- ब्राज़ील के लिए रियो ओलिंपिक में जुडो में गोल्ड मैडल जीता
- सिल्वा का जन्म ब्राज़ील के रियो डी जनेरो के फावेला में हुआ था
- गरीबी की वजह से उन्हें उपयुक्त डाइट भी नहीं मिली
गोल्ड मैडल जीतने के बाद राफेल सिल्वा की आंखों में आंसू थे, सिर्फ राफेल क्यों वहां पर मौजूद ब्राज़ील के हर दर्शक की आंखों में आंसू थे. यह कोई छोटी जीत नहीं थी, बल्कि इस जीत ने कई लोगों को छोटा कर दिया था, जो राफेल को लेकर टिप्पणी कर रहे थे. उनके रंग और समुदाय को लेकर मज़ाक उड़ा रहे थे. महज यह जीत सिर्फ एक गोल्ड मैडल की नहीं है, बल्कि यह ब्राज़ील के उस वंचित समुदाय की जीत है, जो कई सालों से संघर्ष कर रहा है. राफेल सिल्वा से ब्राज़ील के लिए रियो ओलिंपिक में जुडो में गोल्ड मैडल जीता. 57 किलो महिला प्रतियोगिता में सिल्वा ने मंगोलिया के सुमिया दोर्जसुरें को हराकर गोल्ड मैडल हासिल किया है.
राफेल सिल्वा का ज़िंदगी काफी संघर्ष में गुजरी है. सिल्वा का जन्म ब्राज़ील के रियो डी जनेरो के फावेला में हुआ था, जो रियो का सबसे बड़ा स्लम माना जाता है. फावेल इलाका अपराध गतिविधियों के लिए जाना जाता है. ब्राज़ील के बड़े से बड़े ड्रग माफिया इस इलाके में रहते हैं. राफेल के परिवार ने राफेल को ड्रग से दूर रखने के लिए जुडो ट्रेनिंग सेंटर में दाख़िला करवाया था. बचपन से जुडो के प्रति राफेल की कोई दिलचस्पी नहीं थी बल्कि वह फुटबॉल खेलती थीं, लड़कों से लड़ाई करती थीं और कई बार स्कूल से निकाली भी जा चुकी थीं.
जुडो ट्रेनिंग के दौरान राफेल कई बार बीमार हो जाती थीं क्योंकि गरीबी की वजह से उन्हें उपयुक्त डाइट नहीं मिल पा रही थी. राफेल कभी इस उम्मीद के साथ नहीं जी रही थीं कि वह एक अच्छी जुडो खिलाड़ी बन सकती हैं. 2008 में राफेल की ज़िंदगी बदल गई जब 19 साल के उम्र में थाईलैंड में हुई जूनियर जुडो चैंपियनशिप में राफेल ने सिल्वर मैडल जीता. इस सिल्वर मैडल ने राफेल के सोच को बदल दिया, अब उन्हें लगने लगा कि वह एक अच्छी जुडो खिलाड़ी बन सकती हैं, मैडल जीत सकती हैं, अपने और समुदाय के लिए कुछ कर सकती हैं.
2012 में लंदन में हुए ओलिंपिक राफेल के लिए सबसे भयावह क्षण थे. लंदन ओलिंपिक में अवैध पकड़ के वजह से राफेल को अयोग्य घोषित किया गया, फिर क्या हुआ सोशल मीडिया में राफेल का काफी मज़ाक उड़ाया गया. उसके रंग और समुदाय को लेकर कमेंट किया गया. उनकी खिलाफ अपशब्द बोले गए. उनको बंदर भी बोला गया. यह सब देखने के बाद राफेल जुडो छोड़ देना चाहती थीं. कुछ दिन के लिए राफेल ने ट्रैनिंग भी छोड़ दी, लेकिन कोच और परिवार के लोगों के समझाने के बाद राफेल ने दोबारा अपनी ट्रेनिंग शुरू की.
