जयपुर से पहली बार आभूषणों की खेप ब्रिटेन रवाना हुई. CETA समझौते के तहत सोना-हीरे जड़ित, चांदी और प्लेटिनम के आभूषण भेजे गए हैं. जेम्स एंड ज्वेलरी जयपुर के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में शामिल है. शहर के निर्यात और कारोबार को नई गति मिलने की उम्मीद है. जयपुर के चार प्रमुख निर्यातकों ने पहली खेप में ज्वेलरी भेजा है. पहली खेप का कुल मूल्य लगभग 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर है. भारत–यूके CETA लागू होने के बाद भारतीय आभूषण पहली बार शून्य (Zero Duty) शुल्क के साथ यूके बाजार में प्रवेश करेंगे. समझौते में यूके का 4% तक का आयात शुल्क समाप्त हो गया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी.
नया अवसर मिलने की संभावना
उद्योग जगत को उम्मीद है कि यूके को भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात अगले तीन वर्षों में 754 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. समझौते से निर्यात, निवेश, रोजगार, एमएसएमई, कारीगरों और डिजाइनरों को नए अवसर मिलने की संभावना.
नए युग की शुरुआत बताया
सीमा शुल्क विभाग ने तेज और सुगम क्लीयरेंस के जरिए निर्यात को हर संभव सहयोग देने की प्रतिबद्धता दोहराई है. जीजेईपीसी ने इसे भारत के रत्न एवं आभूषण उद्योग के लिए ऐतिहासिक और नए युग की शुरुआत बताया है. जयपुर की रंगीन रत्नों और हाथ से बने आभूषणों में वैश्विक विशेषज्ञता से राजस्थान को इस समझौते का बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है.
रोजगार से नए अवसर पैदा होंगे
व्यापारियों का का मानना है कि इससे निर्यात, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. खासकर जयपुर जैसे शहर, जहां जेम्स एंड ज्वेलरी निर्यात अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार है, उन्हें इसका सीधा फायदा मिल सकता है.
जीजेईपीसी के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने कहा, "आज का दिन भारत के रत्न एवं आभूषण उद्योग के लिए गर्व और ऐतिहासिक महत्व का है. भारत–यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते के तहत पहली निर्यात खेप केवल वस्तुओं का निर्यात नहीं, बल्कि भारत के वैश्विक व्यापार के नए अध्याय की शुरुआत है. मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भारत सरकार का इस ऐतिहासिक समझौते को सफलतापूर्वक संपन्न कराने तथा उद्योग को निरंतर सहयोग प्रदान करने के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं."
ऐसे समय में जब अमेरिकी बाजार में डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ संबंधी फैसलों और उससे पैदा हुई अनिश्चितता ने भारतीय निर्यातकों की चिंता बढ़ाई है, भारत–यूके CETA जैसे समझौते नए बाजारों तक पहुंच बनाने और निर्यात को विविधता देने का महत्वपूर्ण अवसर बनकर उभरे हैं.
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