दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु ने रविवार को जर्मनी में 'हाइलो ओपन सुपर 500' बैडमिंटन टूर्नामेंट जीतने के बाद, सोशल मीडिया पर एक खास संदेश के जरिए इस सीजन के अपने दूसरे खिताब का जश्न मनाया. उन्होंने समर्थन के लिए देश का धन्यवाद किया और अपने करियर के उतार-चढ़ाव में मार्गदर्शन के लिए हनुमान जी को श्रेय दिया. सिंधु ने अपने ट्वीट की शुरुआत जर्मन वाक्यांश 'डांके शॉन' से की, जिसका मतलब 'बहुत-बहुत धन्यवाद' होता है. जर्मनी में खिताब जीतने के बाद, उन्होंने इसी तरह अपना आभार व्यक्त किया. 31 साल की उम्र में एक और उपलब्धि हासिल करने पर, उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, "31 अब 21 जैसा है." भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने अपने करियर के अच्छे और मुश्किल, दोनों दौर में साथ रहने के लिए हनुमान जी को श्रेय दिया.
हाइलो ओपन जीतने के बाद सिंधु ने लिखा,"डैंके शॉन (धन्यवाद), जर्मनी. लोग कहते हैं कि 31 की उम्र अब 21 जैसी है. मैं इस पर कोई बहस नहीं करने वाली. हर उतार-चढ़ाव के बीच, हनुमान जी की कृपा से... मैं अभी भी अपने लक्ष्य का पीछा कर रही हूं. हमेशा."
Danke schön, GERMANYYYYY!!!!!!! 🇩🇪❤️🏆 They say 31 is the new 21. I'm not going to argue. 😉😂 Through every high and every low, by Hanuman Ji's grace. 🙏❤️ Still chasing. Always. https://t.co/EKcGFYVzqP
— PV Sindhu (@Pvsindhu1) November 1, 2026
पीवी सिंधु ने रविवार को जर्मनी के सारब्रुकन में आयोजित 'हाइलो ओपन सुपर 500' बैडमिंटन टूर्नामेंट का खिताब जीतकर इस सत्र का अपना दूसरा टाइटल हासिल किया. सिंधु ने फाइनल में डेनमार्क की लाइन होजमार्क केयर्सफेल्ट को सीधे गेमों में शिकस्त देकर ट्रॉफी अपने नाम की.
जुलाई में 'जापान ओपन' जीतने वालीं पूर्व वर्ल्ड चैंपियन सिंधु पिछले हफ्ते 'फ्रेंच ओपन' में उपविजेता रही थीं, उन्होंने 500,000 अमेरिकी डॉलर इनामी राशि वाले इस टूर्नामेंट के फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने 39 मिनट तक चले मुकाबले में डेनमार्क की खिलाड़ी (जो टूर्नामेंट में आठवीं वरीयता प्राप्त थीं) को 21-12, 21-14 से हराया.
दूसरी वरीयता प्राप्त भारतीय खिलाड़ी उन्होंने अपने सटीक शॉट्स, चालाकी भरे स्ट्रोक्स और नेट पर बेहतरीन खेल के दम पर वर्ल्ड रैंकिंग में 25वें नंबर पर मौजूद अपनी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ जीत दर्ज की. इस जीत के साथ, सिंधु को 9,200 रैंकिंग अंक मिले, जिससे सीजन के अंत में होने वाले 'बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल्स' के लिए क्वालीफाई करने की उनकी दावेदारी और मजबूत हो गई है.
फाइनल में उतरने से पहले, कजर्सफेल्ड के खिलाफ सिंधु का 'हेड-टू-हेड' रिकॉर्ड 6-1 से उनके पक्ष में था. कजर्सफेल्ड ने सिंधु के खिलाफ अपनी एकमात्र जीत 2015 सुदीरमन कप फाइनल्स में हासिल की थी.
भारतीय खिलाड़ी ने आत्मविश्वास के साथ शुरुआत की और मैच का पहला अंक एक 'क्रॉस-कोर्ट विनर' के साथ जीता. हालांकि, कुछ अनफोर्स्ड एरर्स की वजह से डेनिश खिलाड़ी को 3-3 की बराबरी करने का मौका मिल गया.
इसके बाद वर्ल्ड नंबर-8 सिंधु ने अपनी चालाकी और नेट पर शानदार खेल दिखाते हुए रैलियों पर नियंत्रण बनाया और 8-5 की बढ़त ले ली. उन्होंने पहले गेम में अपनी बढ़त बनाए रखी और सटीक शॉट्स तथा आक्रामक स्ट्रोक्स के जरिए अपनी प्रतिद्वंद्वी पर दबाव डाला. एक बेहतरीन 'बैकहैंड विनर' की मदद से वह 17-12 के स्कोर तक पहुंचीं और फिर अपना पहला गेम प्वाइंट्स भुनाते हुए 21-12 से पहला गेम जीत लिया.
सिंधु ने दूसरे गेम में भी अपनी लय बरकरार रखी और 6-3 की बढ़त बना ली, जिसके बाद कजर्सफेल्ड ने मैच में वापसी करने की कोशिश की. हालांकि, भारतीय खिलाड़ी ने लगातार कई विनर्स लगाकर अपनी बढ़त वापस हासिल की और 10-6 से आगे हो गईं.
डेनिश खिलाड़ी को नेट पर खेलने में लगातार संघर्ष करना पड़ा, जबकि सिंधु ने अपनी बढ़त को 17-11 तक पहुंचा दिया. एक आक्रामक रिटर्न की बदौलत भारतीय खिलाड़ी को छह चैंपियनशिप प्वाइंट्स मिल गए, और जब क्यर्सफेल्ड ने नेट पर एक और गलती की, तो सिंधु ने अपने पहले ही मौके पर खिताब अपने नाम कर लिया.
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