देश में हर चौथा सैंपल फेल? आखिर हमारी थाली में कितना मिलावटी खाना

खाने-पीने के सामान में मिलावट की खबरें तो आए-दिन आती रहती हैं, लेकिन इसे लेकर कुछ आंकड़े भी हैं. उन आंकड़ों से इस स्थिति को ज्यादा बेहतर तरीके से समझा जा सकता है.

देश में हर चौथा सैंपल फेल? आखिर हमारी थाली में कितना मिलावटी खाना
खाने में मिलावट

देशभर में खाद्य पदार्थों में हो रही मिलावट की खबरों ने लोगों को खासा चिंतित कर दिया है. बात चाहे पनीर की हो, दूध की हो, घी की हो या पिर खोय की, गुणवक्ता को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं. हाल के दिनों में जिस तरह से भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने भी कार्रवाई की है, यह मुद्दा ज्यादा चर्चा में आ चुका है. सवाल उठने लगे हैं कि आखिर देश में लोगों को कितना शुद्ध और कितना मिलावट वाला खाना दिया जा रहा है? यहां हर सवाल का जवाब जानते हैं, आंकड़ों के जरिए स्थिति को समझने की कोशिश करते हैं-

Food Adulteration का क्या मतलब?

Food Adulteration को ही हम दूसरे शब्दों में खाने में मिलावट कह सकते हैं. FSSAI की परिभाषा के मुताबिक अगर काने की किसी चीज में कोई पदार्थ जानबूझकर मिलाया जाता है, या फिर निकाला जाता है और उस वजह से उस खाने की असल गुणवक्ता पर असर पड़ता है, इसे हम Food Adulteration कहते हैं.

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भारत में कितनी मिलावट?

खाने-पीने के सामान में मिलावट की खबरें तो आए-दिन आती रहती हैं, लेकिन इसे लेकर कुछ आंकड़े भी हैं. उन आंकड़ों से इस स्थिति को ज्यादा बेहतर तरीके से समझा जा सकता है. इसी साल मार्च में लोकसभा में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने एक सवाल के जवाब में जरूरी डेटा साझा किया था. उन्होंने FSSAI की ही कार्रवाई की जानकारी दी थी. 

नीचे दी गई टेबल से समझते हैं पिछले पांच साल में देश में कितने फूड सैंपल की जांच की गई और कितने जांच में फेल हो गए-

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वर्षजांच किए गए सैंपल

मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए सैंपल

2024-251,70,53534,388
2023-241,70,51333,808
2022-231,77,51144,626
2021-221,44,34532,934
2020-211,07,82928,347

सोर्स: FSSAI

अब ऊपर दी गई टेबल से पता चलता है कि देश में FSSAI ने समय के साथ अपनी टेस्टिंग क्षमता काफी बढ़ा ली है। 2020-21 में जहां सिर्फ 1.08 लाख सैंपल टेस्ट किए गए थे, 2024-25 में वो आंकड़ा बढ़कर 1.71 लाख हो गया. दूसरे शब्दों में कहें तो फूड टेस्टिंग में 58.15 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली. अब जिस तरह से टेस्टिंग में बढ़ोतरी हुई, मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए सैंपल की संख्या में भी बढ़ोतरी देखने को मिली. 2020-21 में जो संख्या 28347 थी, वो 2024-25 में बढ़कर 34388 हो गई, यानी कि 21.31 फीसदी की बढ़ोतरी.

सोर्स: FSSAI (लोकसभा में सरकार का जवाब)

क्रमांकराज्य/केंद्र शासित प्रदेश2024-25: जांचे गए सैंपल2024-25: जुर्माने वाले सिविल केस2024-25: दोषसिद्धि2024-25: रद्द लाइसेंस2023-24: जांचे गए सैंपल2023-24: जुर्माने वाले सिविल केस2023-24: दोषसिद्धि2023-24: रद्द लाइसेंस2022-23: जांचे गए सैंपल2022-23: जुर्माने वाले सिविल केस2022-23: दोषसिद्धि

