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22 एकड़ में बना एशिया का सबसे बड़ा 1857 की क्रांति का शहीदी स्मारक: विज

हरियाणा के ऊर्जा एवं परिवहन मंत्री अनिल विज ने कहा कि अंबाला छावनी में 1857 की क्रांति की चिंगारी मेरठ से पहले भड़की थी.

22 एकड़ में बना एशिया का सबसे बड़ा 1857 की क्रांति का शहीदी स्मारक: विज
हरियाणा के ऊर्जा एवं परिवहन मंत्री अनिल विज.
  • परिवहन मंत्री अनिल विज ने बताया कि 1857 की क्रांति का बिगुल अंबाला छावनी से मेरठ से पहले बजा था
  • स्मारक में 22 गैलरियां हैं, जिनमें देशभर के क्रांतिकारियों के संघर्ष को आधुनिक तकनीक से दर्शाया गया है
  • स्मारक का भूमिपूजन 2015 में हुआ और भाजपा सरकार के समर्थन से इसे तैयार कर देश के शहीदों को सम्मान मिला

हरियाणा के ऊर्जा एवं परिवहन मंत्री  अनिल विज ने कहा कि 1857 की क्रांति का बिगुल अंबाला छावनी की धरती से मेरठ से भी पहले बजा था, लेकिन इतिहास में इस गौरवशाली अध्याय को वह स्थान नहीं मिला, जिसका यह हकदार था. आजादी की लड़ाई में अंबाला छावनी के वीर सैनिकों और क्रांतिकारियों के योगदान को दुनिया के सामने लाने के उद्देश्य से 22 एकड़ में एशिया का सबसे बड़ा 1857 की क्रांति का शहीदी स्मारक तैयार किया गया है. इसका लोकार्पण केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने किया है. यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को देश की आजादी के लिए दिए गए बलिदान और संघर्ष की गाथा से रूबरू करवाएगा.

विज शहीद स्मारक के लोकार्पण के बाद आयोजित जनसभा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि बचपन से स्कूल और कॉलेज में पढ़ाया जाता रहा कि आजादी की लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी, लेकिन इतिहास का गहराई से अध्ययन करने पर पता चला कि 1857 की क्रांति का वास्तविक इतिहास इससे कहीं अधिक व्यापक है. उन्होंने बताया कि अंबाला में 10 मई 1857 से पहले ही अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं. अंग्रेजों के उस समय के सरकारी दस्तावेजों सन 1923-24 के गजेटियर में भी 10 मई को अंबाला छावनी में सैनिकों के विद्रोह का उल्लेख मिलता है, जोकि इस समय अंग्रेजों द्वारा लिखा जाता था.

उन्होंने कहा कि इतिहासकारों की पुस्तकों, अंग्रेज अधिकारियों के दस्तावेजों और पुराने नक्शों के अध्ययन से अंबाला में हुए संघर्ष के कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं. अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाने वाले सैनिकों को दबाने के लिए कार्रवाई की गई. सरकारी दस्तावेजों में अगस्त माह में परेड ग्राउंड में हुई एक घटना का भी उल्लेख है, जहां गोलीबारी में महज 10 मिनट के भीतर 135 भारतीय सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया गया था. उन्होंने कहा कि इन वीरों के बलिदान को उचित सम्मान दिलाने के लिए उन्होंने करीब 25 वर्षों तक लगातार आवाज उठाई और कई सरकारों के सामने स्मारक बनाने की मांग रखी.

विज ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी उन्होंने यह मांग उठाई थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दस्तावेजों के सत्यापन के बाद स्मारक बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन उस समय यह सपना पूरा नहीं हो पाया. वर्ष 2014 में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री  मनोहर लाल के सामने सभी ऐतिहासिक दस्तावेज रखे. मुख्यमंत्री ने स्मारक निर्माण को मंजूरी दी और आज अंबाला में 22 एकड़ में यह भव्य स्मारक बनकर तैयार है.

उन्होंने बताया कि स्मारक का भूमिपूजन 10 मई 2015 को किया गया था, ताकि इस दिन को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाने की परंपरा को आगे बढ़ाया जा सके. इसके बाद 11 मई 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री  मनोहर लाल ने इसका शिलान्यास किया था.

मंत्री  अनिल विज ने कहा कि स्मारक में 22 गैलरियां बनाई गई हैं, जिनमें अंबाला से लेकर मेरठ, रानी लक्ष्मीबाई और राव तुलाराम सहित देशभर के क्रांतिकारियों के संघर्ष और बलिदान को आधुनिक तकनीक के माध्यम से दर्शाया गया है. यहां इतिहास को देखने और समझने के लिए कम से कम छह घंटे का समय लेकर आना होगा. स्मारक में 63 मीटर ऊंचा कमल का फूल की आकृति का मेमोरियल टावर भी बनाया गया है, जिसका ऐतिहासिक महत्व है. इसके अलावा 300 सीटों का ऑडिटोरियम, लिफ्ट और अन्य आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की गई हैं.

उन्होंने कहा कि स्मारक में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. श्रद्धांजलि देने वाला व्यक्ति जब निर्धारित श्रद्धांजलि गैलरी में जाकर तकनीकी डिजिटल रूपी स्क्रीन पर हाथ रखेगा तो उसका नाम दर्ज होगा और उसके सम्मान में एक ज्वाला आकाश की ओर उठेगी. यह व्यवस्था शहीदों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है.

मंत्री  अनिल विज ने कार्यक्रम में पहुंचे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह, मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी, केंद्रीय मंत्री  मनोहर लाल, बीजेपी प्रभारी स्मृति ईरानी सहित सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया. संबोधन के दौरान  अनिल विज ने अंबाला छावनी की वीर धरती की माटी को माथे से लगाकर असंग, ज्ञात अज्ञात वीरों को अपनी श्रद्धांजलि भी अर्पित की. 

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