सिरोही जिले के जावाल कस्बे में स्थित आश्रम में श्रीश्री 1008 रामगिरि महाराज ने अग्नि तपस्या शुरू कर दी. यह अनूठी तपस्या बुधवार (15 अप्रैल) से शुरू हुई, जो 41 दिनों तक चलेगी. क्षेत्र में श्रद्धा और आस्था का केंद्र बनी हुई है. उनके दर्शन के लिए आसपास के लोग पहुंच रहे हैं. गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए तपस्या कर रहे हैं.
11 अग्नि कुंडों में कठोर साधना
महाराज अपने आश्रम में रोज दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक 11 अग्नि कुंडों के बीच बैठकर कठोर साधना कर रहे हैं. इस दौरान वे अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर तप में लीन रहते हैं, जो हठ योग की कठिन साधना में गिनी जाती है.

अग्निकुंड के बीच तप कर रहे साधु.
41 दिनों तक चलेगी तपस्या
बताया जा रहा है कि इस 41 दिवसीय अग्नि तपस्या का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत साधना नहीं, बल्कि व्यापक जनकल्याण से जुड़ा हुआ है. महाराज ने विश्व कल्याण, जनकल्याण, पशु संरक्षण और विशेष रूप से गाय माता को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलाने का संकल्प लिया है. इसके साथ ही समाज में बढ़ रहे नारी अत्याचार के खिलाफ जागरूकता फैलाना भी इस तपस्या का प्रमुख उद्देश्य है.
दर्शन के लिए पहुंच रहे भक्त
आश्रम परिसर में भक्तों की लगातार आवाजाही बनी हुई है, और श्रद्धालु महाराज के इस कठिन संकल्प की सराहना कर रहे हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस प्रकार की तपस्या से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, और जनमानस में नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ती है. यह तपस्या आगामी 41 दिनों तक निरंतर जारी रहेगी, जिसे लेकर क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना हुआ है.
(इनपुट- साकेत गोयल)
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