भारतीय हॉकी के कई चेहरे पिछले दो दिन टेलीविज़न और अख़बारों में पुरस्कारों की वजह से छाए रहे। भारतीय हॉकी टीम दो दिनों बाद फिर से एक नई चुनौती के लिए तैयार हो गई है।
पिछले साल बड़ी कामयाबी के बाद टीम में कुछ बड़े बदलाव हुए हैं। ख़ासकर नए डच कोच पॉल वैन एस के टीम का साथ जुड़ने को लेकर कई जानकार एक सकारात्मक बदलाव मान रहे हैं, तो कई जानकार उन्हें परखने के लिए थोड़ा वक्त मांग रहे हैं। अहम ये है कि टीम के पास ओलिंपिक से पहले अब ज़्यादा वक्त नहीं है कि उसमें कोई और बड़ा बदलाव हो।
माना जाना चाहिए कि यहां से रियो ओलिंपिक्स तक के रास्ते में मैदान की हॉकी असली हॉकी को परेशान नहीं करेगी। साल 2014 में कई टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के बाद ये मौक़ा भारतीय हॉकी के लिए पुरस्कार बटोरने का है। एशियाड में गोल्ड, कॉमनवेल्थ में सिल्वर और चैंपियन्स ट्रॉफ़ी में अच्छे प्रदर्शन का पुरस्कार खिलाड़ियों को मिलना शुरू भी हो गया है।
भारतीय कप्तान सरदार सिंह पद्मश्री से नवाज़े गए हैं। हॉकी इंडिया ने भी पहली बार खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ़ को अलग-अलग पुरस्कारों से नवाज़ने की परंपरा शुरू की है। जहां डिफेंडर बिरेन्द्र लाकड़ा साल 2014 के बेहतरीन पुरुष खिलाड़ी, वंदना कटारिया 2014 की बेहतरीन महिला खिलाड़ी और पीआर श्रीजेश साल 2014 के बेहतरीन गोलकीपर के ख़िताब से नवाज़े गए हैं।
ये सभी खिलाड़ी और अधिकारी इतना ज़रूर मानते हैं कि इनका असली इम्तिहान रियो ओलिंपिक्स ही है। उन्हें इस बात का अंदाज़ा है कि फ़ैन्स ओलिंपिक्स के पैमाने पर ही इन सबकी परख करेंगे।
कप्तान सरदार सिंह कहते हैं कि नए सीज़न के लिए टीम ने कमर कस ली है। वो कहते हैं कि मलेशिया के इपोह में 5 से 12 अप्रैल तक होने वाले अज़लान शाह कप में अच्छी टीमें हिस्सा ले रही हैं।
वो मानते हैं कि भारतीय टीम को वहां अच्छी तैयारी मिलेगी। टीम के ड्रैग फ़्लिकर वीआर रघुनाथ कहते हैं, "नए कैलेंडर में हमें फिर से तैयार हो जाना चाहिए। हमारे साथ नए कोच हैं। हम मानसिक और शारीरिक तौर पर तैयार हैं। हम अज़लान शाह टूर्नामेंट का इंतज़ार कर रहे हैं।"
अज़लान शाह कप में पांच बार की चैंपियन टीम ने आख़िरी बार ये टूर्नामेंट पांच साल पहले 2010 में जीता था और आख़िरी बार 2012 में पोडियम पर पहुंचने में कामयाब रही थी। कप्तान सरदार सिंह कहते हैं कि क़रीब हफ़्ते भर चलने वाले इस टूर्नामेंट के लिए भारतीय पुरुष टीम अपने नए डच के साथ तैयार हो गई है। वैसे ये नए डच कोच पॉल वैन एस और उनकी नई टीम के लिए एक-दूसरे को परखने का भी एक अच्छा मौक़ा होगा।
54 साल के डच कोच पॉल वैन एस ने हॉलैंड को लंदन ओलिंपिक्स में फ़ाइनल तक का सफ़र करवाया और रजत पदक जीतने में कामयाब रहे। कोच पॉल वैन एस बढ़-चढ़कर दावा नहीं कर रहे। वो कहते हैं कि अज़लान शाह कप एक अच्छा टूर्नामेंट है। यहां हम अच्छी तैयारी कर आगे बढ़ने का रास्ता तैयार कर सकते हैं।
भारतीय हॉकी के हाई परफ़ोर्मेंस डायरेक्टर डच कोच रोलंट ऑल्टमैन्स भी मानते हैं कि अज़लान शाह टूर्नामेंट के दौरान टीम और कोच के पास एक-दूसरे से तालमेल बनाने का अच्छा मौक़ा होगा। वे कहते हैं कि हमने ओलिंपिक के लिए क्वालिफ़ाई कर लिया है, इसलिए ओलिंपिक खेलों के लिए तैयार होने के लिए हमारे पास 17-18 महीने का वक्त है।
भारतीय हॉकी के लिए पिछला साल कामयाबी के साथ विवादों भरा भी रहा। लेकिन अब अगले डेढ़ साल इन सबकी कोई गुंजाइश नहीं है। फ़ैन्स और जानकार पैनी निगाहों से भारतीय हॉकी को तौलते हुए इससे एक बार फिर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद करेंगे।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं