आईपीएस मनीष अग्रवाल पर उनके साले ने अपने बच्चे को कथित तौर पर अपने पास रखने का आरोप लगाया है. बच्चे के माता-पिता यानी आईपीएस के साले ने बच्चे को वापस दिलाने के लिए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है. हालांकि, अदालत ने इस मामले में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के तहत राहत देने से इनकार कर दिया है, और कस्टडी से जुड़े विवाद के लिए सक्षम सिविल अदालत में याचिका दायर करने के लिए कहा है.
अवैध हिरासत मानने से इनकार
जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि बच्चे के मां बाप ने खुद उसे सौंपा था, इसलिए इसे अवैध हिरासत में नहीं माना जा सकता. अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चे की कस्टडी से जुड़ा विवाद बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के दायरे में नहीं आता और इसके लिए पक्षकारों को सक्षम सिविल अदालत में याचिका दायर करनी होगी.
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आईपीएस ने बताया- कानूनी रूप से गोद लिया
मनीष के साले सिद्धार्थ गुप्ता ने याचिका दायर कर कहा कि उनकी बहन शर्मिष्ठा गुप्ता (आईपीएस अधिकारी की पत्नी) का आईवीएफ इलाज चल रहा था. डॉक्टर ने सलाह दी थी कि घर में बच्चा रहना ठीक होगा, इसलिए उन्होंने अपने बेटे को केवल 20 दिन के लिए उनके पास भेजा था. अब वे बच्चे को लौटाने से इनकार कर रहे हैं, जबकि न तो उन्होंने बच्चे को विधिक रूप से गोद दिया है, और न ही माता-पिता ने ऐसा कोई औपचारिक सहमति पत्र दिया है.
8 मई 2025 को गोद लेने की हुई प्रक्रिया
वहीं, IPS अधिकारी मनीष और उनकी पत्नी ने अदालत को बताया कि उन्होंने 8 मई 2025 को आगरा में गोद लेने की रस्म पूरी की थी, और बच्चे के माता-पिता ने फोन पर सहमति दी थी. उनका कहना है कि तब से बच्चा उनके साथ रह रहा है और वे उसे बेहतर शिक्षा और देखभाल दे रहे हैं.
बच्चा आईपीएस के पास ही अभी रहेगा
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बच्चे को जैविक माता-पिता ने स्वेच्छा से बुआ-फूफा के पास छोड़ा था, इसलिए इसे अवैध हिरासत नहीं कहा जा सकता. साथ ही, बच्चा लंबे समय से उनके साथ रह रहा है और वर्तमान वातावरण में अभ्यस्त हो चुका है, इसलिए फिलहाल उसके हित में यही है कि वह वहीं रहे. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि गोद लेने को लेकर विवाद का निपटारा सिविल अदालत में ही संभव है, न कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के तहत इसका निपटारा किया जाना चाहिए.
आईपीएस का विवादों से पुराना नाता
आईपीएस मनीष अग्रवाल फिलहाल पुलिस मुख्यालय में एसपी रूल्स के पद पर कार्यरत हैं. वे पहले भी विवादों में रहे. दौसा में एसपी रहते हुए उन पर हाईवे निर्माण कंपनी से रिश्वत मांगने का आरोप लगा था, जिसके चलते एसीबी ने उन्हें फरवरी 2021 में गिरफ्तार किया था. करीब 8 महीने के बाद उन्हें जमानत मिली. हालांकि, इस बीच वे अंतरिम जमानत पर बाहर आए थे. करीब 100 दिनों तक जेल में थे. 5 फरवरी 2021 को उन्हें सस्पेंड किया गया था. 16 मई 2024 को उनको बहाल किया गया. अब फिर चर्चा में आ गए हैं.
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