पिछले चार सालों से राफेल रोज इस तरह के कमेंट्स को याद कर करती थीं. इन यादों के साथ ट्रेनिंग ले रही थीं. बस उन्हें एक मौके की जरूरत थी. लंदन ओलिंपिक में उन पर लगे धब्बे को वह मिटाना चाहती थीं. कल वह मौका आया जब महज कुछ मिनट्स के अंदर राफेल ने अपने ऊपर लगे धब्बे को मिटा दिया. उन्होंने रियो ओलिंपिक में ब्राज़ील के लिए पहला गोल्ड मैडल जीता. इस जीत के साथ राफेल की आंखों में आंसू थे. चारों तरफ सिर्फ उनका नाम सुनाई दे रहा था.. राफेल.....राफेल....राफेल.
राफेल सिल्वा का ज़िंदगी काफी संघर्ष में गुजरी है. सिल्वा का जन्म ब्राज़ील के रियो डी जनेरो के फावेला में हुआ था, जो रियो का सबसे बड़ा स्लम माना जाता है. फावेल इलाका अपराध गतिविधियों के लिए जाना जाता है. ब्राज़ील के बड़े से बड़े ड्रग माफिया इस इलाके में रहते हैं. राफेल के परिवार ने राफेल को ड्रग से दूर रखने के लिए जुडो ट्रेनिंग सेंटर में दाख़िला करवाया था. बचपन से जुडो के प्रति राफेल की कोई दिलचस्पी नहीं थी बल्कि वह फुटबॉल खेलती थीं, लड़कों से लड़ाई करती थीं और कई बार स्कूल से निकाली भी जा चुकी थीं.
जुडो ट्रेनिंग के दौरान राफेल कई बार बीमार हो जाती थीं क्योंकि गरीबी की वजह से उन्हें उपयुक्त डाइट नहीं मिल पा रही थी. राफेल कभी इस उम्मीद के साथ नहीं जी रही थीं कि वह एक अच्छी जुडो खिलाड़ी बन सकती हैं. 2008 में राफेल की ज़िंदगी बदल गई जब 19 साल के उम्र में थाईलैंड में हुई जूनियर जुडो चैंपियनशिप में राफेल ने सिल्वर मैडल जीता. इस सिल्वर मैडल ने राफेल के सोच को बदल दिया, अब उन्हें लगने लगा कि वह एक अच्छी जुडो खिलाड़ी बन सकती हैं, मैडल जीत सकती हैं, अपने और समुदाय के लिए कुछ कर सकती हैं.
2012 में लंदन में हुए ओलिंपिक राफेल के लिए सबसे भयावह क्षण थे. लंदन ओलिंपिक में अवैध पकड़ के वजह से राफेल को अयोग्य घोषित किया गया, फिर क्या हुआ सोशल मीडिया में राफेल का काफी मज़ाक उड़ाया गया. उसके रंग और समुदाय को लेकर कमेंट किया गया. उनकी खिलाफ अपशब्द बोले गए. उनको बंदर भी बोला गया. यह सब देखने के बाद राफेल जुडो छोड़ देना चाहती थीं. कुछ दिन के लिए राफेल ने ट्रैनिंग भी छोड़ दी, लेकिन कोच और परिवार के लोगों के समझाने के बाद राफेल ने दोबारा अपनी ट्रेनिंग शुरू की.
पिछले चार सालों से राफेल रोज इस तरह के कमेंट्स को याद कर करती थीं. इन यादों के साथ ट्रेनिंग ले रही थीं. बस उन्हें एक मौके की जरूरत थी. लंदन ओलिंपिक में उन पर लगे धब्बे को वह मिटाना चाहती थीं. कल वह मौका आया जब महज कुछ मिनट्स के अंदर राफेल ने अपने ऊपर लगे धब्बे को मिटा दिया. उन्होंने रियो ओलिंपिक में ब्राज़ील के लिए पहला गोल्ड मैडल जीता. इस जीत के साथ राफेल की आंखों में आंसू थे. चारों तरफ सिर्फ उनका नाम सुनाई दे रहा था.. राफेल.....राफेल....राफेल.
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राफेल सिल्वा, रियो ओलिंपिक 2016, रियो ओलिंपिक, Rafaela Silva, ब्राजील, Brazil, Rio Olmypics 2016