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जिस मैदान पर मां ने खेला था वर्ल्ड कप, अब वहीं बेटे का होगा डेब्यू, भावुक हुईं प्रीतम सिवाच

प्रीतम ने ‘भाषा’ से कहा मेरे लिये बहुत ही बड़ा पल होगा. जिस जगह पर मैने विश्व कप खेला, अब मेरा बेटा वहां खेलेगा. मैने सुबह ही उससे फोन पर कहा कि मां का अधूरा सपना तुम्हे पूरा करना है.

जिस मैदान पर मां ने खेला था वर्ल्ड कप, अब वहीं बेटे का होगा डेब्यू, भावुक हुईं प्रीतम सिवाच
प्रीतम सिवाच

हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली भारतीय हॉकी टीम को पांच दशक बाद विश्व कप में पदक की प्रबल दावेदार बताते हुए दिग्गज पूर्व खिलाड़ी प्रीतम सिवाच ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि उनका अधूरा सपना उनका बेटा पूरा करेगा जो वेल्स के खिलाफ शनिवार को पहले मैच में उसी जगह पर विश्व कप में पदार्पण करेगा जहां 28 साल पहले उन्होंने किया था. मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेल 2002 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम की सदस्य रही प्रीतम ने जब 1998 में नीदरलैंड में विश्व कप में पदार्पण किया था तब उनके बेटे यशदीप का जन्म भी नहीं हुआ था. भारतीय टीम के डिफेंडर यशदीप अब उसी जगह पर पहला विश्व कप मैच खेलेंगे लिहाजा मां बेटे के लिये यह भावुक पल होगा. 

प्रीतम ने ‘भाषा' से कहा, 'मेरे लिये बहुत ही बड़ा पल होगा. जिस जगह पर मैने विश्व कप खेला, अब मेरा बेटा वहां खेलेगा. मैने सुबह ही उससे फोन पर कहा कि मां का अधूरा सपना तुम्हे पूरा करना है.' उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि यह टीम पदक लेकर लौटेगी. कई साल बाद ऐसा माहौल बना है और टीम का मनोबल भी ऊंचा है. बड़ी टीमों से लगातार खेले हैं और तैयारी पक्की लग रही है.'

अपनी हॉकी अकादमी में कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार कर चुकी प्रीतम ने अपने बेटे के खेल के बारे में कहा, 'वह काफी शांतचित्त होकर खेलता है और तेजी से सीखता है जबकि मैं और मेरी बेटी (कनिका सिवाच) काफी आक्रामक खिलाड़ी हैं. शायद पोजिशनिंग का भी असर है चूंकि वह डिफेंडर है और हम स्ट्राइकर.'

अपने खेलने के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा, 'यह बिल्कुल आसान नहीं होता कि दुधमुंहे बच्चे को छोड़कर मैं शिविर में या टूर्नामेंट में रहती थी लेकिन इसके पीछे मुझसे ज्यादा परिवार की कुर्बानियां रही हैं. फिर जब राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण पदक मिला तो सारी कुर्बानियां और मेहनत सार्थक हो गई.'

उन्होंने भारतीय महिला हॉकी टीम से भी अपील की कि अगली पीढी की खिलाड़ियों का मार्ग प्रशस्त करने के लिये विश्व कप सुनहरा मौका है और कोई कसर नहीं छोड़नी है.

प्रीतम ने कहा, 'मैं महिला टीम से भी कहूंगी कि देश की महिला हॉकी का भविष्य तुम्हारे हाथ में है. अगली पीढी को हॉकी स्टिक थामने के लिये प्रेरित करना है तो जीतना होगा. उठते, बैठते , खाते , पीते हर समय बस जीत के बारे में सोचो. सेमीफाइनल तक तो जाना ही है. पुरूष टीम के पास आठ ओलंपिक स्वर्ण और एक विश्व कप है और अब तुम्हे भी अपनी विरासत तैयार करनी है.

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