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राजस्थान-हरियाणा में 100 अजन्मों का हत्यारा गिरफ्तार, पेट में लड़की बताकर करवा देता था अबॉर्शन

लगातार छह महीने की निगरानी के बाद हरियाणा के डबवाली में लिंग परीक्षण गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है. इस दौरान एक शातिर दलाल की गिरफ्तारी हुई है, जो 100 से ज्यादा अज्मों को हत्याओं में शामिल रहा है. (हनुमानगढ़ से मनीष शर्मा की रिपोर्ट)

राजस्थान-हरियाणा में 100 अजन्मों का हत्यारा गिरफ्तार, पेट में लड़की बताकर करवा देता था अबॉर्शन
मोटी रकम के लिए बता देता था गर्भ में लड़की

लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्या करने वाले के खिलाफ राजस्थान के चिकित्सा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. 100 से ज्यादा भ्रूण की हत्याओं में शामिल एक दलाल को गिरफ्तार किया गया है. आरोपी दलाल संगरिया का रहने वाला है और उस पर राजस्थान के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और बीकानेर में गर्भवती महिलाओं को लेकर हरियाणा ले जाकर अवैध लिंग परीक्षण का आरोप है. जानकारी के मुताबिक, आरोपी दलाल राकेश कुमार महिलाओं के गर्भ में बेटी होने की झूटी जानकारी देकर ऑबर्शन के लिए प्रेरित करता था. जिसके बदले उसे मोटी रकम मिलती. 

लिंग परीक्षण के लिए मांगे 36 हजार रुपये

संयुक्त निदेशक देवेंद्र चौधरी ने बताया कि एनएचएम के प्रबंध निदेशक डॉ. जोगाराम के निर्देशन में टीम पिछले छह माह से नजर रखे हुए थी. पहले दो डिकॉय ऑपरेशन में शातिर आरोपी सतर्कता के चलते बच निकला, लेकिन तीसरे प्रयास में गर्भवती महिला को डिकॉय ग्राहक बनाकर दलाल से संपर्क किया गया. आरोपी ने भ्रूण लिंग परीक्षण के लिए 36,500 रुपये मांगे और महिला को हरियाणा के डबवाली स्थित एक निजी अस्पताल ले गया.

अस्पताल में सोनोग्राफी के बाद जैसे ही उसने कथित रूप से भ्रूण का लिंग बताया, पहले से तैनात पीसीपीएनडीटी टीम ने उसे मौके पर ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह फर्जी भ्रूण लिंग जांच के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूलता था. अधिकांश मामलों में गर्भ में बेटी होने की झूठी जानकारी देकर गर्भपात के लिए उकसाया जाता था.

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राजस्थान और हरियाणा में सक्रिय गिरोह

विभाग को आशंका है कि इस अवैध कारोबार के कारण अब तक सैकड़ों अजन्मे बच्चों की जान गई हो सकती है. गिरोह लंबे समय से राजस्थान और हरियाणा के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय बताया जा रहा है. जांच में सामने आया कि आरोपी किसी भी ग्राहक से मिलने से पहले उसकी पूरी पड़ताल करता था. वह गर्भवती महिला और उसके परिजनों की जानकारी जुटाने के साथ स्थानीय स्तर पर भी सत्यापन करवाता था, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सामने वाला पीसीपीएनडीटी टीम का सदस्य नहीं है.

पहचान छिपाने के लिए वह आमने-सामने मिलने से बचता और अधिकतर बातचीत फोन पर ही करता था. रंगे हाथ गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने नकद राशि लेने के बजाय ऑनलाइन भुगतान लिया. आरोपी राकेश कुमार वर्ष 2019 में भी पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत पकड़ा जा चुका है. उस समय उसका संगरिया में अल्ट्रासाउंड सेंटर था, जिसे कार्रवाई के बाद बंद करना पड़ा. कुछ समय तक वह इस गतिविधि से दूर रहा, लेकिन बड़े मुनाफे के लालच में फिर सक्रिय होकर फर्जी भ्रूण लिंग परीक्षण और गर्भ पात के अवैध काम से जुड़ गया.

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