अमेरिका जाकर पढ़ना, Fortune 500 कंपनी में लाखों का पैकेज पाना और H-1B वीजा हासिल करना...यह हर भारतीय टेक प्रोफेशनल का सपना होता है. लेकिन क्या हो अगर 6 साल की कड़ी मेहनत के बाद एक ही झटके में सब कुछ खत्म हो जाए? ऐसा ही कुछ हुआ एक भारतीय AI इंजीनियर के साथ. सबसे बड़ी दिक्कत यह रही कि जिस कंपनी ने उसे नौकरी से निकाला, उसने अपना पूरा प्रोजेक्ट ही भारत शिफ्ट कर दिया. आइए जानते हैं इस वायरल खबर की पूरी कहानी.
US का सपना और 6 साल का सफर
उस भारतीय इंजीनियर ने करीब 6 साल पहले अपनी मास्टर डिग्री पूरी करने के लिए अमेरिका का रुख किया था. पढ़ाई खत्म करने के बाद उसे एक नामी Fortune 500 प्रोडक्ट-बेस्ड कंपनी में फुल-टाइम नौकरी मिल गई. सब कुछ बहुत सही चल रहा था, उसने कंपनी में 3 साल से ज्यादा समय तक काम किया और H-1B वीजा भी हासिल कर लिया. लेकिन फिर एक अचानक आए फैसले ने उसकी पूरी जिंदगी बदलकर रख दी.
प्रोजेक्ट भारत शिफ्ट हुआ और गई नौकरी
कंपनी ने कॉस्ट-कटिंग और रीस्ट्रक्चरिंग के तहत अमेरिका से अपने प्रोजेक्ट्स को समेटना शुरू किया. विडंबना यह रही कि जिस प्रोजेक्ट पर वह काम कर रहा था, उसे कंपनी ने पूरी तरह भारत टीम को ट्रांसफर कर दिया. इस बदलाव के चलते उसे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा. जिस देश में उसने अपना करियर बनाया, वहीं से उसे अब खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है.
60 दिनों की टाइम लिमिट और वीजा की मजबूरी
अमेरिका में H-1B वीजा धारकों के लिए नियम काफी सख्त हैं. नौकरी छूटने के बाद किसी भी कर्मचारी के पास सिर्फ 60 दिनों का ग्रेस पीरियड होता है. इस दौरान या तो नया स्पॉन्सर ढूंढकर नौकरी हासिल करनी होती है, या फिर देश छोड़ना पड़ता है. तमाम कोशिशों के बावजूद वह 60 दिनों में नई जॉब हासिल नहीं कर पाया. अब उसके पास भारत लौटने या फिर अमेरिका में रुकने के लिए PhD या दूसरी मास्टर डिग्री करने का ऑप्शन ही बचा है.
Reddit पर वायरल हुई कहानी
इस इंजीनियर ने अपनी यह आपबीती सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit के r/developersIndia सबरेडिट पर शेयर की, जो देखते ही देखते वायरल हो गई. कई यूजर्स ने उसे भारत में फिर से करियर शुरू करने की सलाह दी. कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि उसे अपनी कंपनी की इंडियन टीम से संपर्क करना चाहिए, जहां वह 40 LPA+ के पैकेज का दावा कर सकता है. इस पर इंजीनियर ने खुलासा किया कि कंपनी ने उसे भारत में रोल या 'सेवरेंस पैकेज' में से एक चुनने को कहा था, और उसने डॉलर में मिलने वाले पैसे (सेवरेंस) को चुना.
2026 में अकेले इस साल अब तक 1,20,000 से ज्यादा टेक कर्मचारियों की छंटनी हो चुकी है. माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एमेजॉन, मेटा और इंटेल जैसी दिग्गज कंपनियां कई कर्मचारियों को बाहर निकाल रही हैं.
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