जयपुर के रामपुरा कंवरपुरा गांव के जिस स्कूल में कल कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता आशुतोष रांका और अन्य कार्यकर्ता जाना चाहते थे, वहां एनडीटीवी की टीम उनसे पहले पहुंची. इस स्कूल को लेकर विवाद हुआ, वहां के हालात सच में कैसे हैं ये जानने के लिए पड़ताल की. स्कूल के तय समय 7 बजे से करीब 15 मिनट पहले यानी 6:45 बजे टीम मौके पर पहुंची. दो बच्चे कंधे पर स्कूल बैग लिए गाय के तबेले में जाते दिखे. वहां जाकर पेड़ के नीचे कच्चे आंगन को साफ करते हैं. एक छात्र दरी बिछाता है, टेबल और कुर्सियां लगाते हैं. तभी दो बच्चियां आती है, जिनमें से एक झाड़ू लगाना शुरू करती है. दूसरी बच्ची एक अन्य बच्ची की मदद से बोर्ड हटाती है. दरअसल, ये गाय का तबेला ही इन बच्चों का स्कूल है. क्योंकि स्कूल की पुरानी बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है. ये सभी मिलकर सफाई कर इसे विद्यालय यानी विद्या का मंदिर बना रहे हैं.
पोषाहार की गाड़ी देखकर दौड़ते बच्चे
स्कूल की शिक्षिका के आने से पहले बच्चों ने पूरी व्यवस्था कर दी है. परिसर में जब एक कुत्ता आ गया तो छोटी बच्ची डंडा लेकर उसे बाहर निकालने दौड़ती है और गेट बंद करती है. इतने में पोषाहार देने वाली गाड़ी आती है, बच्चे दौड़ते हैं. खिचड़ी, कढ़ी, रोटी और केले गाड़ी से बच्चों को दिए गए. स्कूल में कोई स्टाफ नहीं है, इसलिए बच्चे और पोषाहार बांटने वाला कार्मिक ही इस व्यवस्था को भी देख रहे हैं. थोड़ी देर में मैडम आती हैं और पाठशाला शुरू होती है. बच्चे पहाड़े बोल रहे हैं और उनके पहाड़ों की आवाज के बीच गाय की आवाज भी आ रही है.
स्कूल की बदहाल व्यवस्था पर मिला ये जवाब
पिछले साल झालावाड़ के पीपलोदी में स्कूल की छत गिरने से जब 7 बच्चों की मौत हो गई थी तो हाईकोर्ट ने प्रदेश में स्कूलों की स्थिति पर संज्ञान लिया था. जर्जर भवनों में स्कूल ना चलाने के आदेश दिए. इस विद्यालय का मुख्य भवन भी जर्जर है. यही वजह है कि बच्चों को इस गाय के तबेले में पढ़ाया जा रहा है.

जयपुर के रामपुरा कंवरपुरा स्कूल की हकीकत.
हाल ही में राजस्थान शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी किया कि स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और फोटो वीडियो बनाने पर प्रतिबंध रहेगा. एक साल पहले जब हम आए थे, ये बच्चे इसी पेड़ के नीचे पढ़ रहे थे. समय बदला है, तस्वीर नहीं बदली, जबकि इस तस्वीर की हकीकत बताने पर पाबंदी लगाने की कोशिश हो रही है. वहीं, जब एनडीटीवी की टीम ने शिक्षिका से स्कूल की बदहाली के सवाल पूछे तो उनका जवाब था, "हमें आदेश है कि फोटो-वीडियो शूट नहीं कर सकते." तबेले में चल रहे इस विद्यालय में ना पीने के पानी की व्यवस्था है, ना शौचालय है. पुरानी स्कूल के पास बने शौचालय पर ताला लगा है. अब बच्चे और उनकी टीचर सब इधर-उधर बाहर या गांव के लोगों के आसरे पर है. इससे सबसे ज्यादा दिक्कत बच्चियों और महिला शिक्षिकाओं को होती है.
निजी जमीन पर चल रही स्कूल, अब देना होगा किराया
यह जगह गांव के लालचंद और उनके परिवार की है. लालचंद ने बताया कि स्कूल बंद हुआ. मैडम ने हमसे बात की तो हमने जगह दे दी. इसके लिए कोई किराया नहीं लेते हैं, लेकिन एक साल हो गया. गाय दूसरी जगह बांधनी पड़ती है, चारा रखा है. इस जगह को किराए पर देना अब मेरी मजबूरी है. मुझे यह खाली करवाना पड़ सकता है.
सरकार की ओर से हाईकोर्ट में इन भवनों की मरम्मत के लिए एक पंचवर्षीय योजना दी गई है. पेश किए गए प्लान के मुताबिक अगले 5 साल में सरकार 12 हजार 335 करोड रुपए खर्च करने की योजना बना रही है. शपथ-पत्र के मुताबिक, सरकार 3 हजार 587 जर्जर स्कूलों के लिए 2 हजार 487 करोड़ रुपए से नए भवन बनाएगी. वहीं, 22 हजार 589 भवनों की मरम्मत के काम के लिए 1,129 करोड़ रुपए 83 हजार 783 जर्जर कक्षों की जगह 8,378 करोड़ रुपए से नए कक्ष बनाए जाएंगे. वहीं, प्लान में 13 हजार 616 जर्जर शौचालयों के निर्माण और मरम्मत के लिए 340 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना है. हालांकि, इस पूरे प्लान के लिए फंड जुटाना सबसे बड़ी चुनौती है. लेकिन उससे पहले सभी बच्चों के लिए ठीक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे.
अलवर में स्कूल की छत गिरने से मचा था हड़कंप
हाल ही में 12 अगस्त को अलवर जिले के थानागाजी में जोधवास में स्कूल की छत गिरने की घटना हुई. इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका और उनकी टीम वहां पहुंची. टीम ने वहां जाकर गंदे पानी की समस्या भी बताई. इसी दौरान टीम ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने स्कूल में घुसकर उन्हें सच्चाई दिखाने से भी रोका. इसके बाद शिक्षा विभाग का बाहरी व्यक्तियों के प्रतिबंध और फोटो वीडियो ना बनाने देने का ये आदेश आया तो आशुतोष ने इसे सरकार का सच्चाई छिपाने का जरिया बताया.
इसके बाद आशुतोष की टीम इस विद्यालय को दिखाने के लिए कल वहां पर पहुंची. लेकिन गांव वालो ने उनका विरोध किया. टीम को गांव से बाहर ही रोक दिया गया. कुछ लोगों ने इस दौरान पथराव किया. गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए. पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं को चोटें भी आईं. आशुतोष और उनकी टीम को बाहर तक खदेड़ा गया. हालांकि इसके बाद आशुतोष ने यह भी कहा कि भाजपा के लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, जबकि गांववालों ने तो हमें वहां खुद से बुलाया था.
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