कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पुरुष जैवलिन थ्रो में भारत की ताकत सिर्फ नीरज चोपड़ा तक सीमित नहीं रही. नीरज के साथ रोहित यादव और यशवीर सिंह ने भी फाइनल में जगह बनाकर भारतीय भाला फेंक की बढ़ती गहराई का दम दिखाया है. तीनों भारतीय थ्रोअर का फाइनल में पहुंचना इस बात का संकेत है कि भारत अब जैवलिन में केवल एक स्टार खिलाड़ी के भरोसे नहीं है, बल्कि एक ऐसी मजबूत टीम बन चुका है जो किसी भी बड़े टूर्नामेंट में कई पदकों की दावेदार मानी जा सकती है.
नीरज चोपड़ा ने 79.61 मीटर, रोहित यादव ने 78.37 मीटर और यशवीर सिंह ने 78.36 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर फाइनल में प्रवेश किया. तीन भारतीय खिलाड़ियों का एक साथ टॉप-12 में जगह बनाना भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि है. अब 1 अगस्त को होने वाले फाइनल में भारत की नजर सिर्फ एक पदक पर नहीं, बल्कि कई पदकों की संभावनाओं पर होगी. ऐसे में भारतीय जैवलिन की यह 'त्रिमूर्ति' देश के लिए यादगार प्रदर्शन करने की उम्मीद जगाती है.
बड़े मंच पर रोहित और यशवीर ने दिखाया दम
रोहित यादव (जिनका इस सीजन में 87.05 मीटर का शानदार पर्सनल बेस्ट और घरेलू सर्किट में दबदबा रहा है) ने साबित कर दिया है कि वे बड़े मंचों का दबाव झेलने में पूरी तरह सक्षम हैं. क्वालिफिकेशन राउंड में 78.37 मीटर का थ्रो करके उन्होंने फाइनल का टिकट कटाया. वहीं, युवा थ्रोअर यशवीर सिंह ने भी कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हार न मानते हुए 78.36 मीटर का अहम थ्रो फेंका और टॉप-12 में अपनी जगह पक्की की. दबाव के पलों में इन दोनों का इस तरह खड़े होना भारतीय एथलेटिक्स की मानसिक परिपक्वता को दिखाता है.
दरअसल, 'एक खिलाड़ी' के तमगे से निकलकर ग्लोबल पावर हाउस बनना एकाधिकार का अंत है, और नई बेंचमार्क की शुरुआत है. लंबे समय तक यह माना जाता था कि भारत में जैवलिन थ्रो का मतलब केवल 'नीरज चोपड़ा' है. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दबाव का पूरा दारोमदार अकेले नीरज के कंधों पर होता था. लेकिन रोहित यादव और यशवीर सिंह जैसे युवाओं का वैश्विक फाइनल में एक साथ पहुंचना यह साबित करता है कि भारत ने इस खेल में एक मजबूत 'इकोसिस्टम' तैयार कर लिया है.
बेंच और स्ट्रेंथ
क्रिकेट या अन्य ग्लोबल खेलों की तरह अब भारत के पास भी जैवलिन में मजबूत बेंच स्ट्रेंथ है. यदि किसी दिन एक एथलीट का दिन थोड़ा कमजोर भी हो, तो दूसरे खिलाड़ी देश के लिए मेडल की उम्मीद को जिंदा रख सकते हैं.
फाइनल में रचा जाएगा इतिहास?
जब एक साथ तीन भारतीय किसी फाइनल में उतरते हैं, तो विरोधी टीमों और खिलाड़ियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव स्वतः बढ़ जाता है. अब जब भारत के तीन खिलाड़ी फाइनल में हैं, जो इनका हौसला और बाकी खिलाड़ियों की मनोदशा समझी जा सकती है. अगर नीरज सहित या बाकी किन्हीं दो खिलाड़ियों ने भी बाजी मारी, तो नया इतिहास लिखा जाएगा.फिलहाल का स्टेटस टीम इंडिया को बाकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ एक रणनीतिक बढ़त देता है.
भारतीय स्टार नीरज ने अपने थ्रो के बाद बताया कि हवा के अनिश्चित रुख की वजह से एथलीट्स के लिए क्वालिफिकेशन के दौरान अपने रिलीज का अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल हो रहा था, और कोई भी प्रतियोगी ऑटोमैटिक क्वालिफाइंग स्टैंडर्ड तक नहीं पहुंच पाया.
चोपड़ा ने कहा, "हालात जैवलिन थ्रोअर के लिए अच्छे नहीं हैं। सिर्फ ठंड ही नहीं, बल्कि हवा भी बहुत तेज चल रही है. हवा सामने से भी नहीं आ रही थी; कभी-कभी यह साइड से आती है। यह समझना बहुत मुश्किल होता है कि हमें कहां फेंकना है. कभी-कभी हम सोचते हैं, 'ठीक है, हम वहां फेंकेंगे', लेकिन तभी दूसरी तरफ से हवा आ जाती है. आज बहुत से थ्रोअर संघर्ष कर रहे थे। कोई भी ऑटोमैटिक क्वालिफिकेशन मार्क तक नहीं पहुंच पाया। हालात मुश्किल थे, लेकिन हमें खुशी है कि तीनों भारतीय फाइनल में हैं."
तीनों भारतीय जैवलिन थ्रोअर फाइनल में पहुंच गए, जिससे खिताब के फैसले वाले मुकाबले में देश के लिए कई मेडल जीतने की उम्मीदें बढ़ गई हैं. चोपड़ा ने फाइनल में शामिल खिलाड़ियों की मजबूती को माना, जिसमें दुनिया के कई बेहतरीन एथलीट और पेरिस ओलंपिक के साथी मेडलिस्ट शामिल हैं. उन्होंने कहा, "हां, यह बहुत जबरदस्त मुकाबला होने वाला है. जैवलिन थ्रो जैसे इवेंट के लिए यह सच में एक बहुत अच्छा फाइनल होगा.ॉ
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