लेकिन यह जीत अभी अधूरी है
- Tuesday February 11, 2020
- प्रियदर्शन
यह सच है कि दिल्ली के नागरिकों ने ध्रुवीकरण की राजनीति को नकार दिया है. लेकिन यह इतना सपाट मामला नहीं है. नागरिकों के फ़ैसले के पीछे और भी वजहें हो सकती हैं. आम आदमी पार्टी का दावा है कि उसके काम की वजह से उसे वोट मिले. बहुत दूर तक यह बात सही लगती है. मुफ्त बिजली-पानी, महिलाओं के लिए मुफ़्त यात्रा और स्कूलों और मोहल्ला क्लीनिकों की सुविधा इस महानगर के ग़रीब और निम्नमध्यवर्गीय लोगों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं रही. हालांकि सांप्रदायिकता ऐसी अंधी होती है कि उसे कई बार कुछ भी दिखाई नहीं पड़ता है.
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राहुल बजाज के 'डर के माहौल' वाले बयान के बाद रवीश कुमार की चिट्ठी, CII FICCI के नाम
- Monday December 2, 2019
- रवीश कुमार
राहुल बजाज के बयान को मामूली बताने के लिए अभी तक कुछ अख़बारों में विज्ञापन दे देना था जैसे टेक्सटाइल वालों ने विज्ञापन देकर बताया था कि कैसे उनका सेक्टर बर्बाद हो गया है. तुरंत बयान दें कि सब ठीक है और भारत सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाला देश है. जब आपकी कार की स्पीड साठ से उतर कर बीस पर आती है तब आपको पता चलता है कि कार सुपर स्पीड से चल रही है.
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राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के पास कोई 'प्लान बी' नहीं...
- Sunday July 7, 2019
- स्वाति चतुर्वेदी
एक ओर राहुल गांधी ने जहां अपने फैसलों पर अडिग रहकर राजनीति में अपनी विश्वसनीयता को बनाए रखा, तो वहीं दूसरी ओर उनके इस दृढ़ निश्चय ने उनकी ही पार्टी की 'दयनीय' हालत की तरफ सबका ध्यान खींचा है.
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राहुल गांधी को क्यों इस्तीफ़ा देना चाहिए...?
- Monday June 10, 2019
- प्रियदर्शन
यह सच है कि 2014 और 2019 के आम चुनाव में राहुल गांधी और कांग्रेस बुरी तरह पराजित हुए हैं. नरेंद्र मोदी और BJP की ऐतिहासिक जीत के आईने में यह हार कुछ और बड़ी और दुखी करने वाली लगती है. लेकिन अतीत में देखें तो ऐसे इकतरफ़ा परिणाम और अनुमान कांग्रेस और BJP दोनों के हक़ में आते रहे हैं और दोनों को हंसाते-रुलाते रहे हैं. 1984 में जब राजीव गांधी को 400 से ज्यादा सीटें मिली थीं और अटल-आडवाणी को महज 2, तब भी कुछ लोगों को लगा था कि अब तो BJP का सफ़ाया हो गया. लेकिन 1989 आते-आते BJP वीपी सिंह की सत्ता का एक पाया बनी हुई थी.
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ब्लॉग: कांग्रेस के नेता चुनाव क्षेत्र को अपनी संपत्ति न मानें, यह लोगों की संपत्ति है
- Sunday May 26, 2019
- सुशील कुमार महापात्र
ऑस्ट्रेलिया टीम इसीलिए अच्छा प्रदर्शन करती है. भारत की राजनीति में भी यह फार्मूला लागू होना चाहिए. फॉर्म में जो नेता नहीं हैं उनके जगह नए नेताओं को टिकट देना चाहिए. यह जो पुराने नेता है उन्हें टेनिस की तरह नॉन प्लेइंग कप्तान बना देना चाहिए जो बाहर बैठकर सलाह देते रहे.
