- कर्मचारी का जाति प्रमाणपत्र नौकरी के अमान्य घोषित कर दिया गया था.
- इसके बाद भी उसने तीन दशक से अधिक समय तक नौकरी की.
- इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकार का किया इस्तेमाल.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के रिटायरमेंट और पेंशन संबंधी लाभ सुरक्षित रखने का आदेश दिया है. कर्मचारी का जाति प्रमाणपत्र बाद में अमान्य घोषित कर दिया गया था, लेकिन उसने तीन दशक से अधिक समय तक सेवा की थी. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मामले की सुनवाई की.
संबंधित कर्मचारी को 1994 में मुंबई नगर निगम में जूनियर इंजीनियर (सिविल) के पद पर नियुक्त किया गया था. उसकी नियुक्ति ‘टोकरे कोली' अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्र के आधार पर हुई थी. बाद में 2020 में जाति प्रमाणपत्र को स्क्रूटिनी कमेटी ने अमान्य घोषित कर दिया. इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा, जिसके बाद कर्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. मामले की सुनवाई लंबित रहने के दौरान सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण कर्मचारी सेवा में बना रहा और 30 जून 2025 को सेवानिवृत्त हुआ. सेवानिवृत्ति के बाद उसने अपने पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभ सुरक्षित रखने की मांग की.
सुप्रीम कोर्ट ने जाति प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित करने वाले स्क्रूटिनी कमेटी और हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया. हालांकि, कर्मचारी की तीन दशक से अधिक की लगातार सेवा को देखते हुए अदालत ने उसके रिटायरमेंट और पेंशन लाभों की रक्षा करना उचित माना.
अनुच्छेद 142 का किया इस्तेमाल
पीठ ने कहा कि कर्मचारी ने 21 अक्टूबर 1994 से 30 जून 2025 तक सेवा की है. इसलिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए उसकी सेवा को केवल रिटायरमेंट और पेंशन संबंधी लाभों की गणना तथा भुगतान के उद्देश्य से सुरक्षित रखा जाता है. अदालत ने स्पष्ट किया कि ये लाभ संबंधित सेवा नियमों के अनुसार दिए जाएंगे. पीठ ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले का भी उल्लेख किया.
इसके अलावा 2017 के एक मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया गया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि उपयुक्त मामलों में पूर्ण न्याय करने के लिए अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्ति का इस्तेमाल किया जा सकता है. अदालत ने कहा कि सामान्य तौर पर अमान्य जाति या जनजाति प्रमाणपत्र के आधार पर प्राप्त नियुक्ति कायम नहीं रह सकती, लेकिन मामले की विशेष परिस्थितियों में लंबे समय तक की गई सेवा से जुड़े पेंशन और रिटायरमेंट लाभों की रक्षा के लिए अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल किया जा सकता है.
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