Neeraj Chopra's plan: भारत के ओलिंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा अगले महीने जापान में होने वाले एशियन गेम्स (Asian Games 2026) से पहले रंग में आ रहे हैं. और शनिवार को स्विट्जरलैंड में आयोजित डायमंड लीग में नीरज ने 88.05 मी की दूरी तय कर अपने उस 'मिशन 28' की ओर कदम बढ़ा दिए हैं, जिस पर उनके नए कोच यान जेलिज्नी और वह पिछले कुछ समय से जी-जान से जुटे हुए हैं. जी हां, नीरज चोपड़ा का अब यहां टारगेट अगले महीने एशियन गेम्स में पदक जीतने से ज्यादा साल 2028 में होने वाले ओलिंपिक खेलों में नदीम अरशद के 92.45 मी. के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की तैयारियों और ज्यादा धार देना है. नीरज इस दिशा में धीरे-धीरे पूरी रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं और पहला नदीम अरशद के रिकॉर्ड को करीब दो साल बाद तोड़ने से पहले नीरज एशियन गेम्स में एक बार फिर से 90 मी. की दूरी को छूने पर काम कर रहे हैं. नीरज ने पिछले साल 16 मई को दोहा डायमंड लीग में पहली बार 90.23 की रिकॉर्ड दूरी को मापा था, लेकिन यह रिकॉर्ड बनाने के बाद चोपड़ा नियमित अंतराल पर चोटिल होते गए. लेकिन अब नीरज ने लक्ष्य को हासिल करने के लिए नई तकनीक और नए कोच जेलिज्नी का सहारा लिया है, जिन्होंने नीरज की 'कोर स्ट्रेंथ' और 'थ्रोइंग तकनीक' को पूरी तरह री-डिजाइन किया है. चलिए इसके पहलुओं को बारीकी से डिकोड करते हैं कि यह क्या है.
NEERAJ CHOPRA FINISHED 2ND AT THE DIAMOND LEAGUE LAUSANNE! 💎
— The Khel India (@TheKhelIndia) August 21, 2026
- Season Best throw of 88.05m 🔥🔥🔥 pic.twitter.com/iKbpOS2Li7
नीरज की 'कोर स्ट्रेंथ' पर काम
कोर स्ट्रेंथ कामतलब केवल एब्स नहीं, बल्कि पेट, पीठ, पेल्विक और कूल्हे की मांसपेशियां हैं. जेवलिन में कोर एक 'स्प्रिंग' की तरह काम करता है, जो दौड़ने की गति को भाले में ट्रांसफर करता है. और इस कोर स्ट्रेंथ के तहत कई बड़े और अहम पहलू आते हैं:-
1. कंगारू बॉउंडिंग और प्लायोमेट्रिक्स
इसके तहत नीरज के नए कोच ने नीरज की कोर और निचले शरीर की विस्फोटक ताकत बढ़ाने के लिए भारी वजन उठाने के बजाय प्लायोमेट्रिक ट्रेनिंग जैसे हर्डल जंप्स और सिंगल-लेग बाउंड्स की नीति बनाई है. पिछले कोच नीरोज को हेवी वेट ट्रेनिंग कराते थे, लेकिन अब इसमें कटौती की रणनीति है. इससे नीरज को अपने शरी को हवा में नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.
2. मेडिसिन बॉल रोटेशन
कोर स्ट्रेंथ को मजबूत करने के तहत काच का मेडिसन बॉल के इस्तेमाल का ज्यादा करने पर ज्यादा जोर है. नीरज हर दिन 3 से 7 किलोग्राम की भारी मेडिसिन बॉल को अलग-अलग एंगल से दीवारों पर फेंकते हैं. इससे उनके पेट के तिरछे हिस्से मजबूत होते हैं, जो थ्रो के वक्त शरीर को तेजी से घुमाने में मदद करते हैं.
3.एंटी-रोटेशनल कोर स्टेबिलिटी
थ्रो फेंकते समय शरीर का संतुलन न बिगड़े, इसके लिए वे केबल पुली और रेजिस्टेंस बैंड्स के जरिए 'पैलोफ प्रेस'जैसी एक्सरसाइज करते हैं. इसके पीछे का मकसद नीरज को चोट से बचाना है. पूर्व में नीरज को कमर और पेट के निचले हिस्से में गंभीर चोटें आई हैं. इसलिए वे 'डीप कोर मसल्स' को मजबूत कर रहे हैं, जिससे थ्रो के समय रीढ़ पर आने वाला भारी दबाव मांसपेशियों में बंट जाए. यह यह रीढ़ की हड्डी को झटके से चोटिल होने से भी बचाता है.

'थ्रोइंग तकनीक' में सुधार
यान जेलिज्नी के आने के बाद नीरज की थ्रोइंग तकनीक में कई सूक्ष्म लेकिन बड़े बदलाव किए जा रहे हैं ताकि वे 90+ मीटर की दूरी लगातार हासिल करते हुए नदीम अरशद के रिकॉर्ड से आगे निकल सकें. जानें तकनीक में नए कोच किन पहलुओं पर काम कर रहे हैं
4. अटैक एंगल में सुधार
नीरज का भाला अक्सर हवा में बहुत ऊपर चला जाता था. इससे हवा के घर्षण के कारण दूरी कम हो जाती थी. अब वे भाले को 34 से 36 डिग्री के आदर्श कोण पर रिलीज करने का अभ्यास कर रहे हैं, जिससे हवा को चीरते हुए भाला ज्यादा दूर जा सके.
5. ब्लॉकिंग लेग एक्शन
थ्रो फेंकने से ठीक एक सेकंड पहले किसी भी थ्रोअर को बाएं पैर को जमीन पर मजबूती से जाम करना होता है. और नए कोच के साथ मिलकर नीरज अपने बाएं पैर के 'ब्रेकिंग मैकेनिज्म' को और सटीक बना रहे हैं. और इसके पीछे का मकसद है रन-अप (दौड़ने) की पूरी काइनेटिक एनर्जी अचानक रुककर सीधे उनके कंधे और भाले में ट्रांसफर करना.
6. कंधे की लचक और 'व्हिप' एक्शन
थ्रो के अंतिम क्षणों में नीरज का शरीर एक धनुष की तरह खिंच जाता है. और यान जेलिज्नी उनके दाएं कंधे की मोबिलिटी पर काम कर रहे हैं. इसके पीछे लक्ष्य है नीरज के हाथ को 'चाबुक' की तरह तेजी से आगे ल लाना. और इसमें और गति और ताकत का संचार करना. हाथ की यह रफ्तार जितनी तेज होगी भाला उतना ही दूर गिरेगा.
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