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'मल्लिका आम' से चमक गई इंजीनियर की किस्मत, नौकरी छोड़ किसान बना तो हो गई छप्पड़ फाड़ कमाई

चित्तौड़गढ़ के एक किसान ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद 4 साल नौकरी की. कुछ ही समय बाद गांव लौटा और आम की खेती शुरू की. आज खेती से लाखों रुपये की कमाई हो रही है.

'मल्लिका आम' से चमक गई इंजीनियर की किस्मत, नौकरी छोड़ किसान बना तो हो गई छप्पड़ फाड़ कमाई
चित्तौड़गढ़ के इंजीनियर कन्हैयालाल धाकड़ की मेहनत करीब 9 साल बाद रंग लाई.

खेती में पारंपरिक फसलों से कुछ अलग करने की सोच रखने वाले किसानों के लिए चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) के कन्हैयालाल धाकड़ मिसाल बन गए हैं. निंबाहेड़ा तहसील के भैरूखेड़ा गांव के इस युवा किसान ने अपनी निजी नौकरी छोड़कर बागवानी में दांव खेला. कन्हैयालाल ने बीए और इलेक्ट्रिकल डिप्लोमा करने के बाद 4 साल तक निजी कंपनियों में नौकरी की. जब नौकरी में मन नहीं लगा तो खेती में कुछ नया करने की ठानी. साल 2017 में 2 बीघा जमीन पर आम के पौधे लगाएं और अब उनके खेत में 300 आम के पेड़ हैं. साल 2020 में 10 क्विंटल उत्पादन से शुरू हुआ यह सफर 2025 में 150 क्विंटल तक पहुंचा. इस साल उन्होंने 200 क्विंटल आम का उत्पादन किया. 

नीलम और दशहरी का हाइब्रिड है मल्लिका आम

कन्हैयालाल बताते हैं कि इंटरनेट पर उन्होंने आम की खेती को लेकर वीडियो खंगाले. शोध के बाद उन्होंने आंध्र प्रदेश की  मल्लिका आम की वैरायटी को चुना. मल्लिका आम, नीलम और दशहरी किस्म का एक हाइब्रिड है. इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह बेहतरीन मिठास और रेशे-रहित गूदे के लिए जाना जाता है. बेहद मीठा होने के चलते इसकी मांग खाने और अचार बनाने दोनों के लिए बनी रहती है.  

इस आम का वजन आमतौर पर 300 ग्राम से लेकर 800 ग्राम तक होता है.

इस आम का वजन आमतौर पर 300 ग्राम से लेकर 800 ग्राम तक होता है.

सीजन के अंत तक बाजार में बिकता है यह आम

स्थानीय बाजार से शुरू होकर अब ये आम प्रतापगढ़, नीमच, उज्जैन और उदयपुर तक सप्लाई किए गए. खास बात यह भी है कि यह देर से पकने वाली वैरायटी है, जो जुलाई के अंत या अगस्त तक चलती है. यही वजह है कि जब अन्य आम बाजार से खत्म हो जाते हैं, तब भी यह आम मुनाफा दिलाता है. 

इनोवेटिव किसान के रूप में हो चुके हैं सम्मानित

शुरुआत में पौधे मंगाने और बाग तैयार करने में करीब एक लाख रुपये का खर्च आया. लेकिन आज उनका आम का बगीचा को देखने आसपास के क्षेत्रों से किसान आते हैं. इसमें उनके दिवंगत पिता मोहनलाल धाकड़ का प्रोत्साहन और उनके पूरे परिवार की कड़ी मेहनत रही.

आसपास के कई गांवों तक कन्हैयालाल की चर्चा है, वो अन्य किसानों को भी खेती की जानकारी देते हैं.

आसपास के कई गांवों तक कन्हैयालाल की चर्चा है, वो अन्य किसानों को भी खेती की जानकारी देते हैं.

साल 2025 में उन्हें इनोवेटिव फार्मर के रूप में सम्मानित भी किया गया. कन्हैयालाल का मानना है कि किसान अगर बाजार की मांग और सही किस्म का चुनाव करे तो कम जमीन से भी नौकरी से ज्यादा कमाई और संतोष हासिल किया जा सकता है. 

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