राजस्थान के हाड़ौती इलाके में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. सावन की शुरुआत के बाद भी बारिश का इंतजार खत्म नहीं हुआ है. हालात ये हैं कि कोटा संभाग में खरीफ की बुवाई का आधा से ज्यादा इलाका अब भी खाली पड़ा है. सोयाबीन और धान जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई का समय निकल चुका है. कृषि विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि संभाग में करीब 49 फीसदी खेत अभी सूखे पड़े हैं.
हाड़ौती क्षेत्र के किसानों को उम्मीद थी कि जुलाई की शुरुआत के साथ मानसून सक्रिय होगा, लेकिन जुलाई महीना चलने के बावजूद बारिश नहीं होने से खरीफ का सीजन संकट में आ गया है. कोटा संभाग में इस बार 12 लाख 14 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक सिर्फ 6 लाख 19 हजार हेक्टेयर में ही बुवाई हो पाई है. यानी करीब 5 लाख 81 हजार हेक्टेयर जमीन अभी भी खाली पड़ी है.
हाड़ौती क्षेत्र में सोयाबीन सबसे ज्यादा प्रभावित
मानसून की कमी का सबसे ज्यादा असर सोयाबीन की फसल पर पड़ा है. हाड़ौती में सबसे ज्यादा बोई जाने वाली सोयाबीन की बुवाई इस बार 7 लाख 10 हजार हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले घटकर सिर्फ 3 लाख 63 हजार हेक्टेयर रह गई है वहीं धान की बुवाई भी प्रभावित हुई है.
धान का रकबा 1 लाख 73 हजार हेक्टेयर से घटकर सिर्फ 63 हजार 303 हेक्टेयर तक पहुंच गया है. उड़द की बुवाई भी 65 हजार 883 हेक्टेयर तक सिमट गई है.
विशेषज्ञों के मुताबिक सोयाबीन की बुवाई के लिए 10 जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है. अब बारिश की कमी के कारण धान की बुवाई भी मुश्किल है. अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो जहां बुवाई हो चुकी है वहां भी बीज अंकुरित नहीं होने और पौधों के सूखने का खतरा बना हुआ है.
हालांकि नहरों में जल का प्रवाह किया जा रहा है लेकिन बड़ा सिचाई का बड़ा क्षेत्र मानसून से होने वाली बारिश पर निर्भर रहता है. ऐसे में मानसून की सक्रियता जल्द नहीं हुई तो किसानों की चिंता और बढ़ जााएगी.

कोटा क्षेत्र के 81 बांधों में आधा ही पानी भरा है
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बांधों में पानी नहीं
बारिश की कमी का असर हाड़ौती के बांधों पर भी दिखाई दे रहा है. ईआरसीपी के सबसे बड़े बांध नौनेरा में अभी पानी की स्थिति चिंताजनक है. बांध की भराव क्षमता 52 फीट है, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 0.65 फीट पानी ही मौजूद है,वहीं कोटा बैराज, जवाहर सागर और राणा प्रताप सागर बांधों में भी पिछले साल की तुलना में जलस्तर कम है.
जवाहर सागर बांध में करीब 72.99 प्रतिशत और राणा प्रताप सागर में 66.86 प्रतिशत पानी उपलब्ध है. आलनिया बांध में 33 फीट की क्षमता के मुकाबले करीब 15 फीट और सावन भादो बांध में 42 फीट के मुकाबले 11.80 फीट पानी बचा है.
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता सुनील गुप्ता मुताबिक मानसून कमजोर रहने का असर बांधों में पानी की आवक पर पड़ा है. फिलहाल सिंचाई के लिए मध्यप्रदेश से पानी की पूर्ति की जा रही है.

खेतों में पानी की कमी से सबसे ज्यादा असर सोयाबीन की फसल पर पड़ा है
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सब्जियां और खाद्यान्न हो सकते हैं महंगे
राजस्थान के कुल 693 बांधों में से इस समय सिर्फ 5 बांध ही पूरी तरह भरे हैं, जबकि 279 बांध सूखे पड़े हैं. 409 बांधों में सीमित मात्रा में पानी बचा है. प्रदेश के बांधों में कुल जलभराव क्षमता का सिर्फ 45.76 प्रतिशत पानी उपलब्ध है, जबकि पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 57.81 प्रतिशत था.
कोटा जोन के 81 बांधों में वर्तमान में करीब 56.62 प्रतिशत पानी है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 79.36 प्रतिशत था.फिलहाल हाड़ौती के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं.
अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो खरीफ की फसल ही नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में सब्जियों और खाद्यान्न की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है. फिलहाल सब्जियों के दामों पर बारिश नहीं होने का असर शुरू होने लगा है. किसानों को अब सिर्फ मानसून की सक्रियता का इंतजार है.
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