Tanvi Sharma wins Taipei Open 2026 title : 17 साल की तन्वी शर्मा ने गुयेन थुई लिन्ह को हराकर ताइपे ओपन 2026 BWF सुपर 300 का खिताब जीता. यह उनका पहला वर्ल्ड टूर खिताब है. 17 साल की तन्वी ने वर्ल्ड नंबर 21 खिलाड़ी के खिलाफ अच्छी बढ़त बनाए रखी और लगातार गेम 21-16, 21-16 से जीतकर सिर्फ 36 मिनट में जीत हासिल कर इतिहास रच दिया. इससे पहले तन्वी ने 2025 यूएस ओपन के शुरुआती दौर में गुयेन को हराया था. इस फाइनल मुकाबले में उन्होंने गुयेन के खिलाफ समझदारी से खेलते हुए बेहतरीन क्रॉस-कोर्ट शॉट्स लगाए, जिससे उनकी प्रतिद्वंद्वी को, जो दूसरे गेम तक ही थकान के संकेत देने लगी थीं उन्होंने कोर्ट पर इधर-उधर दौड़ना पड़ा.
तन्वी ने मुकाबले की शुरुआत आक्रामक अंदाज में की. उन्होंने अपने प्रभावी ड्रॉप शॉट से एनगुएन को लगातार छकाते हुए 4-1 की बढ़त बना ली. ड्रॉप शॉट और क्रॉस कोर्ट स्मैश का बेहतरीन मिश्रण करते हुए भारतीय खिलाड़ी ने बढ़त को 10-2 तक पहुंचा दिया. वियतनाम की खिलाड़ी तन्वी के खेल को पढ़ने और शटल की दिशा का सही आकलन करने में संघर्ष करती नजर आई.
At just 17, Tanvi Sharma's Resume reads like this:
— India_AllSports (@India_AllSports) August 2, 2026
🥈 World Junior Championships
🥇 Taipei Open (Super 300)
🥇 US Open (Super 300)
🥈 Guwahati Masters (Super 100)
🥈 Odisha Masters (Super 100)
World No. 1 (Junior) | One for the present | One for the future✨ pic.twitter.com/eORtIbHKcD
Couldn't be prouder of this girl. ❤️
— PV Sindhu (@Pvsindhu1) August 2, 2026
I've been saying for years that Tanvi has all the ingredients to become a very special player. The talent, the stroke-making, the courage to take on the best, it's all there. The only thing she needed was a little more stability and… https://t.co/i3iIxUpNQM pic.twitter.com/Rrnv9pusL6
खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं
17 साल और 222 दिन की उम्र में, तन्वी टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे कम उम्र की फाइनलिस्ट भी बनीं, उन्होंने कोरियाई डबल्स के दिग्गज ली योंग डे का रिकॉर्ड तोड़ा, जो 2006 में पुरुषों के डबल्स फ़ाइनल में पहुंचने के समय 17 साल और 287 दिन के थे.
कौन है 17 साल की तन्वी शर्मा, दिखती है साइना नेहवाल और पीवी सिंधु की झलक
केवल 17 साल की उम्र में, तन्वी शर्मा भारतीय बैडमिंटन में सबसे होनहार युवा टैलेंट में से एक बनकर उभरी हैं. पंजाब के होशियारपुर की रहने वाली तन्वी का स्पोर्ट्स का सफ़र कम उम्र में ही अपनी मां मीना शर्मा की देखरेख में शुरू हुआ, जो खुद एक पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी रही हैं. तन्वी ने कई सालों तक मशहूर पुलेला गोपीचंद अकादमी में ट्रेनिंग की और उसके बाद मशहूर कोच पार्क ताए-सांग के साथ अपनी ट्रेनिंग जारी रखी, ताए-सांगजो जो पीवी सिंधु के पूर्व कोच भी रहे हैं. तन्वी को आज को कामयाबी मिल रही है उसके पीछे अनुशासन, कड़ी मेहनत और कोर्ट पर निडर अंदाज का बड़ा हाथ रहा है.
पढ़ाई और बैडमिंटन दोनों में अव्वल
तन्वी की कहानी का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि उन्होंने स्कूल की पढ़ाई और इंटरनेशनल बैडमिंटन के बीच कैसे तालमेल बिठाया. विदेश में टूर्नामेंट के लिए यात्रा करते समय भी तन्वी ने अपनी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी जारी रखी, जिससे यह साबित हुआ कि स्पोर्ट्स और पढ़ाई-लिखाई में कामयाबी एक साथ मिल सकती है. पंजाब की इस युवा खिलाड़ी ने वर्ल्ड जूनियर नंबर 1 का मुकाम हासिल किया और वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में सिंगल्स मेडल जीतने वाली 17 साल में पहली भारतीय महिला शटलर बनकर इतिहास रचा. उन्होंने 2024 एशियन टीम चैंपियनशिप में भारत को गोल्ड मेडल जिताने में भी मदद की.
दिखती है साइना नेहवाल और पीवी सिंधु की झलक
2026 में तन्वी का कद और बढ़ा जब उन्होंने ताइपे ओपन सुपर 300 के फाइनल को जीतकर इतिहास रच दिया. तन्वी ने अपने से बेहतर रैंकिंग वाले खिलाड़ियों को हराया और अपनी उम्र से कहीं ज्यादा परिपक्वता दिखाई. उनकी तेजी से बढ़ती कामयाबी को देखते हुए कई एक्सपर्ट्स उन्हें साइना नेहवाल और पीवी सिंधु जैसे भारतीय बैडमिंटन स्टार्स की संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर देख रहे हैं.
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