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अमेरिका में वामपंथी हिंसा के खिलाफ 67 देशों की मीटिंग, पर 26/11 जैसी एक गलती कर रहा US!

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा, "आज के अति-वामपंथी आतंकवादी एक देश में पैसा जुटा सकते हैं, दूसरे देश में अपना कम्युनिकेशन सिस्टम रख सकते हैं, तीसरे देश में ट्रेनिंग ले सकते हैं."

अमेरिका में वामपंथी हिंसा के खिलाफ 67 देशों की मीटिंग, पर 26/11 जैसी एक गलती कर रहा US!
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्रॉस बॉर्डर आतंकवाद को कम होता बताया है. (Photo: AFP)

अमेरिका ने 'फार-लेफ्ट टेटर' यानी अति वामपंथी आतंकवाद गुटों से जुड़ी राजनीतिक हिंसा पर चर्चा के लिए एक बैठक की मेजबानी की. इस मीटिंग में कुल 67 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिसमें से एक भारत भी था. इंडिया की तरफ से भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा ने मीटिंग में हिस्सा लिया. 

बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भाग लेने वाले देशों से वामपंथी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील की और कहा कि जिहादी आतंकवाद का खतरा काफी कम हो गया है.

मार्को रुबियो ने कहा, "आज के अति-वामपंथी आतंकवादी एक देश में पैसा जुटा सकते हैं, दूसरे देश में अपना कम्युनिकेशन सिस्टम रख सकते हैं, तीसरे देश में ट्रेनिंग ले सकते हैं, चौथे देश में लड़ाकों की भर्ती कर सकते हैं और फिर मिलकर पांचवें देश में किसी टारगेट पर हमला कर सकते हैं."

'जीरो टॉलरेंस' पॉलिसी पर कायम भारत

भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा ने वामपंथी चरमपंथ की चुनौतियों से निपटने में भारत के अनुभव का जिक्र किया. इसके साथ ही, उन्होंने सभी तरह के आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' यानी सख्त रवैया अपनाने की अहमियत पर भी जोर दिया, जिसमें सीमा-पार आतंकवाद और अलगाववादी एजेंडा चलाने वाले समूह शामिल हैं.

लेकिन दूसरी तरफ मार्को रुबियो ने सीमा-पार आतंकवाद से होने वाले खतरे को कम करके आंका और अति-वामपंथी आतंकवाद के खतरे पर ज्यादा जोर दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप द्वारा अपनाई गई सफल आतंकवाद-विरोधी रणनीतियों की वजह से जिहादी आतंकवाद का खतरा कम हो गया है.

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रूबियो ने कहा, "बेशक, यह खतरा बना रहेगा, खासकर तब तक जब तक हम ऐसी इमिग्रेशन व्यवस्थाओं को बर्दाश्त करते रहेंगे, जो इन खतरों को सीधे हमारे देशों में ले आती हैं. लेकिन यह खतरा काफी कम हो गया है."

हालांकि, भारत के लिए सीमा पार आतंकवाद का खतरा उतना ही गंभीर बना हुआ है, जितना एक दशक पहले था. साल 2025 का पहलगाम आतंकी हमला सबसे बड़ा हालिया उदाहरण है.

गलती दोहरा रहा अमेरिका?

ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या अमेरिका एक बार फिर से 26/11 जैसी गलती दोहरा है? क्योंकि मुंबई में हुए 26/11 हमले के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान की कड़ी आलोचना नहीं की थी. मौजूदा वक्त में भी आतंकवाद के मुद्दे पर भारत, पाकिस्तान को लेकर मुखर है. आए दिन सीमा से इस तरह की खबरें आती रहती हैं. पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी. भारत ने पाकिस्तान में स्थित कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. एक तरफ भारत आतंकी कृत्यों के खिलाफ पाकिस्तान को विश्व स्तर पर कटघरे में घड़ा करने की कोशिश करता है और जीरो टॉलेरेंस की नीति अपनाता है. वहीं, दूसरी तरफ अमेरिका पाकिस्तान की ऐसी करतूतों को नजरअंदाज करता नजर आता है.

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