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क्या 2019 के चुनाव में मैं भी हार गया हूं
- Friday May 24, 2019
- रवीश कुमार
2019 का जनादेश मेरे ख़िलाफ कैसे आ गया? मैंने जो पांच साल में लिखा बोला है क्या वह भी दांव पर लगा था? जिन लाखों लोगों की पीड़ा हमने दिखाई क्या वह ग़लत थी? मुझे पता था कि नौजवान, किसान और बैंकों में गुलाम की तरह काम करने वाले लोग भाजपा के समर्थक हैं. उन्होंने भी मुझसे कभी झूठ नहीं बोला. सबने पहले या बाद में यही बोला कि वे नरेंद्र मोदी के समर्थक हैं. मैंने इस आधार पर उनकी समस्या को खारिज नहीं किया कि वे नरेंद्र मोदी के समर्थक हैं. बल्कि उनकी समस्या वास्तविक थी इसलिए दिखाई. आज एक सांसद नहीं कह सकता कि उसने पचास हज़ार से अधिक लोगों को नियुक्ति पत्र दिलवाया है. मेरी नौकरी सीरीज़ के कारण दिल्ली से लेकर बिहार तक में लोगों को नियुक्ति पत्र मिला है. कई परीक्षाओं के रिज़ल्ट निकले. उनमें से बहुतों ने नियुक्ति पत्र मिलने पर माफी मांगी की वे मुझे गालियां देते थे. मेरे पास सैंकड़ों पत्र और मैसेज के स्क्रीन शॉट पड़े हैं जिनमें लोगों ने नियुक्ति पत्र मिलने के बाद गाली देने के लिए माफी मांगी है. इनमें से एक भी यह प्रमाण नहीं दे सकता कि मैंने कभी कहा हो कि नरेंद्र मोदी को वोट नहीं देना. यह ज़रूर कहा कि वोट अपने मन से दें, वोट देने के बाद नागरिक बन जाना.
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AI समिट में शर्टलेस प्रोटेस्ट... नई नहीं है भारत के इंटरनेशनल इवेंट्स में कांग्रेस की 'हंगामा पॉलिटिक्स'
- Friday February 20, 2026
- Written by: मनोज शर्मा
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने शर्ट उतारकर जो प्रदर्शन किया, उसने इस इंटरनेशनल इवेंट को राजनीतिक रंग दे दिया. हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस ने भारत के किसी इंटरनेशनल इवेंट में विरोध जताया हो.
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पीएम मोदी को 111वीं गाली, फिर पड़ेगी विपक्ष पर भारी?
- Wednesday September 3, 2025
- Written by: अखिलेश शर्मा
2014 में लोक सभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने ‘चाय वाला’ कह कर मोदी का मजाक उड़ाया था. मोदी ने इसका इस्तेमाल प्रचार में किया और बीजेपी ने कई जगह चायवालों का सम्मान कर पलटवार किया. जब मोदी के लिए ‘नीच’ शब्द का प्रयोग किया गया तब उन्होंने बताया कि ओबीसी वर्ग से आने वाले एक ग़रीब माँ के बेटे को किस तरह अपमानित किया जा रहा है.
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‘रेवड़ी राजनीति’ की गिरफ्त में क्यों हैं वोटर, किस पार्टी का होगा बेड़ा पार?
- Tuesday November 21, 2023
- धर्मेंद्र सिंह
इस बार के विधानसभा चुनाव मध्यप्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में वोटरों को लुभाने के लिए घोषणाओं की बरसात हो गई है. सारी पार्टी की घोषणाओं का लब्बोलुआब है, किसान की कर्ज माफी, धान और गेहूं की खरीदारी की कीमत बढ़ाना, सस्ता सिलेंडर, मुफ्त बिजली, किसान सम्मान निधि बढ़ाने, मुफ्त राशन बढ़ाने का है.
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कर्नाटक के नतीजे AAP के लिए बुरी खबर क्यों?
- Tuesday May 23, 2023
- अमिताभ तिवारी
आम आदमी पार्टी के दो वरिष्ठ मंत्री मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के भ्रष्टाचार के मामलों में जेल जाने के बाद पार्टी कमजोर पड़ी है. पार्टी की छवि को गहरा धक्का पहुंचा है.
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लेकिन यह जीत अभी अधूरी है
- Tuesday February 11, 2020
- प्रियदर्शन
यह सच है कि दिल्ली के नागरिकों ने ध्रुवीकरण की राजनीति को नकार दिया है. लेकिन यह इतना सपाट मामला नहीं है. नागरिकों के फ़ैसले के पीछे और भी वजहें हो सकती हैं. आम आदमी पार्टी का दावा है कि उसके काम की वजह से उसे वोट मिले. बहुत दूर तक यह बात सही लगती है. मुफ्त बिजली-पानी, महिलाओं के लिए मुफ़्त यात्रा और स्कूलों और मोहल्ला क्लीनिकों की सुविधा इस महानगर के ग़रीब और निम्नमध्यवर्गीय लोगों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं रही. हालांकि सांप्रदायिकता ऐसी अंधी होती है कि उसे कई बार कुछ भी दिखाई नहीं पड़ता है.
