देश के अधिकांश हिस्सों में शनिवार (21 मार्च) ईद का जश्न मनाया जाएगा. लेकिन अजमेर से करीब 7 किलोमीटर दूर स्थित दौराई गांव में इस बार हालात बिल्कुल उलट हैं. गांव की सड़कें सूनी पड़ी हैं और लोग अपने घरों में गुमसुम बैठे नजर आ रहे हैं. दौराई गांव में बड़ी संख्या में रहने वाले शिया समाज ने इस बार ईद नहीं मनाएगा. समाज के लोगों का कहना है कि उनके धर्मगुरु, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की मौत की खबर के बाद पूरे समुदाय में गहरा शोक है.
हर साल के विपरीत उलट हैं हालात
हर साल ईद के मौके पर दौराई गांव की गलियों में रौनक रहती थी. बाजारों में खरीदारी, घरों में सेवइयां और मिठाइयां बनती थीं, बच्चों को नए कपड़े दिलाए जाते थे और सड़कों पर रंगाई-पुताई व रोशनी की जाती थी. लेकिन, समाज के फैसले के बाद से गांव में रौनक नजर नहीं आ रही है.
कल मस्जिद में होगी शोक सभा
समाज के लोग काली पट्टी बांधकर शोक व्यक्त करने की तैयारी कर रहे हैं और किसी भी प्रकार के उत्सव से दूरी बना रहे हैं. रोजा मस्जिद में मौलाना इरफान हैदर के नेतृत्व में शोक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. इस दौरान धर्मगुरु को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया गया.
मौलाना बोले- दुख और आत्ममंथन का यह वक्त
मौलाना इरफान हैदर ने कहा कि यह समय जश्न का नहीं बल्कि दुख और आत्ममंथन का है, इसलिए समाज एकजुट होकर सादगी और शोक के साथ समय बिताएगा. इस निर्णय के बाद पूरे इलाके में ईद का उत्साह फीका पड़ गया है और हर तरफ मातम जैसा माहौल बना हुआ है.
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