
प्रतीकात्मक तस्वीर
न्यूयॉर्क:
एक शोध में कहा गया है कि अगर आप बेकायदा भोजन और मोटापे से बचना चाहते हैं, तो फेसबुक पर भावनात्मक रूप से अपने दोस्तों से जुड़ें।
युनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना के शोधकर्ताओं के अनुसार, अगर युवतियां फेसबुक का इस्तेमाल अपने शरीर की तुलना अपने सहेलियों के शरीर से करने के लिए कर रही हैं, तो साथियों की तुलना में उनके जोखिमपूर्ण डाइटिंग आदतों से जूझने की संभावना कम है।
मनोचिकित्सा की सहायक प्रोफेसर स्टेफनी जेर्वास ने कहा, 'फेसबुक से अपेक्षाकृत ज्यादा भावनात्मक रूप से जुड़ने वाली और फेसबुक पर ढेरों दोस्त बनाने वाली कॉलेज युवतियां अपने शरीर की बनावट तथा आकार को लेकर कम फिक्रमंद हैं और उनके खतरनाक खानपान आदतों में पड़ने की संभावना कम है।' शोध में 128 कॉलेज युवतियों ने एक ऑनलाइन सर्वेक्षण पूरा किया।
इस सर्वेक्षण में उनके बेकायदा खाने की आदतों का मूल्यांकन करने के लिए कुछ सवाल रखे गए थे। टीम ने प्रत्येक युवती से फेसबुक से उनके भावनात्मक जुड़ाव, रोजाना साइट पर बिताए जाने वाले समय और फेसबुक दोस्तों के बारे में भी सवाल किए। उन्होंने यह भी जांचा कि उन्होंने अपने दोस्तों की ऑनलाइन पिक्चर से अपने शरीर की तुलना की या नहीं।
टीम ने पाया कि फेसबुक से भावनात्मक रूप से ज्यादा जुड़ाव रखने वाली युवतियां शरीर के आकार तथा बनावट को लेकर कम फिक्रमंद और उनमें खानपान संबंधी खतरनाक आदतें होने का जोखिम कम है। स्टेफनी ने कहा, 'फेसबुक सामाजिक सहयोग बढ़ाने और दोस्तों एवं परिवारों से जुड़ने में एक अद्भुत उपकरण हो सकता है।'
युनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना के शोधकर्ताओं के अनुसार, अगर युवतियां फेसबुक का इस्तेमाल अपने शरीर की तुलना अपने सहेलियों के शरीर से करने के लिए कर रही हैं, तो साथियों की तुलना में उनके जोखिमपूर्ण डाइटिंग आदतों से जूझने की संभावना कम है।
मनोचिकित्सा की सहायक प्रोफेसर स्टेफनी जेर्वास ने कहा, 'फेसबुक से अपेक्षाकृत ज्यादा भावनात्मक रूप से जुड़ने वाली और फेसबुक पर ढेरों दोस्त बनाने वाली कॉलेज युवतियां अपने शरीर की बनावट तथा आकार को लेकर कम फिक्रमंद हैं और उनके खतरनाक खानपान आदतों में पड़ने की संभावना कम है।' शोध में 128 कॉलेज युवतियों ने एक ऑनलाइन सर्वेक्षण पूरा किया।
इस सर्वेक्षण में उनके बेकायदा खाने की आदतों का मूल्यांकन करने के लिए कुछ सवाल रखे गए थे। टीम ने प्रत्येक युवती से फेसबुक से उनके भावनात्मक जुड़ाव, रोजाना साइट पर बिताए जाने वाले समय और फेसबुक दोस्तों के बारे में भी सवाल किए। उन्होंने यह भी जांचा कि उन्होंने अपने दोस्तों की ऑनलाइन पिक्चर से अपने शरीर की तुलना की या नहीं।
टीम ने पाया कि फेसबुक से भावनात्मक रूप से ज्यादा जुड़ाव रखने वाली युवतियां शरीर के आकार तथा बनावट को लेकर कम फिक्रमंद और उनमें खानपान संबंधी खतरनाक आदतें होने का जोखिम कम है। स्टेफनी ने कहा, 'फेसबुक सामाजिक सहयोग बढ़ाने और दोस्तों एवं परिवारों से जुड़ने में एक अद्भुत उपकरण हो सकता है।'