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Video AI है या असली? इन 7 बातों से जानें AI से बनी नकली वीडियो की सच्चाई

इंटरनेट पर AI वीडियो की बाढ़ आ गई है, कुछ तो इतनी रियल लगती हैं कि इन्हें पहचानना मुश्किल लगता है. जिन्हें जानकारी नहीं होती वो लोग AI को सच मान आगे फॉरवर्ड कर भ्रम फैला देते हैं.

Video AI है या असली? इन 7 बातों से जानें AI से बनी नकली वीडियो की सच्चाई

इंटरनेट पर AI वीडियो की बाढ़ आ गई है, कुछ तो इतनी रियल लगती हैं कि इन्हें पहचानना मुश्किल लगता है. जिन्हें जानकारी नहीं होती वो लोग AI को सच मान आगे फॉरवर्ड कर भ्रम फैला देते हैं. वहीं, AI को थोड़ा-बहुत समझने वाले भी अक्सर चकरा जाते हैं. इसीलिए आज यहां आपको 7 कमाल के तरीके बताते हैं, जिनकी मदद से आप असली और नकली AI वीडियो में फर्क देखते ही पहचान लेंगे. 

1. वॉटरमार्क
अक्सर AI से बने कई वीडियो में वॉटरमार्क होता है. क्योंकि फ्री में मौजूद AI प्लैटफॉर्म, वॉटरमार्क के जरिए अपनी पब्लिसिटी करते हैं. इसीलिए अगर कोई वीडियो ऐसा वॉटरमार्क दिखाता है, तो उसके AI से बने होने की संभावना ज्यादा होती है.

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2. सोर्स
इंटरनेट पर शायद ही कुछ बिना सोर्स के मौजूद होता है. किसी वीडियो का स्क्रीनशॉट लेकर Google Lens या रिवर्स इमेज सर्च करने से उसके असली स्रोत का पता लगाया जा सकता है. अगर वीडियो का ओरिजिनल सोर्स आसानी से मिल जाए, तो उसके असली होने की संभावना ज्यादा होती है. वहीं अगर किसी एनिमेशन या गेम वीडियो का कोई स्रोत न मिले, तो यह AI जनरेटेड भी हो सकता है, क्योंकि ऐसे कंटेंट बनाना महंगा और मेहनत वाला काम होता है.

3. अजीब ऑडियो 
AI वीडियो में आवाज़ काफी हद तक रियल लगती है, लेकिन पूरी तरह परफेक्ट नहीं होती. AI से बनी आवाज़ों में अक्सर हल्की सी रोबोटिक फील होती है. इसके अलावा, कई बार आवाज़ और वीडियो का तालमेल ठीक नहीं बैठता. अगर ऐसी गड़बड़ियां दिखें, तो यह AI वीडियो होने का संकेत हो सकता है.

4. बिगड़ा हुआ टेक्स्ट 
AI वीडियो के लिए टेक्स्ट अब भी एक बड़ी चुनौती है. किताब, बोर्ड या नेम टैग पर लिखा टेक्स्ट अक्सर टेढ़ा-मेढ़ा दिखता है या सीन बदलते ही बदल जाता है. कई बार वीडियो में जहां टेक्स्ट होना चाहिए, वहां कुछ भी नहीं दिखता. यह भी AI वीडियो होने का संकेत है.

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5. वीडियो की क्वालिटी
अधिकतर AI टूल्स एक तय समय की वीडियो बनाते हैं, जैसे 10, 15 या 25 सेकंड. क्योंकि लंबे, 20-30 मिनट के वीडियो AI से बनाना अभी भी मुश्किल है. इसी तरह, आजकल 4K क्वालिटी आम है, लेकिन AI वीडियो अक्सर 720p या उससे कम रेजोल्यूशन में होते हैं.

6. AI डिटेक्शन टूल्स
आजकल कई AI डिटेक्शन टूल्स मौजूद हैं जो वीडियो का एनालिसिस करके बताते हैं कि वह AI से बना है या नहीं. अगर ऐसा कोई टूल वीडियो को फर्जी बताता है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

7. अपनी समझ पर रखें भरोसा
AI टेक्नोलॉजी हर दिन बेहतर हो रही है, इसलिए आने वाले समय में AI वीडियो पहचानना और भी मुश्किल होगा. ऐसे में सबसे अच्छा तरीका है कि आप भरोसेमंद न्यूज़ सोर्स और अपनी समझ पर भरोसा रखें.

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