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This Article is From Aug 04, 2015

कोपेनहेगेन वर्ल्ड चैंपियनशिप : तीरंदाज़ों ने बनाया इतिहास, लेकिन ग़लतियों से इंकार नहीं

कोपेनहेगेन वर्ल्ड चैंपियनशिप : तीरंदाज़ों ने बनाया इतिहास, लेकिन ग़लतियों से इंकार नहीं
रजत चौहान (फाइल फोटो)
नई दिल्ली: डेनमार्क वर्ल्ड चैंपियनशिप से विजेता भारतीय खिलाड़ी इस बार लौटे तो जीत की खुशी के साथ एक कसक पूरी टीम के चेहरे पर दिखी। वर्ल्ड चैंपियनशिप की कंपाउंड तीरंदाज़ी में रजत पदक जीतकर राजस्थान के रजत चौहान ने एक इतिहास कायम कर दिया। उनका पदक भारत के लिए वर्ल्ड चैंपियनशिप का पहला निजी पदक रहा, लेकिन वो अपनी टीस छिपा नहीं पाए। रजत कहते हैं, "मैं खुश तो हूं पर मलाल भी है। मैं जीता नहीं हूं, मुझे हारने की वजह से रजत पदक हासिल हुआ है।"

इंचियन एशियाड में स्वर्ण पदक जीतने वाले रजत चौहान के बाल कंधों तक लहरा रहे हैं। रजत चौहान में एम.एस. धोनी की तरह एक बेफ़िक्री  और कुछ वैसा ही आत्मविश्वास उनमें साफ़ नज़र आता है। वो कहते हैं, "अगली बार स्वर्ण पदक जीतने की कोशिश करूंगा तभी ये कमी पूरी होगी।"  डेनमार्क में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत चौहान मेज़बान खिलाड़ी स्टीफ़न हानसेन से फ़ाइनल में 143 के मुक़ाबले 147 अंकों से हार गए।

कोच धर्मेन्द तिवारी कहते हैं कि भारतीय तीरंदाज़ी के साथ शायद इस वक्त सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि टीम की बेंच स्ट्रेंथ अच्छी नहीं है। बेंच स्ट्रेंथ अच्छी होगी तभी खिलाड़ी ऐन वक्त पर दस प्वाइंटर शॉट्स लगाने से नहीं चूकेंगे। उनका मानना है कि इस वक्त खिलाड़ियों को पूरी सुविधाएं मिल रही हैं।

ओलिंपियन और वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो बार रजत पदक जीतने वाली दीपिका कुमारी भी मानती हैं कि उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण और फ़ेडरेशन से जितनी भी सुविधाएं मांगी हैं उन्हें मिली हैं। वो कहती हैं कि अगली बार ओलिंपिक्स में उनका अनुभव उन्हें बेहतर नतीजे दिला सकता है। लंदन ओलिंपिक्स को लेकर वो कहती हैं कि पिछला ओलिंपिक्स भी उनके लिए आई-गई बात हो गई।

डेनमार्क में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारतीय तीरंदाज़ों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन तो किया, लेकिन कई मैचों में तीरंदाज़ ऐन मौक़े पर टारगेट से बाहर होते भी दिखाई दिए। वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारतीय टीम डेनमार्क और हॉलैंड के साथ तीसरे नंबर पर रही। द. कोरिया और चाइनीज़ ताइपेई की टीम पहले और दूसरे नंबर पर रही।

रियो ओलिंपिक्स को लेकर इस बार दीपिका अपने अनुभव के सहारे बड़ी उम्मीद जता रही हैं। अच्छी बात ये है कि महिला रिकर्व टीम के साथ मंगल सिंह चांपिया ने भी रियो का टिकट हासिल कर लिया है, लेकिन बीजिंग ओलिंपिक्स में हिस्सा ले चुके मंगल को इस बात का अफ़सोस है कि उनकी टीम रियो के लिए क्वालिफ़ाई करने का मौक़ा चूक गई।

भारतीय टीम को क्वालिफ़ाई करने का ये मौक़ा अब अगले साल जून में वर्ल्ड टीम क्वालिफ़िकेशन टूर्नामेंट के दौरान मिलेगा, लेकिन तब चुनौती इतनी भी आसान नहीं होने वाली। भारत को अंतालिया (Turkey) में होने वाले टूर्नामेंट में पोडियम पर जगह बनानी होगी, तभी ये टीम रियो का टिकट हासिल कर सकेगी, लेकिन कोच धर्मेन्द इसे लेकर बहुत चिंतित नहीं। वो कहते हैं, "पिछली दफ़ा भी पुरुष टीम ने ऐसे ही क्वालिफ़ाई किया था। इसलिए ये इतनी बड़ी बात नहीं होनी चाहिए।"

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