2022-23: रद्द लाइसेंस

1अंडमान और निकोबार द्वीप समूह810001000012005800
2आंध्र प्रदेश5984464815643964684036073391264
3अरुणाचल प्रदेश12570550120252580020
4असम170500191139000602000
5बिहार28632507280679010293539010
6चंडीगढ़374116415311875214732784
7छत्तीसगढ़20691436113738620146811980
8दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव560001850001641300
9दिल्ली262418161341236121313386100
10गोवा1172110059917016991104
11गुजरात12387859918158411701657145625472415
12हरियाणा223359959203485593471544459153525
13हिमाचल प्रदेश15874710316183762627209319
14जम्मू और कश्मीर6955123929179057161222191350215921542
15झारखंड364520138459029434481
16कर्नाटक93712833234549275165034161911556
17केरल107611088206401079285413413785334543390
18लद्दाख417380063819012202300
19लक्षद्वीप000000000000
20मध्य प्रदेश13920259722313998193846101250719087122
21महाराष्ट्र540311470950871540411077198517
22मणिपुर1262201168000169003
23मेघालय388000123000409000
24मिजोरम00000000140000
25नागालैंड223000138301109001
26ओडिशा2282270220030024136847040
27पुडुचेरी173000310000000
28पंजाब4131333816041120410208179140451
29राजस्थान13840311430218536218112013184243541
30सिक्किम254000231000279400
31तमिलनाडु18071153649271814621954783624188371467847
32तेलंगाना334712501615642506480931509
33त्रिपुरा1230008700031000
34उत्तर प्रदेश30380149202151627750146271639301401314825150
35उत्तराखंड150925641199833201183950751
36पश्चिम बंगाल1050267260594828502620323300
कुलकुल170535301421265220170513295861161408177511284641188533

ऊपर दी गई टेबल से कुछ ट्रेंड पकड़ में आते हैं. उत्तर प्रदेश में मिलावट के खिलाफ सबसे ज्यादा एक्शन हुआ है. 2022-23 से 2024-25 के बीच 42695 सिविल मामलों में जुर्माना लगाया गया, 629 मामलों में दोषासिद्धि हुई और 75 मामलों में तो लाइसेंस भी रद्द किए गए. तमिलनाडु की बात करें तो वहां ऐसे मामलों की संख्या ज्यादा है जहां दोष सिद्ध हो चुका है. तमिलनाडु में यह आंकड़ा 1648 दर्ज किया गया है जो यूपी के 629 से ज्यादा है. इस मामले में तीसरे पायदान पर केरल आता है जहां 373 केस में दोष सिद्ध हुआ है.

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कुछ ऐसे भी राज्य सामने आए हैं जहां फूड सैंपल फेल तो हुए, लेकिन कार्रवाई उतनी तेज देखने को नहीं मिली. उदाहरण के लिए असम, मेघालय, मिजोरम, पुडुचेरी और त्रिपुरा ऐसे राज्य रहे हैं जहां सिविल पैनल्टी शून्य दर्ज की गई है. वहीं मणिपुर में यह संख्या 2, नागालैंड में 3, सिक्किम में 4 और अरुणाचल प्रदेश में 9 रही है.

वैसे देश की संसद में जो डेटा पेश किया गया है, उससे पिछले पांच सालों का एक और ट्रेंड समझ आता है. उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा नॉन-कन्फॉर्मिंग यानी तय मानकों पर खरे न उतरने वाले सैंपल सामने आए हैं. दूसरे पायदान पर उत्तर प्रदेश रहा है और तीसरे पर तमिलनाडु. नीचे दी गई टेबल से पिछले पांच साल की स्थिति समझें-

वर्षनंबर-1नंबर-2नंबर-3
2025-26उत्तर प्रदेश (20,427)राजस्थान (4,594)तमिलनाडु (3,984)
2024-25उत्तर प्रदेश (16,500)राजस्थान (3,788)तमिलनाडु (2,240)
2023-24उत्तर प्रदेश (16,183)राजस्थान (3,493)तमिलनाडु (2,237)
2022-23उत्तर प्रदेश (18,108)तमिलनाडु (7,924)राजस्थान (3,965)
2021-22उत्तर प्रदेश (13,153)तमिलनाडु (3,778)

आंध्र प्रदेश (2,900)

FSSAI किस तरह से कर रही जांच?

अब हमें यह तो पता चल गया है कि कौन से राज्य में मिलावट को लेकर क्या स्थिति चल रही है, लेकिन भारत सरकार ने ही संसद में FSSAI की कार्यशैली को लेकर भी विस्तृत तरीके से बताया है. वर्तमान में देशभर में 259 NABL अप्रूव्ड लैब्स और अपील सैंपलों के लिए 24 रेफरल फूड लैब्स नोटिफाई है. नीचे दिए गए ग्राफिक से इसे समझते हैं-

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