कोच जसपाल राणा के निधन के बाद पिस्टल शूटर मनु भाकर पूरी तरह से टूट गई हैं. कोच जसपाल राणा को आखिरी श्रद्धांजलि देते हुए भावुक हो गईं. राणा ने शुक्रवार सुबह दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में 49 साल की उम्र में आखिरी सांस ली. भारतीय शूटिंग के दिग्गज खिलाड़ी का पार्थिव शरीर देहरादून में उनके घर लाए जाने के बाद, दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट और कई अन्य खिलाड़ी उन्हें आखिरी श्रद्धांजलि देने के लिए वहां पहुंचे.सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मनु भाकर को जसपाल के पिता नारायण सिंह राणा के पास बैठे हुए और बहुत दुखी देखा गया. मनु भाकर के आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे.
VIDEO | Dehradun, Uttarakhand: Double Olympic medallist Manu Bhaker arrives at the residence and shooting academy of her coach, Jaspal Rana, in Poundha to pay her respects after the mortal remains of the Indian shooting legend were brought there.
— Press Trust of India (@PTI_News) June 12, 2026
Rana passed away on Friday… pic.twitter.com/xvbmJnt8q1

भारत के सबसे मशहूर निशानेबाजों में से एक थे जसपाल राणा
भारत के सबसे मशहूर निशानेबाजों में से एक, राणा एक एथलीट और कोच दोनों के तौर पर एक समृद्ध विरासत छोड़ गए हैं. उन्होंने तीन दशकों से ज्यादा समय तक निशानेबाजी में अभूतपूर्व योगदान दिया. 28 जून 1976 को उत्तराखंड में जन्मे राणा ने 1994 में मिलान में 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल इवेंट में विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ जूनियर वर्ल्ड खिताब जीतकर दुनिया में अपनी पहचान बनाई. दो साल बाद, उन्होंने अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया. राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 पदक जीते, जिसमें 1994 और 2006 के बीच चार संस्करणों में नौ स्वर्ण पदक शामिल थे.

उन्होंने 8 एशियन गेम्स पदक भी जीते, जिसमें से चार स्वर्ण पदक थे. उनकी सबसे यादगार उपलब्धियों में 2006 के दोहा एशियन गेम्स शामिल हैं, जहां उन्होंने तेज बुखार के बावजूद तीन स्वर्ण पदक जीते और 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल इवेंट में 590 के विश्व रिकॉर्ड स्कोर की बराबरी की. निशानेबाजी (शूटिंग) से संन्यास के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की ओर रुख किया और भारतीय शूटर्स की अगली पीढ़ी को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई.

उनकी कोचिंग में ही मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक 2024 में निशानेबाजी में 2 कांस्य पदक जीते थे और एक ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली भारत की पहली एथलीट बनी थीं. निशानेबाजी में असाधारण योगदान के लिए जसपाल राणा को 1994 में अर्जुन अवॉर्ड और 1997 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. 2020 में उन्हें बतौर कोच द्रोणाचार्य पुरस्कार दिया गया था.
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