थार के रेगिस्तान में इस मानसून रेत के बीच पानी की लहरें दिखाई देंगी. जैसलमेर जिले के घांटियाली क्षेत्र में इंदिरा गांधी नहर परियोजना की मुख्य नहर पर बने आरडी-1356 एस्केप को विशाल जलाशय में बदल दिया गया है. करीब 28 किमी परिधि वाले बुर्जी-1356 एस्केप रिजर्वायर में मानसून के दौरान नहर का अतिरिक्त पानी जमा होगा. इस जलाशय की क्षमता 1406 एमसीएफटी है. अब तक मानसून में पंजाब की ओर से इंदिरा गांधी नहर प्रणाली में आने वाला अतिरिक्त पानी सिंचाई की मांग कम होने के कारण उपयोग नहीं हो पाता था. संग्रहण की व्यवस्था नहीं होने से यह पानी नहरों से बहकर अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर चला जाता था. अब इसे जैसलमेर के घांटियाली में बने इस विशाल जलाशय में रोका जाएगा.
28 किमी है एस्केप रिजर्वायर की परिधि
बुर्जी-1356 एस्केप रिजर्वायर की परिधि करीब 28 किमी है. इसकी औसत गहराई 13 मीटर है. रेगिस्तानी इलाके की रेतीली मिट्टी में पानी का रिसाव रोकने के लिए जलाशय की तली और ढलानों पर विशेष एचडीपीई शीट बिछाई गई है. इससे जलाशय में जमा पानी को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा. नहरबंदी के दौरान जब इंदिरा गांधी नहर में पानी की आपूर्ति प्रभावित होगी, तब यह जलाशय सुरक्षित जल भंडार के रूप में काम आएगा.
इंदिरा गांधी नहर परियोजना की मुख्य नहर पर कई जगह एस्केप बनाए गए हैं. इनका काम नहर में पानी का दबाव बढ़ने पर अतिरिक्त पानी को बाहर निकालना है. मानसून के दौरान नहर में पानी की आवक बढ़ जाती है, जबकि सिंचाई की मांग घट जाती है. ऐसे में अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने के बजाय उसका भंडारण करने के लिए एस्केप रिजर्वायर बनाने की योजना तैयार की गई. आरडी-1356 पर बने एस्केप को अब इसी उद्देश्य से बड़े जलाशय में विकसित किया गया है.
चार जगह बन रहे एस्केप रिजर्वायर
- आरडी-507 : सत्तासर, बीकानेर
- आरडी-750 : गजनेर लिफ्ट परियोजना क्षेत्र, बीकानेर
- आरडी-1121 : जोधपुर
- आरडी-1356 : बुर्जी, जैसलमेर
20 लाख से ज्यादा परिवार को होगा फायदा
इनमें आरडी-507 और बुर्जी-1356 एस्केप रिजर्वायर का काम पूरा हो चुका है. इन चार जलाशयों में जमा पानी का इस्तेमाल जल जीवन मिशन की 43 बड़ी पेयजल परियोजनाओं में किया जा सकेगा. इससे 6,707 गांवों के 20 लाख से ज्यादा परिवारों को फायदा मिलने की उम्मीद है. जैसलमेर और बाड़मेर जैसे पश्चिमी राजस्थान के जिलों में पेयजल की समस्या बड़ी चुनौती है. कई इलाकों में भूजल खारा है और बारिश भी सीमित होती है. ऐसे में नहर के अतिरिक्त पानी को रोककर उसका इस्तेमाल करना इन जिलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

समंदर जैसी दिखेगी रेत के बीच यह कृत्रित झील
जलाशय में मानसून के दौरान जमा किया गया पानी नहरबंदी के समय काम आएगा. नहर में पानी की आपूर्ति बंद होने के दौरान पेयजल परियोजनाओं को इस जलाशय से पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा. इससे पश्चिमी राजस्थान में पेयजल आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी. एस्केप रिजर्वायर बनाने की योजना लंबे समय से प्रस्तावित थी, लेकिन काम की गति धीमी थी.
प्रदेश में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद योजना के काम में तेजी लाई गई. अब बुर्जी-1356 एस्केप रिजर्वायर का काम पूरा हो चुका है. मानसून के दौरान जब इसमें पानी जमा होगा, तो थार के रेगिस्तान में 28 किमी की परिधि में फैली यह कृत्रिम झील रेत के बीच एक ‘समंदर' जैसी नजर आएगी. यानी जो पानी हर साल बहकर सीमा पार चला जाता था, अब वही पानी पश्चिमी राजस्थान के गांवों और परिवारों की प्यास बुझाएगा.
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