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This Article is From Dec 16, 2025

महाराष्ट्र एंटी नारकोटिक्स की राजस्थान में रेड, प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी एमडी ड्रग्स फैक्टरी का पर्दाफाश

आरोपी अनिल पहले भी सादुलपुर में डोडा-चूरा तस्करी के मामले में गिरफ्तार हो चुका है और करीब 19 दिन जेल में रह चुका है. जेल से बाहर आने के बाद वह दोबारा इस अवैध कारोबार में लिप्त हो गया.

महाराष्ट्र एंटी नारकोटिक्स की राजस्थान में रेड, प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी एमडी ड्रग्स फैक्टरी का पर्दाफाश
झुंझुनूं में महाराष्ट्र एंटी नारकोटिक्स की रेड
Rajasthan:

महाराष्ट्र पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल ने राजस्थान में अब तक की सबसे बड़ी एमडी ड्रग्स फैक्टरियों में से एक का पर्दाफाश करते हुए झुंझुनूं जिले के धनूरी थाना क्षेत्र स्थित नांद का बास गांव में संचालित अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है. कार्रवाई में एमडी ड्रग्स, केमिकल, मशीनरी व अन्य उपकरणों सहित करीब 100 करोड़ रुपए मूल्य की सामग्री जब्त की गई है. इस फैक्ट्री का संचालन पूर्व सरपंच पति सुरेश सिहाग के भतीजे अनिल सिहाग द्वारा किया जा रहा था. एएनसी ने अनिल को एक किलो एमडी ड्रग्स की सप्लाई देने के दौरान सीकर से गिरफ्तार किया है. 

महाराष्ट्र पुलिस कमिश्नर निकेत कौशिक के अनुसार, 4 अक्टूबर को एएनसी ने भयंदर में ड्रग्स तस्करी के एक मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था. पूछताछ में सामने आया कि राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एमडी ड्रग्स का निर्माण किया जा रहा है. पुख्ता इनपुट मिलने के बाद एएनसी की टीम राजस्थान पहुंची. 13 दिसंबर को बोगस ग्राहक के जरिए अनिल सिहाग से संपर्क कराया गया. अनिल ने अगले दिन सुबह सीकर बुलाया. 14 दिसंबर की सुबह 6:30 बजे, जैसे ही अनिल एक किलो एमडी ड्रग्स लेकर सीकर पहुंचा, उसे कलेक्ट्रेट के सामने स्थित मिलन होटल के पास दबोच लिया गया.

12वीं पास है अनिल सिहाग

जांच में सामने आया कि अनिल सिहाग 12वीं पास है और खेतीबाड़ी करता है. वर्ष 2016-17 में वह अपने चाचा सुरेश सिहाग के मुर्गी फार्म में काम करता था. इसी दौरान उसकी दोस्ती बाजला निवासी सुभाष से हुई, जो नीमच से कार द्वारा डोडा पोस्त लाता था. अनिल ने सुभाष के साथ 5-7 चक्कर लगाए, जिसके बदले उसे प्रति चक्कर 5 हजार रुपए मिलते थे. इसके बाद उसने खुद डोडा पोस्त लाने का काम शुरू किया और तारानगर में अपने संपर्क विकास को सप्लाई देने लगा. उसे प्रति किलो 500 से 700 रुपए की कमाई होती थी.एक बार सादुलपुर (चूरू) में उसकी कार को रोका गया, लेकिन वह मौके से फरार हो गया.

15 दिन पहले ही ड्रग्स फैक्ट्री में शुरू किया था काम

पूछताछ में अनिल ने बताया कि उसने 15 दिन पहले ही एमडी ड्रग्स फैक्ट्री में काम शुरू किया था. उसका साथी नेतड़वास (सीकर) निवासी बिज्जू उर्फ जग्गा था, जिसने सुनसान जगह होने का हवाला देकर फैक्ट्री लगाने का प्रस्ताव दिया. बिज्जू ने कहा कि एमडी बनाने में तेज दुर्गंध आती है, इसलिए आबादी से दूर जगह चाहिए. 20 नवंबर को उसने केवल 3 दिन के लिए चाचा के मुर्गी फार्म में जगह देने के लिए अनिल को राजी कर लिया. बदले में 50 हजार रुपए देने का वादा किया गया. 26 नवंबर को बिज्जू हरियाणा नंबर की कार में केमिकल व उपकरण लेकर मुर्गी फार्म पहुंचा. मुर्गियों के दाने रखने वाले खाली कमरे में एमडी ड्रग्स बनाने का काम शुरू किया गया.

तस्करी में 19 दिन रह चुका है जेल

अनिल पहले भी सादुलपुर में डोडा-चूरा तस्करी के मामले में गिरफ्तार हो चुका है और करीब 19 दिन जेल में रह चुका है. जेल से बाहर आने के बाद वह दोबारा इस अवैध कारोबार में लिप्त हो गया.अनिल की गिरफ्तारी के बाद एएनसी ने उसके मोबाइल से बिज्जू उर्फ जग्गा को वॉट्सएप कॉल कर जयपुर रोड, सीकर पर बुलाया. वह वहां पहुंच भी गया, लेकिन गिरफ्तारी की भनक लगते ही कार तेज गति से भगाकर फरार हो गया.इसके बाद एएनसी टीम अनिल को लेकर नांद का बास गांव पहुंची, जहां से एमडी ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री, केमिकल, उपकरण और तैयार माल बरामद किया गया. एएनसी अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है. पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह के तार राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा और मध्यप्रदेश तक फैले हुए हैं. फरार आरोपी बिज्जू उर्फ जग्गा की तलाश जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

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