जयपुर के चांदपोल गेट स्थित जनाना अस्पताल में गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे से बिजली गुल हो गई. इस दौरान मरीजों को खासी परेशानी देखने को मिली. बिजली जाते ही ग्राउंड फ्लोर के लेबर रूम, ओपीडी, जांच केंद्र, वार्ड और गलियारों में अंधेरा छा गया. लिफ्ट भी बंद हो गई. भीषण गर्मी के बीच भर्ती महिलाओं, नवजात शिशुओं और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. SMS मेडिकल कॉलेज से जुड़े इस अस्पताल में करीब 3 घंटे 20 मिनट तक ब्लैकआउट रहा और दोपहर 1:50 बजे बिजली बहाल हो सकी.
तीन घंटे प्रभावित रहा काम
अस्पताल में रोजाना करीब 700 मरीजों की ओपीडी होती है. बिजली बंद होने के कारण ऑनलाइन पर्चियां नहीं बन सकीं और बाद में ऑफलाइन पर्चियां बनानी पड़ीं. डॉक्टरों ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी में मरीजों को देखा. ब्लड, यूरिन और बायोप्सी जैसी जांचें बिलिंग ठप होने के कारण टालनी पड़ीं. भर्ती और डिस्चार्ज की प्रक्रिया भी करीब तीन घंटे तक प्रभावित रही.
वेंटिलेटर पर हैं 20 मरीज
एनआईसीयू में इस समय 72 नवजात भर्ती हैं, जिनमें से 20 वेंटिलेटर पर हैं. इनमें 14 वेंटिलेटर को जनरेटर से बिजली मिलती रही, जबकि 6 बैटरी बैकअप पर चलाए गए. एहतियात के तौर पर जेके लोन अस्पताल को संभावित शिफ्टिंग के लिए अलर्ट किया गया, हालांकि इसकी जरूरत नहीं पड़ी. जनाना अस्पताल के ब्लड बैंक में करीब 200 यूनिट रक्त मौजूद था. बिजली बंद होने से फ्रीज प्रभावित हुए, जिसके बाद लैब टेक्नीशियन्स ने वैकल्पिक व्यवस्था कर जनरेटर से एक फ्रीज चालू किया.
टांका लगाते समय चली गई बिजली
इसी दौरान पहली मंजिल स्थित मुख्य ऑपरेशन थिएटर में रोज की तरह सिजेरियन ऑपरेशन चल रहे थे. एक गर्भवती का ऑपरेशन पूरा हो चुका था, और डॉक्टर टांके लगा रहे थे, तभी अचानक बिजली गुल हो गई. डॉक्टरों ने टॉर्च और अन्य वैकल्पिक रोशनी की व्यवस्था में किसी तरह टांके पूरे किए, जबकि ऑपरेशन का इंतजार कर रहीं 6 गर्भवतियों को ओटी से बाहर भेजना पड़ा.
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, दो जगह केबल फॉल्ट होने से बिजली बाधित हुई. जनरेटर के जरिए NICU और अन्य इमरजेंसी सेवाएं चालू रखी गईं, लेकिन सीमित क्षमता के कारण पूरे अस्पताल को बैकअप नहीं मिल सका.
गर्भवती को ओटी से वापस भेजना पड़ा
बिजली गुल होने का असर मरीजों पर साफ दिखा. मुरलीपुरा की एक गर्भवती को ओटी ड्रेस पहनाकर अंदर ले जाया गया था, लेकिन बिजली जाते ही उसे वापस भेज दिया गया. वह सुबह से भूखी-प्यासी थी, और बाद में बिजली आने पर ही उसका ऑपरेशन हो सका. एक अन्य गर्भवती को भी ऑपरेशन के लिए बुधवार रात से खाना-पानी नहीं दिया गया था. बिजली कटने से उसका सिजेरियन टल गया, जिससे उसकी हालत बिगड़ने लगी और परिजन रोने लगे.
अस्पताल में व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद अस्पताल में व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. अस्पताल की नई बिल्डिंग करीब 75 करोड़ रुपये की लागत से बनी नई बिल्डिंग नौ महीने से तैयार है, लेकिन अब तक शिफ्टिंग नहीं हो सकी है. पुरानी इमारत में जगह-जगह प्लास्टर गिर रहा है और एसी व डक्टिंग सिस्टम भी खराब है, जिससे गर्मी में भर्ती महिलाओं और नवजातों को परेशानी झेलनी पड़ रही है. इसके बावजूद अभी तक प्रशासन अस्पताल को शिफ्ट नहीं कर रहा है.
NICU को जनरेटर से जोड़ा
अधीक्षक डॉ. नूपुर लोहिया ने बताया कि बिजली जाते ही एनआईसीयू को तुरंत जनरेटर से जोड़ दिया गया था. जनरेटर सीमित लोड ही संभाल सकता है, इसलिए इमरजेंसी सेवाओं को प्राथमिकता दी गई और अन्य ऑपरेशन रोकने पड़े. जिस महिला का सिजेरियन चल रहा था, उसका ऑपरेशन पूरा हो चुका था और केवल ऊपरी टांके लगाए जा रहे थे. ओटी में वैकल्पिक रोशनी उपलब्ध थी और सभी मरीज सुरक्षित हैं.
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