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पिता दिहाड़ी मजदूर, खेत में जेवलिन थ्रो की प्रैक्टिस, राजस्थान का हरीश बन सकता है 'नीरज चोपड़ा'

हरीश का परिवार बेहद ही साधारण है और आर्थिक स्थिति भी काफी सीमित है. पिता गणेशा राम दिहाड़ी मजदूर हैं, जो मजदूरी करके परिवार चलाते हैं.

पिता दिहाड़ी मजदूर, खेत में जेवलिन थ्रो की प्रैक्टिस, राजस्थान का हरीश बन सकता है 'नीरज चोपड़ा'
राजस्थान का हरीश बन सकता है 'नीरज चोपड़ा'

Rajasthan News: खेतों के बीच में भाग कर भाला फेंकते 15 साल के बच्चे का सपना नीरज चोपड़ा जैसे ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने का है. हाल ही में उसने राज्य में हुई अंडर 16 केटेगरी में स्टेट गेम्स में छठा स्थान हासिल किया है. 15 वर्षीय बच्चा राजस्थान के जालोर जिले का हरीश कुमार है, वह भवरानी गांव में ही धूल उड़ते खेतों में जेवलिन थ्रो की प्रैक्टिस करता है. जब हरीश कुमार ने 9वीं कक्षा में प्रवेश लिया तो फिजिकल एजेकेशन के शिक्षक दिनेश कुमार ने उसके हुनर को पहचाना. दिनेश कुमार खुद भारतीय टीम का हिस्सा रह चुके हैं और जेवलिन थ्रो में गोल्ड मेडलिस्ट हैं. 

सुबह से शाम तक करते हैं प्रैक्टिस

दिनेश कुमार का कहना है कि जब वे भवरानी गांव में आये तो नीरज चोपड़ा ने गोल्ड मेडल जीता था. उस समय नीरज का काफी क्रेज था. वह बताते हैं कि वे खुद अन्तराष्ट्रीय खिलाडी रह चुके हैं तो कुछ एथलेटिक्स के उपकरण खरीदे और उनका डेमोंस्ट्रेशन किया तो बच्चों को लगा, ये कुछ हटकर है. उनकी रुचि बढ़ी और उनको जेवलिन दिए और ये सुबह से शाम तक खेतों में जेवलिन फेंकते रहते, फिर मेरे पास आते कोचिंग के लिए.

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Photo Credit: धूल उड़ते खेतों में हरीश करता जेवलिन थ्रो की प्रैक्टिस करता है.

हरीश की है वर्ल्ड क्लास टेक्निक

हरीश के बारे दिनेश कुमार ने कहा कि वह छोटा था तो इसने तकनीक अच्छे से पकड़ ली. उसका शरीर सही तकनीक सीखने के लिए एकदम फिट थी. उस वक़्त और इसने वर्ल्ड क्लास तकनीक 100% अडॉप्ट कर ली. उसका जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. उसका कारण उसकी जेवलिन थ्रो में वर्ल्ड क्लास तकनीक है. ये बच्चा आगे जा कर देश के लिए ओलंपिक मेडल ला सकता है, लेकिन यहां कोई सुविधा नहीं है. न ही कोई खास इक्विपमेंट है. जालोर में कोई कोच नहीं है और न कोई ग्राउंड नहीं है. यहां फिजिकल एजुकेशन के टीचर्स ही पूरी व्यवस्था चला रहे है. 

देश के लिए मेडल लाना हरीश का सपना

2 कमरे के मकान में रह रहा हरीश का परिवार बेहद ही साधारण है और आर्थिक स्थिति भी काफी सीमित है. पिता गणेशा राम दिहाड़ी मजदूर हैं, जो मजदूरी करके परिवार चलाते हैं. इन सबके बावजूद हरीश के सपने बड़े हैं. हरीश का सपना देश के लिए खेलना और मेडल लाना है. NDTV से खास बातचीत में हरीश ने कहा, "मैंने दिनेश सर को जेवलिन फेंकते हुए देखा. फिर मैंने जेवलिन सीखा. पहली बार मेरी तीसरी रैंक आई है. मैंने स्टेट भी खेला है, यहां पर कोई ग्राउंड की व्यवस्था नहीं है तो मैं खेत में ही जेवलिन थ्रो करता हूं."

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हरीश 50-55 मीटर तक थ्रो कर सकता है. हालांकि, फिजिकल एजेकेशन के टीचर और कोच दिनेश को विश्वास है कि उसकी टेक्निक काफी शानदार है. ऐसे में वह आगे ओलंपिक लेवल का खिलाड़ी बन सकता है. हरीश के पिता गणेश कहते हैं कि पेंटर और खेती का काम करके वह और उनके बड़े बेटे दूसरे दो बच्चों के शिक्षा का खर्च उठाते हैं. उनका कहना है कि दिनेश कुमार जो हमारे बच्चों को सिखाते हैं वह उन्हें अच्छी शिक्षा देते हैं. मेहनत करते हैं और कहते हैं कि स्कूल के बाद 5 मिनट भी फ्री नहीं घूमना. वह खेतों पर बच्चों को खेलने के लिए कहते हैं. बच्चे गरीब परिवार से हैं तो उनको कोई सहायता मिल जाये तो आगे कुछ कर सकेंगे. इस छोटे से गांव भवरानी के पीएम श्री राजकीय उचच माध्यमिक विद्यालय में संसाधनों की कमी है.

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