राजस्थान की जोजरी नदी में प्रदूषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. नदी के किनारे 100 मीटर तक निर्माण पर सर्वोच्च अदालत ने रोक दी है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सख्त रूख अपनाते हुए कहा कि जोजरी के 100 मीटर दायरे में फिलहाल कोई निर्माण या विकास गतिविधि नहीं होगी. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी नदी में प्रदूषण को लेकर राजस्थान सरकार और संबंधित एजेंसियों पर गंभीर सवाल भी उठाए हैं.
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आदेश में क्या कहा
अदालत के निर्देश दिए, "पर्यावरण को हो रहे गंभीर नुकसान को देखते हुए, यह ज़रूरी है कि हाई फ्लड लाइन और जरूरी इकोलॉजिकल बफर जोन तय करने और उनकी सीमाएं निर्धारित करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया पूरी होने तक, नदी के इकोसिस्टम की ठीक से सुरक्षा के लिए एक अंतरिम सुरक्षा दायरा बनाया जाए."
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इससे पहले नदी में औद्योगिक प्रदूषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर-2025 में स्वतः संज्ञान लिया था. अदालत के सामने मुख्य चिंता औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट, इससे नदी और आसपास के लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर है. वहीं, 4 अगस्त को अदालत ने स्पष्ट किया था कि ट्रीटेड पानी की एक बूंद भी जोजरी नदी में नहीं जाएगी. कोर्ट ने नदी के किनारे अतिक्रमण हटाने और नदी क्षेत्रों की पहचान/मार्किंग जैसे उपायों पर भी जोर दिया था.
समिति दे चुकी है रिपोर्ट- जोजरी नदी का पानी अम्लीय
सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति भी रिपोर्ट पेश कर चुकी है. हाल ही में पेश दूसरी रिपोर्ट में पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता वाली समिति ने स्थल निरीक्षण के आधार पर बताया था कि जोजरी नदी के कई हिस्सों में अब भी तेज दुर्गंध आ रही है और पानी अत्यधिक अम्लीय पाया गया. रिपोर्ट में कहा गया कि सफाई अभियान शुरू होने के बावजूद केवल नदी की सफाई पर्याप्त नहीं होगी. जब तक सभी वैध और अवैध अपशिष्ट निकासी बिंदुओं की पहचान कर उन्हें बंद या नियंत्रित नहीं किया जाता, तब तक प्रदूषण नहीं रुकेगा.
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