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स्पेस में होगी iPhone 17 Pro Max की एंट्री, जानिए अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट्स आखिर इससे करेंगे क्या

iPhone in space: iPhone को स्पेस में भेजना इतना आसान नहीं था. NASA ने इसे किसी भी दूसरे स्पेस स्पेस इक्विपमेंट की तरह ही सख्ती से टेस्ट किया. इसके लिए एक खास चार-स्टेप प्रोसेस अपनाया गया.

स्पेस में होगी iPhone 17 Pro Max की एंट्री, जानिए अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट्स आखिर इससे करेंगे क्या

NASA ने एक बड़ा और दिलचस्प फैसला लिया है. अब Artemis II मिशन में एस्ट्रोनॉट्स अपने साथ iPhone लेकर जाएंगे. खास बात यह है कि ये कोई नया या एक्सपेरिमेंटल गैजेट नहीं है, बल्कि आम लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले iPhones ही हैं, जिन्हें कुछ बदलावों के बाद मंजूरी दी गई है. इस मिशन में इस्तेमाल होने वाले फोन iPhone 17 Pro Max के modified versions हैं, जिन्हें पूरी सेफ्टी टेस्टिंग के बाद अप्रूव किया गया है.

iPhone का काम क्या होगा स्पेस में?

इन iPhones का इस्तेमाल केवल फोटो और वीडियो लेने के लिए किया जाएगा. यानी एस्ट्रोनॉट्स इन्हें कम्यूनिकेशन या इंटरनेट के लिए इस्तेमाल नहीं करेंगे. फोन के सभी कनेक्टिविटी फीचर्स जैसे इंटरनेट, ब्लूटूथ और अन्य वायरलेस सिस्टम्स पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं.

इसका मुख्य उद्देश्य एस्ट्रोनॉट्स को एक आसान डिवाइस देना है, जिससे वे अपने मिशन के खास पलों को रिकॉर्ड कर सकें. 

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NASA का सख्त अप्रूवल प्रोसेस

iPhone को स्पेस में भेजना इतना आसान नहीं था. NASA ने इसे किसी भी दूसरे स्पेस स्पेस इक्विपमेंट की तरह ही सख्ती से टेस्ट किया. इसके लिए एक खास चार-स्टेप प्रोसेस अपनाया गया.

सबसे पहले, डिवाइस को सेफ्टी पैनल के सामने पेश किया गया. इसके बाद उसमें संभावित खतरों की पहचान की गई, जैसे कि स्क्रीन टूटना, छोटे पार्ट्स का अलग हो जाना या जीरो ग्रैविटी में उनके विहेवियर का बदलना.

फिर इन खतरों को कम करने के उपाय तैयार किए गए. अंत में यह वेरिफाई किया गया कि ये सॉल्यूशन सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं. यहां तक कि क्रैक्ड स्क्रीन को भी बड़ा खतरा माना गया, क्योंकि उसके छोटे टुकड़े जीरो ग्रैविटी में तैर सकते हैं और नुकसान पहुंचा सकते हैं.

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iPhone 17 Pro Max क्या-क्या किया गया बदलाव

स्पेस के लिए iPhone की मजबूती इस प्रोसेस का अहम हिस्सा थी. इसमें सेरामिक शील्ड ग्लास दिया गया है, जो काफी मजबूत होता है, लेकिन NASA ने सिर्फ मजबूती ही नहीं बल्कि हीट, बैटरी स्टेबिलिटी और स्टोरेज जैसे फैक्टर्स को भी ध्यान में रखा.

स्पेस में इन phones को रखने और इस्तेमाल करने के लिए भी खास तरीके अपनाए गए. कुछ फोन्स को Velcro की मदद से spacecraft में fix किया गया, जबकि कुछ एस्ट्रोनॉट्स के सूट्स में रखे गए. यह दिखाता है कि स्पेस में छोटी-छोटी चीजों को हैंडल करना भी अलग तरीके से करना पड़ता है.

इन स्मार्टफोन्स को मिशन का मेन कैमरा नहीं माना जा रहा है. एस्ट्रोनॉट्स के पास पहले से ही प्रोफेशनल कैमरा मौजूद होते हैं, जैसे GoPro और Nikon systems. iPhones सिर्फ एक secondary tool के रूप में काम करेंगे, ताकि एस्ट्रोनॉट्स आसानी से extra photos और videos ले सकें.

टेक्नोलॉजी का नया कदम

इस मिशन में स्मार्टफोन्स का इस्तेमाल यह दिखाता है कि अब space missions में familiar technology को भी शामिल किया जा रहा है. अगर यह एक्सपेरिमेंट सफल होता है, तो भविष्य में स्पेस से ली गई तस्वीरें और वीडियो आम लोगों के लिए और भी रिलेटेबल हो सकती हैं, क्योंकि वे उसी डिवाइस से ली गई होंगी जो हम रोज इस्तेमाल करते हैं.

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