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स्टीव जॉब्स ने अपने हाथों से बनाया था ये कंप्यूटर! अब बिक रहा है ₹4.5 करोड़ में, दुनिया में बचे हैं सिर्फ 20

स्टीव जॉब्स और स्टीव वोज्नियाक द्वारा हाथ से बनाया गया एप्पल का पहला कंप्यूटर 'Apple-1' न्यूयॉर्क में नीलाम होने जा रहा है. 1976 के इस वर्किंग कंप्यूटर की कीमत 4.5 करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है. जानिए इसके पीछे की पूरी दिलचस्प कहानी.

स्टीव जॉब्स ने अपने हाथों से बनाया था ये कंप्यूटर! अब बिक रहा है ₹4.5 करोड़ में, दुनिया में बचे हैं सिर्फ 20
1976 का वो कंप्यूटर जो आज बिकने जा रहा है करोड़ों रुपये में
Photo Credit: X

साल 1976 में Apple के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स और स्टीव वोज्नियाक ने अपने हाथों से एप्पल का पहला कंप्यूटर बनाया था, जिसे 'Apple-1' नाम दिया गया था. अब करीब 50 साल बाद, इसी ऐतिहासिक कंप्यूटर का एक चालू मॉडल न्यूयॉर्क के मशहूर सोथबी नीलामी घर में बिकने जा रहा है. इस कंप्यूटर की बोली 4.5 करोड़ रुपये ($500,000) से भी ज्यादा लग सकती है. 

जुलाई 1976 में जब Apple-1 को लॉन्च किया गया था, तब इसकी कीमत महज $666.66 (आज के हिसाब से करीब 55,000 रुपये) रखी गई थी. 15 जुलाई को न्यूयॉर्क में होने वाली इस लाइव नीलामी में इसकी कीमत $300,000 से $500,000 के बीच रहने की उम्मीद है. अगर यह कंप्यूटर अपनी अधिकतम कीमत पर बिकता है, तो पिछले पांच दशकों में इसकी वैल्यू में लगभग 749 गुना की भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी. 

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पूरी दुनिया में चालू हालत में बचे हैं सिर्फ 20 कंप्यूटर

स्टीव जॉब्स और स्टीव वोज्नियाक ने मिलकर शुरुआती दौर में ऐसे कुल 200 Apple-1 कंप्यूटर बनाए थे. समय के साथ इनमें से ज्यादातर कंप्यूटर या तो खराब हो गए या नष्ट हो गए. आज की तारीख में पूरी दुनिया में सिर्फ 20 ऐसे Apple-1 कंप्यूटर बचे हैं जो पूरी तरह से चालू हालत (Working Condition) में हैं. यही वजह है कि टेक के शौकीनों और बड़े कलेक्टर्स के बीच इस दुर्लभ मशीन को खरीदने के लिए होड़ मची हुई है. 

'बाइट शॉप' की कहानी

इस कंप्यूटर की कहानी कैलिफोर्निया की एक दुकान 'बाइट शॉप' (Byte Shop) से जुड़ी है, जिसे दुनिया का पहला पर्सनल कंप्यूटर रिटेल स्टोर माना जाता है. इसके मालिक पॉल टेरेल एक कंप्यूटर शौकीन थे. जब स्टीव जॉब्स उनके पास Apple-1 का सर्किट बोर्ड किट लेकर आए, तो जॉब्स का प्लान इसे एक 'डू-इट-योरसेल्फ' (खुद से बनाने वाली) किट के रूप में बेचने का था. इसमें खरीदार को खुद चिप्स सोल्डर करने पड़ते और कीबोर्ड-डिस्प्ले का इंतजाम भी खुद करना पड़ता. लेकिन पॉल टेरेल ने एक शर्त रखी कि वे 50 यूनिट तभी खरीदेंगे जब कंप्यूटर पूरी तरह असेंबल यानी तैयार स्थिति में मिले.

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स्टीव जॉब्स ने टेरेल की इस शर्त को मान लिया और स्टीव वोज्नियाक के साथ मिलकर पूरी तरह से तैयार Apple-1 कंप्यूटर की डिलीवरी दी. पॉल टेरेल की इसी मांग ने अंजाने में एप्पल को एक ऐसी कंपनी बना दिया जो आम लोगों के इस्तेमाल के लिए रेडी-टू-यूज (तुरंत इस्तेमाल के योग्य) प्रोडक्ट बनाती है. आज जो कंप्यूटर करोड़ों रुपये में नीलाम होने जा रहा है, वह सिर्फ एक मशीन नहीं बल्कि कंप्यूटर की वो शुरुआत है जिसने पूरी दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया.

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