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Success Story: बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़ अपनाई खेती-बागवानी, सालाना कमा रहे 8 से 10 लाख रुपये... बेटा है IAS

रामसिंह मीणा ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद 1984 में बैंक की नौकरी से अपने कैरियर की शुरुआत की. साल 2018 में उन्होंने दिल्ली में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से ब्रांच मैनेजर के पद से वीआरएस ले लिया.

Success Story: बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़ अपनाई खेती-बागवानी, सालाना कमा रहे 8 से 10 लाख रुपये... बेटा है IAS
बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़ की किसानी (NDTV)

कहते है कि अगर इंसान में कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं है, देर सवेर सफलता उसके कदम चूमती है. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है सवाई माधोपुर के गम्भीरा निवासी रामसिंह मीणा ने, जिन्होंने बैंक मैनेजर की नौकरी से VRS (रिटायरमेंट) लेकर खेती किसानी और बागवानी को अपनाया और अब अपनी लगन और मेहनत के दम पर हर साल लाखों रुपये कमा रहे है. इतना ही नहीं रामसिंह क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों में सुमार है और कृषि के क्षेत्र में नवाचार, जैविक खती, संवर्धन एवं आधुनिक तकनीकियों के माध्यम से खेती और बागवानी करने को लेकर जिला और राज्य स्तर पर सम्मान भी पा चुके है.

साल 2018 में छोड़ी बैक मैनेजर की नौकरी

सवाई माधोपुर से सटे गम्भीरा गांव निवासी रामसिंह मीणा ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद 1984 में बैंक की नौकरी से अपने कैरियर की शुरुआत की. साल 2018 में उन्होंने दिल्ली में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से ब्रांच मैनेजर के पद से वीआरएस ले लिया और नौकरी छोड़कर अपने गांव लौट आये. नौकरी छोड़ने के बाद रामसिंह मीणा ने गांव आकर अपनी खेती संभाली और तन मन से कृषि कार्य में जुट गए. रामसिंह मीणा ने अपनी 10 बीघा कृषि भूमि पर खेती और बागवानी का काम शुरू कर दिया.

राम सिंह मीणा

आम के 50 किस्म के पौधे लगाकर शुरू किया काम

रामसिंह ने अपनी खेती की देखभाल को लेकर अपने खेत पर ही अपना आवास बना लिया और पूरी तरह से कृषि कार्य में जुट गए. रामसिंह ने अपने खेत और अलग-अलग किस्म के करीब 50 पौधे आम के लगाए, जिनमें लंगड़ा, चौसा, कलमी, दशहरी, बादामी, स्वर्णरेखा, हापुस, अल्फांजो आदि शामिल है. रामसिंह ने बताया कि उन्होंने आम के सभी पौधे लखनऊ से मंगवाए हैं. उन्होंने बताया कि भेलेही अभी आम के पौधे छोटे हैं, लेकिन अभी से ही उन्हें आम से सालाना दो से ढाई लाख रुपये की आमदनी हो रही है. रामसिंह बताते है कि नौकरी छोड़कर गांव लौटने के बाद उन्होंने अपने खेत और आधुनिक खेती ओर बागवानी का काम शुरू किया. उनकी सोच थी कि उन्हें अपनी खेती ओर बागवानी से प्रतिदिन आमदनी हो. उसी को ध्यान में रखते हुए रामसिंह ने परंपरागत खेती को अलविदा कहा और आधुनिक तकनीकी से खेती करना शुरू किया.

अमरूद की पिंक ताइवान किस्म के 400 पौधे

रामसिंह ने अपने खेत पर आम के साथ-साथ अमरूद की पिंक ताइवान किस्म के 400 और वीएनआरएन 70 के 280 पौधों के साथ ही सफेदा और गोला किस्म के अमरूद के पौधे भी लगाये, जिनसे अच्छी आमदनी मिल रही है. उन्होंने आम ओर अमरूद के साथ ही अपने खेत पर अनार, पपीता, आंवला, बादाम, नारियल, चीकू, स्टार फ्रूट, नासपति, जामुन, बिलपत्र, मौसमी, अंजीर, लीची, माल्टा आदि फलदार पौधे भी लगाए हैं. जिनसे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है.

बागवानी के साथ ही रामसिंह अन्य प्रकार की खेती भी कर रहे हैं, उससे भी उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती है. रामसिंह के अनुसार उन्हें फिलहाल प्रतिवर्ष करीब 8 से 10 लाख रुपये की आमदनी हो रही है जो आगामी कुछ सालों में दोगुनी हो जायेगी.

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जैविक खाद के लिए पाल रखे हैं पशु

रामसिंह का कहना है कि वह अपनी खेती और बागवानी में केमिकल ओर रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं करते हैं. वे अपनी फसलों ओर बागवानी में जैविक खाद का ही उपयोग करते हैं. रामसिंह ने अपने खेत पर वर्मी कम्पोस्ट का प्लांट लगा रखा है और गोबर के लिए गाय भैंस ओर अन्य पशु पाल रखे हैं, ताकि उन्हें पर्याय मात्रा में देशी खाद मिल सके. रामसिंह का कहना है कि वे राज्य सरकार की कृषि से सम्बंधित विभिन्न योजनाओं की जानकारी रखते हैं और समय-समय पर उनका लाभ भी लेते है. उनका कहना है कि वे कृषि विभाग द्वारा ले जाये जाने वाले कृषक भ्रमन दल में भी शामिल होते है और देश के विभिन्न हिस्सों सहित विदेशों में भी जाते है. कृषि की नई-नई तकनीकियों की जानकारी लेते हैं. 

परंपरागत खेती से होते थे केवल 2 लाख की आमदनी

रामसिंह का कहना है कि पहले वे परंपरागत खेती ही करते थे जिससे उन्हें प्रतिवर्ष महज डेढ़ से दो लाख की ही आमदनी हो पाती थी. लेकिन अब उन्होंने आधुनिक तकनीकी से खेती और बागवानी करना शुरू किया तो उनकी आमदनी भी बढ़कर 8 से 10 लाख रुपये सालाना हो गई है. रामसिंह का कहना है कि जिले के किसानों को कृषि के क्षेत्र ने नवाचार करने के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी भी अपनानी चाहिए, ताकि किसानों की आमदनी बढ़ सके और किसान आर्थिक रूप से सुदृढ बन सके. 

रामसिंहं ने बताया कि जब उनके ऊपर घर की जिम्मेदारी आ गई तो इसके लिए उन्हें बैंक की नौकरी करनी पड़ी. लेकिन उनका मन हमेशा से खेती की तरफ ही रहा. नौकरी के दौरान भी उनका मन हमेशा से खेती की तरफ ही रहा. उनका सपना था कि वह एक दिन गांव जाकर खेती करेंगे. जैसे-जैसे जिम्मेदारियों का बोझ कम हुआ उन्होंने नौकरी छोड़ गांव लौटे और अपने अधूरे सपने को पूरा करने में लग गए. खेती में मेहनत कर उन्होंने अपनी पहचान प्रगतिशील किसान के रूप में बनाई.

बेटा है IAS अधिकारी

उन्होंने बताया कि उनका खुशहाल परिवार है और बड़ा बेटा प्रेम सिंह साल 2014 का IAS अधिकारी है. प्रेम वर्तमान में दिल्ली में SDM की पोस्ट पर कार्यरत है. जबकि दूसरा बेटा पुष्पेंद्र सिंह भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है. जबकि उनका तीसरा बेटा भूपेंद्र सिंह अपने पिता के साथ मिलकर कृषि कार्य संभाल रहा है.

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