कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अपने बेहतरीन प्रदर्शन से देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मुलाकात की. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में डिस्कस थ्रो में देश को ब्रॉन्ज मेडल दिलाने वाली सीमा कालीरमन से भी पीएम मोदी मिले. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कमाल करने वाले खिलाड़ियों से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा, "आपने सिर्फ मेडल की संख्या बढ़ाई है, ऐसा नहीं है. आपने एक पीढ़ी को तैयार किया है."
सीमा कालीरमन ने प्रधानमंत्री से कहा कि आपके सामने बोलने में भी मुझे घबराहट हो रही है. उन्होंने आगे कहा, "मेरे दोस्तों के ग्रुप में कोई मुझसे अक्सर कहता था, जब भी मैं उनसे कहती थी कि 'भाई, यह तुम्हारे भले के लिए है, तुम्हें ऐसा करना चाहिए,' तो वे मुझसे कहते थे, 'क्या तुम पीएम मोदी से मिल रही हो कि हम तुम्हारी बात सुनें?' तो आज, जब मैं सच में आपसे मिल चुकी हूं, तो मैं उन्हें बता पाऊंगी कि 'हां, मैं पीएम मोदी से मिली हूं.'
बता दें कि महिला डिस्कस थ्रो में भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाने वाली एथलीट सीमा कालीरमन ने चार वर्ष के बेटे की जिम्मेदारी, पीएचडी की पढ़ाई के साथ-साथ ये उपलब्धि हासिल की, जो खेल के प्रति उनके जूनून का ही परिणाम है. सीमा की इस कामयाबी में उनके पति रविंदर की भी बड़ी भूमिका है.
सीमा का ब्रॉन्ज मेडल जीतने तक का सफर चुनौतियों से भरा रहा. चोट, प्रेग्नेंसी और तमाम तरह की चुनौतियों के बावजूद सीमा ने कभी अपना हौसला कम नहीं होने दिया. जब-जब जिंदगी ने खेल को उनसे दूर करने की कोशिश की तो सीमा ने हर बार शानदार वापसी की.
डिस्कस थ्रो के फाइनल में 27 वर्षीय सीमा के छह राउंड में से केवल दो ही थ्रो सही (वैलिड) हो पाए थे, क्योंकि बार-बार डिस्कस साइड नेटिंग में फंस जा रहा था. यह पोडियम सीमा के लिए पहला बड़ा इंटरनेशनल मेडल रहा. सीमा एक पीएचडी स्कॉलर भी हैं और चार साल के बेटे रुद्र की मां हैं.
सीमा को उनके पति रविंदर कालीरमन कोचिंग देते हैं. रविंदर खुद भारत के जाने-माने डिस्कस थ्रो एथलीट रहे हैं, और उन्होंने भारतीय अंडर-18 और अंडर-20 चैंपियनशिप में डिस्कस थ्रो में गोल्ड मेडल जीते थे. सीमा अपने स्पोर्ट्स करियर के साथ-साथ चौधरी बंसी लाल यूनिवर्सिटी (सीबीएलयू), भिवानी से फिजिकल एजुकेशन में पीएचडी भी कर रही हैं.
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