विज्ञापन

लुंगी के ग्लव्स पहनकर भाइयों से लड़ती थीं रोशिबिना, आज 3 एशियाई खेलों में पदक जीतकर रच दिया है इतिहास

एशियन गेम्स में देश का झंडा बुलंद करने वाली रोशिबिना देवी ने NDTV के साथ खास बातचीत की है. जहां उन्होंने कहा कि मैं जैकी चैन और ब्रूस ली की फिल्में काफी देखती थी. घर में लुंगी की बॉक्सिंग ग्लव्स बनाकर भैया लोगों के साथ लड़ती थी. उसी दौरान बाबा की नजर मुझपर पड़ी और उन्होंने स्पोर्ट में जाने का रास्ता निकाला.

लुंगी के ग्लव्स पहनकर भाइयों से लड़ती थीं रोशिबिना, आज 3 एशियाई खेलों में पदक जीतकर रच दिया है इतिहास
नाओरेम रोशिबिना देवी

भारत की स्टार वुशु खिलाड़ी नाओरेम रोशिबिना देवी किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं. वह लगातार तीन एशियाई खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय वुशु खिलाड़ी हैं. जापान में पताका फहराने के बाद 25 वर्षीय महिला खिलाड़ी ने NDTV के साथ खास बातचीत की है. जहां उन्होंने NDTV Yuva 2026 के मंच पर अपने जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प बातों को बताया. उनसे जब सवाल किया गया कि इतनी छोटी उम्र में आपने खेल में इतने बड़े काम कैसे कर लिए? जिसके जवाब में उन्होंने कहा, 'सभी को मैं नमस्कार कहना चाहती हूं. शुरू से ही स्पोर्ट मुझे पसंद है. मैं जैकी चैन और ब्रूस ली की फिल्में काफी देखा करती थी. घर में लुंगी की बॉक्सिंग ग्लव्स बनाकर भैया लोगों के साथ लड़ती थी. उसी दौरान बाबा की नजर मुझपर पड़ी और उन्होंने स्पोर्ट में घुसने के लिए रास्ता ढूंढा.'

यहीं नहीं रोशिबिना देवी ने वहां उपस्थित युवाओं को वुशु से भी रूबरू करवाया. उन्होंने बताया, 'वुशु एक चाइनीज मार्शल आर्ट है.' उनसे जब पुछा गया कि आप जब 17 साल की थीं तब आपने पहला एशियन गेम्स मेडल जीता था. उस समय आपको समझ आया था कि आपने क्या हासिल कर लिया है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'नहीं. मेरा शुरू से अबतक का जो प्लान रहा है. मैं तो बस खेलना चाहती थी. पर कैसे कहां तक खेलना है. वह मेरे गुरु ने सिखाया है. मैं जब छोटी थी तो बस यही दिमाग में आता था कि सिनियर लोगों के साथ कंप्लीट करना है. मेरे गुरु मुझे एहसास दिलाते हैं कि मैं कर सकती हूं. मैं अपने गुरु (ओझा) पर भरोसा करती हूं. उनकी बातों को सुनकर मुझे कॉन्फिडेंस मिला.'

रोशिबिना देवी ने अपने दूसरे एशियन गेम्स में भी धमाल मचाया था. उस दौरान उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया था. उस प्रदर्शन के बारे में जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 'मैंने जब 17 साल की उम्र में मेडल हासिल किया तो मेरे गुरु का मुझपर और भरोसा बढ़ गया. उन्होंने कहा तुम वुशु में पहली बार देश के लिए गोल्ड मेडल ला सकती हो. तो उसी की कोशिश कर रही हूं. मगर थोड़े से अंतर से चूक गई.'

यह भी पढ़ें- भारत के दो 'भालेबाजों' का एशियाड में धमाका, यशवीर-रोहित ने जीते दो मेडल, जैवलीन के धुरंधरों पथिरागे-नदीम का क्या हुआ?

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Sports News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com