Rajasthan News: राजस्थान एटीएस की गिरफ्त में आई बबीता धाकड़ उर्फ 'खदीजा' को सात दिन की रिमांड पूरी होने के बाद कोर्ट ने न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है. बबीता की गिरफ्तारी के बाद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक खतरनाक महिला विंग 'जमात-उल-मुमिनात' का पर्दाफाश हुआ है जो देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुका था.
ऑनलाइन धर्मांतरण के साथ कट्टरपंथ का जाल
जांच में सामने आया है कि बबीता पिछले दो साल से जैश-ए-मोहम्मद के संपर्क में थी. उसने सोशल मीडिया के जरिए ऑनलाइन कलमा पढ़कर अपना नाम बबीता से बदलकर 'खदीजा' रख लिया था. आतंकी आकाओं ने उसे पूरी तरह कट्टरपंथी बनाने के लिए नमाज और कुरान की शिक्षा देने का ढोंग रचा. उसे 'अबू-उबैदाह' नाम के एक व्यक्ति से निकाह का लालच देकर बरगलाया जा रहा था और पाकिस्तान भेजने की साजिश रची जा रही थी.
हनीट्रैप और फिदायीन हमले की तैयारी
बबीता के फेसबुक अकाउंट 'दुनिया धोखेबाज' से चौंकाने वाले सबूत मिले हैं, जहां वह हथियारों के साथ सक्रिय थी. उसके संपर्क में पाकिस्तान और अन्य देशों के 300 से अधिक संदिग्ध लोग थे. जांच एजेंसियों के अनुसार, बबीता को फिदायीन हमले के साथ-साथ सेना के जवानों को हनीट्रैप में फंसाने की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही थी. वह सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय सेना के जवानों के साथ संपर्क बनाकर नेटवर्क फैला रही थी.
ब्रेनवॉश का खतरनाक अभियान
एटीएस के मुताबिक, बबीता केवल एक कड़ी नहीं बल्कि इस नेटवर्क का मुख्य हिस्सा थी. उसने अन्य राज्यों की कई युवतियों को भी कट्टरपंथ के रास्ते पर लाने के लिए उनका ब्रेनवॉश करना शुरू कर दिया था. उसके व्हाट्सऐप चैट से जैश कमांडर अयु-ए-मोहम्मद और मसूद अजहर के साले युसुफ गौरी जैसे बड़े नाम सामने आए हैं.
समय रहते एटीएस की सतर्कता ने बबीता को जयपुर के वाटिका स्थित उसके घर से दबोचकर एक बड़े आत्मघाती षड्यंत्र को नाकाम कर दिया है. फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां उसके संपर्कों की गहनता से पड़ताल कर रही हैं ताकि अन्य स्लीपर सेल्स का पता लगाया जा सके.
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