"करीब 2 महीने का बच्चा रो रहा है, उस आवाज़ को ढूंढ रहा है जो अब कभी जवाब नहीं देगी. उसके बिस्तर के ऊपर उसकी मां की तस्वीर टंगी है. उसके पिता और बुआ उसे चुप कराने की कोशिश करते हैं, लेकिन वह शांत नहीं होता. आखिरकार, उसकी बुआ उसे गोद में उठाती हैं और बोतल से दूध पिलाती हैं. अब उसे कभी मां का स्पर्श नसीब नहीं होगा." उसके पिता पवन मालवीय ने कहा कि अब यही उसकी जिंदगी है. मां का प्यार और उसका दूध उसकी किस्मत में ही नहीं था. उनकी पत्नी पायल ने कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया और फिर मौत हो गई. पायल की हालत अचानक बिगड़ने के बाद, उसी वार्ड में मौजूद दूसरी महिलाएं भी गंभीर रूप से बीमार पड़ गईं.
सीजेरियन सेक्शन (C-section) से बेटे को जन्म देने के एक दिन बाद, पायल की उसी अस्पताल में मौत हो गई. डॉक्टरों ने उनकी मौत की वजह पल्मोनरी एम्बोलिज्म (फेफड़ों में खून का थक्का जमना) बताई. पायल अकेली नहीं थी, कोटा में C-सेक्शन डिलीवरी के बाद और भी महिलाओं की मौतें हुई. कई अन्य महिलाएं डायलिसिस पर हैं. इनमें से कुछ ऐसी हैं, जिन्हें 26 बार तक डायलिसिस करवाना पड़ा है. इलाज के दौरान कुछ दवाओं में गड़बड़ी की आशंका भी जाहिर की गई.
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद होने वाली मौतों की पड़ताल के लिए NDTV ने राज्य के कई जिलों का दौरा किया. यहां पढ़िए इन 3 भागों की सीरीज का पहला हिस्सा...
इन मौतों ने जवाब से ज्यादा सवाल खड़े कर दिए हैं. जांच के लिए गठित टीम इन 5 महिलाओं की मौत के अलग-अलग कारण बता रही है. तीन की मौत कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुई और दो को जेके लोन अस्पताल में भर्ती कराया गया था. NDTV से खास बातचीत में राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि कोटा, जोधपुर और बीकानेर की घटनाएं अलग-अलग मामले हैं. उनका मानना है कि इन्हें पूरे राज्य में चल रहे किसी एक पैटर्न के हिस्से के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. मंत्री ने कहा कि जांच में मौतों और जटिलताओं के पीछे किसी एक कारण की पहचान नहीं हुई है, बल्कि कई कारकों की ओर इशारा किया गया है.
8 सदस्यों की एक्सपर्ट टीम बताएगी मौत की वजह
इस मामले की जांच राजस्थान सरकार द्वारा गठित 8 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति और एम्म (नई दिल्ली) की एक विशेषज्ञ टीम कर रही है. इसके अलावा, कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल ने अपने प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन की अगुवाई में एक आंतरिक जांच भी शुरू हुई है. यह कहानी कोटा पर केंद्रित है, जहां टीम ने अस्पतालों का दौरा किया और पीड़ित परिवारों, जीवित बचे लोगों, डॉक्टरों, अधिकारियों और जांचकर्ताओं से बात की. भाग 2 में जोधपुर के मामलों की पड़ताल की गई है, और इसके बाद भाग 3 में बीकानेर के मामलों को दिखाया गया है.
पहले बच्चे का इंतजार था, लेकिन रवि ने पत्नी को खो दिया
पायल की मौत के बाद एक और महिला ज्योति वर्मा भी थी, जो उसी लड़ाई से जूझ रही थीं. रवि नायक और ज्योति वर्मा ने पिछले साल ही शादी की थी, कई सालों के प्यार के बाद आखिरकार उनकी शादी हुई थी. वे अपने पहले बच्चे के स्वागत का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. लेकिन वह खुशी बहुत कम समय के लिए थी. रवि ने बताया, "डॉक्टरों ने हमें बताया कि ज्योति को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था. वहां 6 महिलाएं थीं, सभी को ड्रिप लगी हुई थी. डिलीवरी के बाद वह ठीक लग रही थीं. लेकिन अगली ही सुबह, महिला की हालत अचानक बिगड़ गई और ब्लड प्रेशर कम हो गया. रवि ने बताया कि हम डॉक्टरों से पूछते रहे कि क्या हो रहा है, लेकिन उन्होंने बस हमें इंतजार करने के लिए कहा. ज्योति को ICU में शिफ्ट कर दिया गया, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो रही थी. 6 मई को उन्हें नई बिल्डिंग (सुपर स्पेशियलिटी) में रेफर किया गया और डायलिसिस पर रखा गया. लेकिन ब्लीडिंग कभी नहीं रुकी.

ज्योति वर्मा के पति रवि नायक आज भी उनकी पत्नी की मौत की वजह पता करने में जुटे हैं.
रवि ज्योति के मेडिकल रिकॉर्ड की एक मोटी फाइल पलटते हैं, उनके मुताबिक अस्पताल में अपने पहले बच्चे को जन्म देने जाने से पहले पत्नी पूरी तरह स्वस्थ थी. ज्योति की मौत की असल वजह का पता फोरेंसिक लैब (FSL की रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा. हालांकि, उसका इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि बहुत ज़्यादा खून बहने की वजह से उसे एक्यूट किडनी फेल्योर और मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर की समस्या हो गई थी. रवि ने बताया कि मैं अब काम पर भी नहीं जा सकता क्योंकि मुझे अपने बच्चे की देखभाल करनी है. हमें सरकार या अस्पताल, किसी की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है.
इन परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. मां के बिना नवजात बच्चों की परवरिश करना, साथ ही मौत के पीछे जवाबदेही और सच्चाई का इंतज़ार करना, उनके लिए रोज़ाना का संघर्ष बन गया है. उन्होंने कहा कि उन्हें महिलाओं के पूरे मेडिकल रिकॉर्ड नहीं दिए गए, हालांकि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने इस दावे को गलत बताया है.
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