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राजस्थान निकाय चुनाव में परिवारवाद की एंट्री, मंत्रियों के रिश्तेदारों की हो रही चर्चा

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में टिकट की लड़ाई अब सिर्फ राजनीतिक दलों के बीच नहीं रह गई है. पार्टी के भीतर भी पुराने कार्यकर्ताओं और बड़े नेताओं के परिजनों के बीच भी मुकाबला दिखाई दे रहा है.

राजस्थान निकाय चुनाव में परिवारवाद की एंट्री, मंत्रियों के रिश्तेदारों की हो रही चर्चा
निकाय चुनाव के लिए 9 और 11 सितंबर को मतदान होगा
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राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के लिए टिकट वितरण से पहले बीजेपी और कांग्रेस में घमासान तेज हो गया है. टिकट की दौड़ में एक तरफ सालों से संगठन के लिए काम कर रहे कार्यकर्ता हैं तो दूसरी तरफ बड़े नेताओं के परिजन और रिश्तेदार भी दावेदारी जता रहे हैं. अटरू से शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के परिवार की एक ही वार्ड से दो दावेदारियां सामने आने के बाद परिवारवाद का मुद्दा गरमा गया है. वहीं अलवर में भी बड़े नेताओं के करीबियों और रिश्तेदारों की टिकट की दावेदारी चर्चा में है.

राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के टिकट के लिए सियासी घमासान मचा है और हर वार्ड में दावेदारों की लंबी कतार लगी है. लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उन दावेदारियों की है, जिनका कनेक्शन बड़े नेताओं के परिवार से है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों में टिकट के लिए भारी संख्या में आवेदन आए हैं. जयपुर के 150 वार्डों के लिए 2500 से ज्यादा आवेदन सामने आए हैं. ऐसे में टिकट वितरण ने पार्टी नेतृत्व के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. ये ही हाल अन्य जिलों का है. 

अपने बेटे पवन के साथ मदन दिलावर

अपने बेटे पवन के साथ मदन दिलावर
Photo Credit: @PawanDilawarbjp

बारां की अटरू नगर पालिका की चर्चा

सबसे ज्यादा चर्चा बारां जिले की अटरू नगर पालिका की है. यहां पहली बार नगर पालिका के चुनाव होने जा रहे हैं. कुल 25 वार्डों में चुनाव होना है. खास बात ये है कि नगर पालिका अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति पुरुष के लिए आरक्षित है. 

इसी बीच वार्ड नंबर 5 से शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के परिवार के दो सदस्यों की दावेदारी सामने आई है. शिक्षा मंत्री के छोटे भाई कृष्ण मुरारी दिलावर और उनके बेटे पवन दिलावर ने इसी वार्ड से बीजेपी टिकट के लिए आवेदन किया है. कृष्ण मुरारी दिलावर लंबे समय से स्थानीय राजनीति में सक्रिय हैं. वो कई बार ग्राम पंचायत अरडान के सरपंच रह चुके हैं. बीजेपी संगठन में भी अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं.

कृष्ण मुरारी का कहना है कि पार्टी टिकट देती है तो वो चुनाव लड़ेंगे, लेकिन संगठन का फैसला उनके लिए सर्वोपरि होगा. वहीं पवन दिलावर का कहना है कि चुनाव लड़ना उनकी व्यक्तिगत इच्छा नहीं है और वो स्थानीय युवा और कार्यकर्ता उनसे चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे हैं. पवन ने यह भी कहा कि अगर पार्टी उनके चाचा कृष्ण मुरारी को टिकट देती है तो वे संगठन के फैसले के साथ खड़े रहेंगे. 

मदन दिलावर के छोटे भाई कृष्ण मुरारी दिलावर

मदन दिलावर के छोटे भाई कृष्ण मुरारी दिलावर

अलवर नगर निगम

इसी तरह से अलवर में भी टिकट के लिए दावेदारों की भारी भीड़ है. अलवर नगर निगम के 65 वार्डों के लिए बीजेपी को 800 से ज्यादा आवेदन मिले हैं. यानी औसतन हर वार्ड में करीब 10 से ज्यादा दावेदार टिकट की दौड़ में हैं. खास बात यह है कि यहां भी बड़े नेताओं के परिजन और करीबियों की दावेदारी सामने आ रही है. पूर्व मेयर और वर्तमान मेयर घनश्याम गुर्जर अपनी पुत्रवधू को चुनाव लड़ाने के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं. वहीं वार्ड नंबर 21 से यूआईटी के पूर्व एक्सईएन कुमार संभव अवस्थी की पत्नी सुशीला शर्मा ने भी बीजेपी से टिकट मांगा है. मंत्री संजय शर्मा के रिश्तेदार भी टिकट की मांग कर रहे हैं.

कांग्रेस में भी हनुमानगढ़ सहित कई जिलों में परिजनों को टिकट देने की खबरें सामने आ रही है हालांकि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के नेताओं का कहना है कि परिवार से कोई व्यक्ति टिकट के लिए दावेदार कर सकता है लेकिन पार्टी नेतृत्व योग्य और पार्टी की विचार धारा के प्रति समर्पित व्यक्ति को ही टिकट मिलेगा. 

फिलहाल टिकट को लेकर दावेदारों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं जिसका अंतिम फैसला पार्टी संगठन को करना है. लेकिन टिकट वितरण के साथ ही यह भी साफ होगा कि निकाय चुनाव में परिवारवाद के आरोपों से पार्टियां कितना बच पाती हैं.

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