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राहुल बजाज के 'डर के माहौल' वाले बयान के बाद रवीश कुमार की चिट्ठी, CII FICCI के नाम
- Monday December 2, 2019
- रवीश कुमार
राहुल बजाज के बयान को मामूली बताने के लिए अभी तक कुछ अख़बारों में विज्ञापन दे देना था जैसे टेक्सटाइल वालों ने विज्ञापन देकर बताया था कि कैसे उनका सेक्टर बर्बाद हो गया है. तुरंत बयान दें कि सब ठीक है और भारत सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाला देश है. जब आपकी कार की स्पीड साठ से उतर कर बीस पर आती है तब आपको पता चलता है कि कार सुपर स्पीड से चल रही है.
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राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के पास कोई 'प्लान बी' नहीं...
- Sunday July 7, 2019
- स्वाति चतुर्वेदी
एक ओर राहुल गांधी ने जहां अपने फैसलों पर अडिग रहकर राजनीति में अपनी विश्वसनीयता को बनाए रखा, तो वहीं दूसरी ओर उनके इस दृढ़ निश्चय ने उनकी ही पार्टी की 'दयनीय' हालत की तरफ सबका ध्यान खींचा है.
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राहुल गांधी को क्यों इस्तीफ़ा देना चाहिए...?
- Monday June 10, 2019
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यह सच है कि 2014 और 2019 के आम चुनाव में राहुल गांधी और कांग्रेस बुरी तरह पराजित हुए हैं. नरेंद्र मोदी और BJP की ऐतिहासिक जीत के आईने में यह हार कुछ और बड़ी और दुखी करने वाली लगती है. लेकिन अतीत में देखें तो ऐसे इकतरफ़ा परिणाम और अनुमान कांग्रेस और BJP दोनों के हक़ में आते रहे हैं और दोनों को हंसाते-रुलाते रहे हैं. 1984 में जब राजीव गांधी को 400 से ज्यादा सीटें मिली थीं और अटल-आडवाणी को महज 2, तब भी कुछ लोगों को लगा था कि अब तो BJP का सफ़ाया हो गया. लेकिन 1989 आते-आते BJP वीपी सिंह की सत्ता का एक पाया बनी हुई थी.
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ब्लॉग: कांग्रेस के नेता चुनाव क्षेत्र को अपनी संपत्ति न मानें, यह लोगों की संपत्ति है
- Sunday May 26, 2019
- सुशील कुमार महापात्र
ऑस्ट्रेलिया टीम इसीलिए अच्छा प्रदर्शन करती है. भारत की राजनीति में भी यह फार्मूला लागू होना चाहिए. फॉर्म में जो नेता नहीं हैं उनके जगह नए नेताओं को टिकट देना चाहिए. यह जो पुराने नेता है उन्हें टेनिस की तरह नॉन प्लेइंग कप्तान बना देना चाहिए जो बाहर बैठकर सलाह देते रहे.
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क्या 2019 के चुनाव में मैं भी हार गया हूं
- Friday May 24, 2019
- रवीश कुमार
2019 का जनादेश मेरे ख़िलाफ कैसे आ गया? मैंने जो पांच साल में लिखा बोला है क्या वह भी दांव पर लगा था? जिन लाखों लोगों की पीड़ा हमने दिखाई क्या वह ग़लत थी? मुझे पता था कि नौजवान, किसान और बैंकों में गुलाम की तरह काम करने वाले लोग भाजपा के समर्थक हैं. उन्होंने भी मुझसे कभी झूठ नहीं बोला. सबने पहले या बाद में यही बोला कि वे नरेंद्र मोदी के समर्थक हैं. मैंने इस आधार पर उनकी समस्या को खारिज नहीं किया कि वे नरेंद्र मोदी के समर्थक हैं. बल्कि उनकी समस्या वास्तविक थी इसलिए दिखाई. आज एक सांसद नहीं कह सकता कि उसने पचास हज़ार से अधिक लोगों को नियुक्ति पत्र दिलवाया है. मेरी नौकरी सीरीज़ के कारण दिल्ली से लेकर बिहार तक में लोगों को नियुक्ति पत्र मिला है. कई परीक्षाओं के रिज़ल्ट निकले. उनमें से बहुतों ने नियुक्ति पत्र मिलने पर माफी मांगी की वे मुझे गालियां देते थे. मेरे पास सैंकड़ों पत्र और मैसेज के स्क्रीन शॉट पड़े हैं जिनमें लोगों ने नियुक्ति पत्र मिलने के बाद गाली देने के लिए माफी मांगी है. इनमें से एक भी यह प्रमाण नहीं दे सकता कि मैंने कभी कहा हो कि नरेंद्र मोदी को वोट नहीं देना. यह ज़रूर कहा कि वोट अपने मन से दें, वोट देने के बाद नागरिक बन जाना.
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